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तबाही के बाद सहमा शहर, कर्फ्यू जारी
झज्जर
Updated Tue, 23 Feb 2016 12:28 AM IST
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जाट आंदोलन की आड़ में उपद्रवियों द्वारा किए गए बवाल से पूरा शहर बुरी तरह सहमा हुआ है। हर शख्स की आंखों में खौफ दिखाई दे रहा है। शहर के चौक चौराहों पर जले हुए वाहन बवाल की दास्तान बयां कर रहे हैं।
लोग डरद के मारे घरों में दुबके हुए हैं। शहर के हर कोने में सेना ने मोर्चा संभाल रखा है। वहीं पूरे जिले में सोमवार सुबह से ही पंचायतों का दौर चल रहा था। पंचायतों में सरकार द्वारा जाटों को आरक्षण दिए जाने के आश्वासन को जाटों ने मानते हुए लगभग सभी रास्तों पर लगाए जाम खोलने शुरू कर दिए थे।
झज्जर-दिल्ली मार्ग पर कबलाना के लोगों ने भी जाम खोल दिया, जिससे वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। जानकारी हो किपिछले तीन दिन से हो रही हिंसा में उपद्रवियों द्वारा मचाए गए बवाल से शहर पूरी तरह तहस-नहस हो गया है। उपद्रवियों द्वारा काफी दुकानों व वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, वहीं सरकारी कार्यालयों को भी आग लगा दी गई। दूसरी ओर जाट नेताओं का कहना है कि जाट केवल अपना आंदोलन कर रहे थे। जाटों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया है। ये उपद्रव असामाजिक तत्वों द्वारा आंदोलन को खराब करने के लिए किया गया है।
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शहर के कई लोगों ने खाली किए मकान
शहर में दहशत के माहौल के कारण शहर की कई कॉलोनियों से लोग अपने मकान खाली कर शहर से पलायन कर गए हैं। मगर जिन कॉलोनियों से पलायन की सूचना है, वहां पर कोई भी इस बारे में कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। लोग डरे-सहमे अपने घर के दरवाजों के सामने खड़े रहते हैं और पूछने पर माहौल को बहुत ही सौहार्दपूर्ण बता रहे हैं।
जाट व गैर जाट सब में भय का माहौल
शहर में हुए बवाल के बाद हर व्यक्ति के चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता है। गैर जाट ही नहीं जाट समुदाय के लोग भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डर व कर्फ्यू के कारण लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इसी कारण शहर की सड़कें दिनभर पूरी तरह सुनसान रहीं।
सुबह से पंचायतों का दौर, शाम होते-होते खुलने लगे जाम
आठ दिन तक चले बवाल के बाद सरकार द्वारा जाटों को आरक्षण दिए जाने के बाद 9वें दिन जाट समाज की पंचायतों का दौर सोमवार को अल सुबह ही शुरू हो गया था। पंचायतों में हुए फैसलों के बाद जाम खुलने शुरू हो गए थे। दिल्ली रोड स्थित कबलाना गांव में भी पंचायत का आयोजन किया गया। इसके अलावा जिले में कई जगह पंचायतें हुई तथा जाम खोलने का फैसला लिया गया। शाम होते-होते रोहतक रोड, भिवानी रोड, छूछकवास रोड, बादली रोड, रेवाड़ी रोड व सोनीपत रोड रोड सहित अन्य लिंक रोडों पर लगाए जाम भी आंदोलनकारियों ने खोल दिए। जाम खुलने के कारण वाहनों का आवागमन फिर से शुरू हो गया है।
दो दिन में बदली शहर की सूरत
शहर में शांतिपूर्ण चल रहे आंदोलन के बाद शनिवार व रविवार को हुई हिंसा ने शहर की सूरत ही बदल डाली। उपद्रवियों ने दर्जनों की संख्या में दुकानें व कई मकान जला डाले। शहर में स्थित लगभग सभी सरकारी कार्यालयों को भी उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। देखते ही देखते करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया और कई दुकानें खंडहर में तब्दील हो गईं।
जाटों ने नहीं की हिंसा : कुलदीप सिंह
जाट नेता एवं कबलाना में आंदोलन चला रहे कबलाना निवासी कुलदीप सिंह ने कहा कि जाटों ने कोई हिंसा नहीं की है। जाटों ने अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया है। हिंसा की जो भी घटनाएं हुई हैं, वह असामाजिक तत्वों द्वारा जाटों को बदनाम करने व आंदोलन को कमजोर करने के लिए की गई हैं। हिंसा की इन घटनाओं का खामियाजा जाटों को भुगतना पड़ा है। जाटों को भी उपद्रवियों द्वारा की गई हिंसा की घटनाओं पर खेद है। कबलाना ने बताया कि दिल्ली रोड पर लगाया गया जाम खोल दिया है। इस मौके पर प्रवीन सरपंच कबलाना, सत्यव्रत, अजीत, सुनील, राजू, सोमबीर नंबरदार आदि मौजूद रहे।
मुआवजा राशि है कम: गोवर्धन सिंह
360 मंढ़ोली खाप के प्रधान गोवर्धन सिंह ने कहा कि जाट समाज के मृतकों को सरकार द्वारा दी जा रही 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि बहुत ही कम है। सरकार को इसे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आंदोलन में मारे गए आंदोलनकारियों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि वे सरकार से उम्मीद करेंगे कि इस बार वादा खिलाफी न की जाए। अगर ऐसा होता है तो फिर से आंदोलन किया जाएगा।
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लोग डरद के मारे घरों में दुबके हुए हैं। शहर के हर कोने में सेना ने मोर्चा संभाल रखा है। वहीं पूरे जिले में सोमवार सुबह से ही पंचायतों का दौर चल रहा था। पंचायतों में सरकार द्वारा जाटों को आरक्षण दिए जाने के आश्वासन को जाटों ने मानते हुए लगभग सभी रास्तों पर लगाए जाम खोलने शुरू कर दिए थे।
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झज्जर-दिल्ली मार्ग पर कबलाना के लोगों ने भी जाम खोल दिया, जिससे वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। जानकारी हो किपिछले तीन दिन से हो रही हिंसा में उपद्रवियों द्वारा मचाए गए बवाल से शहर पूरी तरह तहस-नहस हो गया है। उपद्रवियों द्वारा काफी दुकानों व वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, वहीं सरकारी कार्यालयों को भी आग लगा दी गई। दूसरी ओर जाट नेताओं का कहना है कि जाट केवल अपना आंदोलन कर रहे थे। जाटों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया है। ये उपद्रव असामाजिक तत्वों द्वारा आंदोलन को खराब करने के लिए किया गया है।
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शहर के कई लोगों ने खाली किए मकान
शहर में दहशत के माहौल के कारण शहर की कई कॉलोनियों से लोग अपने मकान खाली कर शहर से पलायन कर गए हैं। मगर जिन कॉलोनियों से पलायन की सूचना है, वहां पर कोई भी इस बारे में कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। लोग डरे-सहमे अपने घर के दरवाजों के सामने खड़े रहते हैं और पूछने पर माहौल को बहुत ही सौहार्दपूर्ण बता रहे हैं।
जाट व गैर जाट सब में भय का माहौल
शहर में हुए बवाल के बाद हर व्यक्ति के चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता है। गैर जाट ही नहीं जाट समुदाय के लोग भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डर व कर्फ्यू के कारण लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इसी कारण शहर की सड़कें दिनभर पूरी तरह सुनसान रहीं।
सुबह से पंचायतों का दौर, शाम होते-होते खुलने लगे जाम
आठ दिन तक चले बवाल के बाद सरकार द्वारा जाटों को आरक्षण दिए जाने के बाद 9वें दिन जाट समाज की पंचायतों का दौर सोमवार को अल सुबह ही शुरू हो गया था। पंचायतों में हुए फैसलों के बाद जाम खुलने शुरू हो गए थे। दिल्ली रोड स्थित कबलाना गांव में भी पंचायत का आयोजन किया गया। इसके अलावा जिले में कई जगह पंचायतें हुई तथा जाम खोलने का फैसला लिया गया। शाम होते-होते रोहतक रोड, भिवानी रोड, छूछकवास रोड, बादली रोड, रेवाड़ी रोड व सोनीपत रोड रोड सहित अन्य लिंक रोडों पर लगाए जाम भी आंदोलनकारियों ने खोल दिए। जाम खुलने के कारण वाहनों का आवागमन फिर से शुरू हो गया है।
दो दिन में बदली शहर की सूरत
शहर में शांतिपूर्ण चल रहे आंदोलन के बाद शनिवार व रविवार को हुई हिंसा ने शहर की सूरत ही बदल डाली। उपद्रवियों ने दर्जनों की संख्या में दुकानें व कई मकान जला डाले। शहर में स्थित लगभग सभी सरकारी कार्यालयों को भी उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। देखते ही देखते करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया और कई दुकानें खंडहर में तब्दील हो गईं।
जाटों ने नहीं की हिंसा : कुलदीप सिंह
जाट नेता एवं कबलाना में आंदोलन चला रहे कबलाना निवासी कुलदीप सिंह ने कहा कि जाटों ने कोई हिंसा नहीं की है। जाटों ने अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया है। हिंसा की जो भी घटनाएं हुई हैं, वह असामाजिक तत्वों द्वारा जाटों को बदनाम करने व आंदोलन को कमजोर करने के लिए की गई हैं। हिंसा की इन घटनाओं का खामियाजा जाटों को भुगतना पड़ा है। जाटों को भी उपद्रवियों द्वारा की गई हिंसा की घटनाओं पर खेद है। कबलाना ने बताया कि दिल्ली रोड पर लगाया गया जाम खोल दिया है। इस मौके पर प्रवीन सरपंच कबलाना, सत्यव्रत, अजीत, सुनील, राजू, सोमबीर नंबरदार आदि मौजूद रहे।
मुआवजा राशि है कम: गोवर्धन सिंह
360 मंढ़ोली खाप के प्रधान गोवर्धन सिंह ने कहा कि जाट समाज के मृतकों को सरकार द्वारा दी जा रही 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि बहुत ही कम है। सरकार को इसे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आंदोलन में मारे गए आंदोलनकारियों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि वे सरकार से उम्मीद करेंगे कि इस बार वादा खिलाफी न की जाए। अगर ऐसा होता है तो फिर से आंदोलन किया जाएगा।