{"_id":"598a032e4f1c1b031b8b4593","slug":"41502217006-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत से पहले जारी कर दिया मृत्यु प्रमाण पत्र","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मौत से पहले जारी कर दिया मृत्यु प्रमाण पत्र
Updated Wed, 09 Aug 2017 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही के किस्से आप अक्सर सुनते होंगे, लेकिन आज हम जिस वाकया के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। मृत्यु प्रमाणपत्र कब जारी किया जाता है? जाहिर है इस सवाल का जवाब यही होगा कि किसी इंसान की मौत के बाद ही मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होता है, लेकिन अगर हम आपको कहें कि बहादुरगढ़ के पटेल नगर की रहने वाली एक महिला का डेथ सर्टिफिकेट खरखौदा नगर पालिका ने मृत्यु से पहले ही जारी कर दिया, जबकि महिला की मौत बहादुरगढ़ में हुई थी और वह भी खरखौदा में डेथ सर्टिफिकेट बनने के दो महीने 7 दिन बाद।
बहादुरगढ़ के पटेल नगर निवासी विकास ने खरखौदा पुलिस को अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र खरखौदा नगर पालिका द्वारा गलत तरीके से बनाने की शिकायत की थी, लेकिन वहां की पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय विकास को बहादुरगढ़ थाने में शिकायत करने के लिए कह दिया। विकास ने बताया कि नगर पालिका खरखौदा की ओर से सावित्री का जो मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया गया है उसमें उसकी मां की मृत्यु 2 फरवरी 2014 को खरखौदा में हुई दर्ज की गई है, जबकि उसकी मां का निधन बहादुरगढ़ में 9 अप्रैल 2014 को हुआ था। जिसके बारे में उन्होंने नगर परिषद बहादुरगढ़ में सूचना दी और अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। उन्होंने अपने रिश्तेदारों देवेंद्र, बिजेंद्र, नरेंद्र व रवींद्र पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नगर पालिका खरखौदा में मिलीभगत करके उसकी मां का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवाया है। विकास ने इसकी शिकायत खरखौदा पुलिस को भी की। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करने से बचते हुए कह दिया कि इसकी शिकायत वह बहादुरगढ़ थाना में करे। विकास ने 26 जुलाई 2017 को बहादुरगढ़ के डीएसपी भगतराम को इसकी शिकायत की। डीएसपी की ओर से यह शिकायत थाना शहर में भेज दी गई। इसके बाद उसे थाना शहर में बुलाया गया और अधिकारियों की ओर से खरखौदा थाना का मामला बताया गया और वहीं पर कार्रवाई कराने को कहा।
दो स्थानों पर कैसे बना एक महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र
इस संबंध में कार्रवाई कब और कौन सी पुलिस करेगी। यह तो बाद का विषय है, लेकिन एक महिला दो स्थानों पर कैसे मर सकती है, यह देखने का विषय है। जब सावित्री का निधन बहादुरगढ़ में और वह भी खरखौदा नगर पालिका में बनाए गए मृत्यु प्रमाण पत्र की तिथि के दो महीने 7 दिन बाद हुआ है और बहादुरगढ़ नगर परिषद की ओर से यह मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो खरखौदा नगर पालिका ने यह कारनामा किस आधार पर रच दिया।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिकारी
थाना शहर प्रभारी प्रदीप कुमार का कहना है कि उनके पास इस संबंध में शिकायत पहुंची थी, लेकिन यह मामला खरखौदा थाना का ही बनता है। वहां की पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
- अलग-अलग एमसी ने जारी किए दो सर्टिफिकेट
- 2 फरवरी 2014 को खरखौदा नगर पालिका ने बनाया महिला का मृत्यु प्रमाण-पत्र
- 9 अप्रैल 2014 को बहादुरगढ़ नगर परिषद ने जारी किया डेथ सर्टिफिकेट
विज्ञापन
बहादुरगढ़।
सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही के किस्से आप अक्सर सुनते होंगे, लेकिन आज हम जिस वाकया के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। मृत्यु प्रमाणपत्र कब जारी किया जाता है? जाहिर है इस सवाल का जवाब यही होगा कि किसी इंसान की मौत के बाद ही मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होता है, लेकिन अगर हम आपको कहें कि बहादुरगढ़ के पटेल नगर की रहने वाली एक महिला का डेथ सर्टिफिकेट खरखौदा नगर पालिका ने मृत्यु से पहले ही जारी कर दिया, जबकि महिला की मौत बहादुरगढ़ में हुई थी और वह भी खरखौदा में डेथ सर्टिफिकेट बनने के दो महीने 7 दिन बाद।
बहादुरगढ़ के पटेल नगर निवासी विकास ने खरखौदा पुलिस को अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र खरखौदा नगर पालिका द्वारा गलत तरीके से बनाने की शिकायत की थी, लेकिन वहां की पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय विकास को बहादुरगढ़ थाने में शिकायत करने के लिए कह दिया। विकास ने बताया कि नगर पालिका खरखौदा की ओर से सावित्री का जो मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया गया है उसमें उसकी मां की मृत्यु 2 फरवरी 2014 को खरखौदा में हुई दर्ज की गई है, जबकि उसकी मां का निधन बहादुरगढ़ में 9 अप्रैल 2014 को हुआ था। जिसके बारे में उन्होंने नगर परिषद बहादुरगढ़ में सूचना दी और अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। उन्होंने अपने रिश्तेदारों देवेंद्र, बिजेंद्र, नरेंद्र व रवींद्र पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नगर पालिका खरखौदा में मिलीभगत करके उसकी मां का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवाया है। विकास ने इसकी शिकायत खरखौदा पुलिस को भी की। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करने से बचते हुए कह दिया कि इसकी शिकायत वह बहादुरगढ़ थाना में करे। विकास ने 26 जुलाई 2017 को बहादुरगढ़ के डीएसपी भगतराम को इसकी शिकायत की। डीएसपी की ओर से यह शिकायत थाना शहर में भेज दी गई। इसके बाद उसे थाना शहर में बुलाया गया और अधिकारियों की ओर से खरखौदा थाना का मामला बताया गया और वहीं पर कार्रवाई कराने को कहा।
विज्ञापन
दो स्थानों पर कैसे बना एक महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र
इस संबंध में कार्रवाई कब और कौन सी पुलिस करेगी। यह तो बाद का विषय है, लेकिन एक महिला दो स्थानों पर कैसे मर सकती है, यह देखने का विषय है। जब सावित्री का निधन बहादुरगढ़ में और वह भी खरखौदा नगर पालिका में बनाए गए मृत्यु प्रमाण पत्र की तिथि के दो महीने 7 दिन बाद हुआ है और बहादुरगढ़ नगर परिषद की ओर से यह मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो खरखौदा नगर पालिका ने यह कारनामा किस आधार पर रच दिया।
विज्ञापन
क्या कहते हैं अधिकारी
थाना शहर प्रभारी प्रदीप कुमार का कहना है कि उनके पास इस संबंध में शिकायत पहुंची थी, लेकिन यह मामला खरखौदा थाना का ही बनता है। वहां की पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
- अलग-अलग एमसी ने जारी किए दो सर्टिफिकेट
- 2 फरवरी 2014 को खरखौदा नगर पालिका ने बनाया महिला का मृत्यु प्रमाण-पत्र
- 9 अप्रैल 2014 को बहादुरगढ़ नगर परिषद ने जारी किया डेथ सर्टिफिकेट