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जागे अधिकारी, मेंटेनेंस के लिए भेजी दोनों एंबुलेंस वापस आईं
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
Updated Sat, 24 Sep 2016 11:07 PM IST
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एंबुलेंस
- फोटो : bureau
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नागरिक अस्पताल में गड़बड़ाई एंबुलेंस सेवाओं में शनिवार को सुधार दिखा। विभाग की ओर यहां की जो दो एंबुलेंस को मेंटेनेंस के लिए भेजा गया गया था, अब उन्हें वापस बहादुरगढ़ में भिजवा दिया। ऐसे में अब कई दिनों बाद फिर सूमो और इको एंबुलेंस की सेवाएं फिर से मिलनी शुरू हो गई हैं। शनिवार के अंक में अमर उजाला ने एंबुलेंस समस्या की आवाज उठाई तो उसके बाद अधिकारियों ने तुरंत इस पर संज्ञान लेते हुए यहां पर पहले की तरह वापस दोनों एंबुलेंस भिजवा दी। इसके बाद खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित रेफर मरीजों को ज्यादा फायदा हुआ।
पिछले कई दिनों से नागरिक अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में एंबुलेंस सेवा की कमी मरीजों को खूब खल रही थी। दूर-दराज से अस्पताल में संस्थागत डिलीवरी कराने के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं और किसी भी केस में गंभीर मरीजों को अधिकांश बार समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में प्राइवेट वाहन हायर करके उन्हें इलाज के लिए या तो नागरिक अस्पताल में आना पड़ता था या फिर रोहतक पीजीआई जाना पड़ता। हालांकि विभाग की ओर से मरीजों की सुविधा को लेकर दूर-दराज के सामुदायिक केंद्रों से एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल करके व्यवस्था बनानी पड़ रही थी। ऐसे में कई बार एक मरीज को घर या फिर अस्पताल तक छोड़ने में समय लग जाने के चलते दूसरे कॉलर को या तो लंबा इंतजार करना पड़ता था या फिर उन्हें ऑटो, कार या फिर अन्य निजी वाहन हायर करके जाना पड़ता था। इससे उनकी जेबें भी अधिक ढीली हो रही थीं। गर्भवती महिलाओं और अज्ञात लोगों के लिए तो विभाग की ओर से 102 नंबर पर एंबुलेंस सेवा फ्री होती है, लेकिन एंबुलेंस वाहनों की कमी के चलते ऐसी स्थिति में बाहर से व्यवस्था करने के लिए बाध्य होना पड़ता था। कई बार तो केस ज्यादा होने के कारण दिक्कत आ जाती थी।
अमर उजाला ने एंबुलेंस वाहनों की लचर व्यवस्था को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया, जिस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए मेंटेनेंस के लिए नागरिक अस्पताल से भिजवाई गईं एंबुलेंस ठीक करवाकर यहां पर वापस भिजवा दिया। इन वाहनों के यहां मौजूद रहने से अब मरीजों को शनिवार से किसी भी तरह से एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ा। सबसे ज्यादा फायदा तो प्रसव कराने के लिए आने वाली महिलाओं और डिलीवरी के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर लौटने वाली जच्चा-बच्चा को हुआ। इसके अलावा किसी सड़क दुर्घटना और अन्य बीमारियों से पीड़ित गंभीर व्यक्तियों को भी।
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जिले को चार नई एंबुलेंस भी मिली : सीएमओ
एंबुलेंस सेवाओं को लेकर किसी भी तरह से कोई कमी नहीं खलने दी जाएगी। झज्जर जिले में चार नई एंबुलेंस मिली हैं। जल्दी ही इनकी सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इनमें से दो बहादुरगढ़ को मिलेंगी। मरीजों को किसी भी तरह से एंबुलेंस के लिए इंतजार नहीं करना होगा। बेहतर सुविधाएं देने में विभाग की ओर से कोई ढिलाई नहीं बरती जाती।
-डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ झज्जर।
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पिछले कई दिनों से नागरिक अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में एंबुलेंस सेवा की कमी मरीजों को खूब खल रही थी। दूर-दराज से अस्पताल में संस्थागत डिलीवरी कराने के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं और किसी भी केस में गंभीर मरीजों को अधिकांश बार समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में प्राइवेट वाहन हायर करके उन्हें इलाज के लिए या तो नागरिक अस्पताल में आना पड़ता था या फिर रोहतक पीजीआई जाना पड़ता। हालांकि विभाग की ओर से मरीजों की सुविधा को लेकर दूर-दराज के सामुदायिक केंद्रों से एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल करके व्यवस्था बनानी पड़ रही थी। ऐसे में कई बार एक मरीज को घर या फिर अस्पताल तक छोड़ने में समय लग जाने के चलते दूसरे कॉलर को या तो लंबा इंतजार करना पड़ता था या फिर उन्हें ऑटो, कार या फिर अन्य निजी वाहन हायर करके जाना पड़ता था। इससे उनकी जेबें भी अधिक ढीली हो रही थीं। गर्भवती महिलाओं और अज्ञात लोगों के लिए तो विभाग की ओर से 102 नंबर पर एंबुलेंस सेवा फ्री होती है, लेकिन एंबुलेंस वाहनों की कमी के चलते ऐसी स्थिति में बाहर से व्यवस्था करने के लिए बाध्य होना पड़ता था। कई बार तो केस ज्यादा होने के कारण दिक्कत आ जाती थी।
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अमर उजाला ने एंबुलेंस वाहनों की लचर व्यवस्था को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया, जिस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए मेंटेनेंस के लिए नागरिक अस्पताल से भिजवाई गईं एंबुलेंस ठीक करवाकर यहां पर वापस भिजवा दिया। इन वाहनों के यहां मौजूद रहने से अब मरीजों को शनिवार से किसी भी तरह से एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ा। सबसे ज्यादा फायदा तो प्रसव कराने के लिए आने वाली महिलाओं और डिलीवरी के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर लौटने वाली जच्चा-बच्चा को हुआ। इसके अलावा किसी सड़क दुर्घटना और अन्य बीमारियों से पीड़ित गंभीर व्यक्तियों को भी।
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जिले को चार नई एंबुलेंस भी मिली : सीएमओ
एंबुलेंस सेवाओं को लेकर किसी भी तरह से कोई कमी नहीं खलने दी जाएगी। झज्जर जिले में चार नई एंबुलेंस मिली हैं। जल्दी ही इनकी सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इनमें से दो बहादुरगढ़ को मिलेंगी। मरीजों को किसी भी तरह से एंबुलेंस के लिए इंतजार नहीं करना होगा। बेहतर सुविधाएं देने में विभाग की ओर से कोई ढिलाई नहीं बरती जाती।
-डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ झज्जर।