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रेप की वारदातों ने झकझोर दिए बुद्धिजीवी

Tue, 16 Jan 2018 01:52 AM IST
Updated Tue, 16 Jan 2018 01:52 AM IST
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रेप की वारदातों ने झकझोर दिए बुद्धिजीवी
अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
प्रदेश में हो रही मासूम बच्चियों से रेप/गैंगरेप और उनकी हत्या की वारदात से झज्जर जिले का बुद्धिजीवी वर्ग भी सहमा हुआ है। शिक्षाविदों, राजनीतिक व्यक्तियों व सामाजिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहने वाले लोगों ने गहरी चिंता व्यक्त की है और ऐसी घटनाओं में कमी लाने के उपाय भी सुझाए हैं।
लिंगानुपात में असंतुलन
महिला समाज में निरंतर जागरूकता मुहिम चलाने वाली वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डा. आशा शर्मा ने कहा कि छोटी-छोटी कन्याओं के साथ इस तरह की वारदात होने की परिस्थितियां कई तरह की स्थितियां मिलने से बनी हैं। इसके लिए हमारे समाज के कई पक्ष दोषी हैं। लैंगिक असंतुलन बढ़ने से सारा का सारा ताना-बाना हिलता जा रहा है। अभिभावकों का भी दायित्व बनता है कि अपनी बेटियों को ही नहीं, बल्कि बेटों को भी ठीक ढंग से चलने/आचरण के लिए समझाएं। उन्होंने कहा कि हरेक स्कूल में काउंसलर होना चाहिए। ताकि वह लड़कों को भी अच्छाई-बुराई में अंतर करना सिखा सके।
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सजा नहीं मिलने से बढ़ती हैं वारदात
पूर्व नगर पार्षद और आरटीआई एक्टिविस्ट वजीर सिंह राठी ने इसके लिए लचर कानून व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पुलिस इस तरह के मामलों में ईमानदारी से काम करे तो इस तरह की वारदातें घट सकती हैं। रेप जैसी वारदात करने वालों को के लिए सख्त सजा सुनिश्चित नहीं होगी तो बुरी मानसिकता वाले लोगों का हौसला कम नहीं होगा और वे फिर से वारदात करेंगे। इस तरह के कुछ दोषियों को सख्त सजा दे दी जाए तो भविष्य में किसी भी मासूम कन्याओं पर गलत नजर डालने की हिम्मत नहीं होगी। राठी ने कहा कि बेरोजगारी भी युवाओं को अपराध की तरफ धकेलती है।
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संस्कार पूर्ण शिक्षा व परिश्रम जरूरी
ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष शर्मा ने शिक्षा व संस्कारों की कमी और लिंगानुपात की खराब स्थिति को इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रसार की कमी वाले तबके में अभिभावक अपने बेटों को सिर्फ बहु लाने के लिए कमाने को प्रेरित करते हैं। जब वे नहीं कमा पाते और कुंवारेपन का बोझ ढोना पड़ता है तो उनका मन इस तरह की घिनौनी वारदातों की तरफ बढ़ता है। इसलिए लड़कों को अच्छी शिक्षा ग्रहण करने और परिश्रम करने की शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कार युक्त शिक्षा देने की जरूरत है।
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