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48 घंटे बाद मिला माइनर में डूबे श्रमिक का शव
Updated Thu, 15 Mar 2018 01:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी श्रमिक का शव एनसीआर माइनर में 48 घंटे बाद घटनास्थल से 700 मीटर दूरी पर मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बहादुरगढ़ के सरकारी अस्पताल में भिजवा दिया है। शव बुधवार दोपहर फुलकर ऊपर आने के बाद मिला।
बुधवार को पुलिस ने निजी गोताखोरों का सहारा लिया। जबकि श्रमिकों ने अपने स्तर पर जेसीबी मशीन से तलाश करवाई। अब सवाल यह है कि 700 मीटर की दूरी में ही प्रशासन ने तलाश में दो दिन लगा दिए। मगर इसके बाद भी श्रमिक के शव की तलाश नहीं कर सके।
एनसीआर माइनर में सात किलोमीटर ही श्रमिक की तलाश करनी थी। घटनास्थल से सात किलोमीटर की दूरी पर मुंडाखेड़ा पंप हाउस है जहां से पार नहीं जाया जा सका। अब श्रमिक भी पुलिस और प्रशासन के रेस्क्यू अभियान पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। श्रमिक अमित पुत्र सुभाष सोमवार की देर साय एनसीआर माइनर में डूब गया गया। बुधवार को भी श्रमिक की तलाश की गई। मगर पुलिस की ओर बुलाए गए गोताखोर और दमकल कर्मियों ने दोपहर तक हाथ हिला दिए। प्रशासन की ओर से हाथ हिलाने पर बुधवार दोपहर श्रमिकों ने एकत्रित होकर अपने स्तर पर तलाश करते हुए जेसीबी मशीन का सहारा लिया। मगर जेसीबी मशीन भी पुलों के नीचे से तलाश नहीं कर सकी। इस दौरान श्रमिक काफी सदमे में रहे।
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पानी में डूबे अमित के छोटे भाई विनय का कहना है कि उत्तर प्रदेश स्थित रायबरेली से परिजन भी आ गए है। श्रमिकों के घर में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है। वहीं पुलिस चौकी इंचार्ज श्रीभगवान का कहना है कि एनसीआर माइनर में तलाश के दौरान बुधवार दोपहर बाद श्रमिक का शव फुलकर पानी में ऊपर आ गया। श्रमिक भी अपने स्तर पर तलाश में जुटे हुए थे। उल्लेखनीय है कि सोमवार की शाम को भट्टा श्रमिक अमित कुमार माइनर में नहाते समय पैर फिसलने से डूब गया था।
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बादली (झज्जर)।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी श्रमिक का शव एनसीआर माइनर में 48 घंटे बाद घटनास्थल से 700 मीटर दूरी पर मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बहादुरगढ़ के सरकारी अस्पताल में भिजवा दिया है। शव बुधवार दोपहर फुलकर ऊपर आने के बाद मिला।
बुधवार को पुलिस ने निजी गोताखोरों का सहारा लिया। जबकि श्रमिकों ने अपने स्तर पर जेसीबी मशीन से तलाश करवाई। अब सवाल यह है कि 700 मीटर की दूरी में ही प्रशासन ने तलाश में दो दिन लगा दिए। मगर इसके बाद भी श्रमिक के शव की तलाश नहीं कर सके।
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एनसीआर माइनर में सात किलोमीटर ही श्रमिक की तलाश करनी थी। घटनास्थल से सात किलोमीटर की दूरी पर मुंडाखेड़ा पंप हाउस है जहां से पार नहीं जाया जा सका। अब श्रमिक भी पुलिस और प्रशासन के रेस्क्यू अभियान पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। श्रमिक अमित पुत्र सुभाष सोमवार की देर साय एनसीआर माइनर में डूब गया गया। बुधवार को भी श्रमिक की तलाश की गई। मगर पुलिस की ओर बुलाए गए गोताखोर और दमकल कर्मियों ने दोपहर तक हाथ हिला दिए। प्रशासन की ओर से हाथ हिलाने पर बुधवार दोपहर श्रमिकों ने एकत्रित होकर अपने स्तर पर तलाश करते हुए जेसीबी मशीन का सहारा लिया। मगर जेसीबी मशीन भी पुलों के नीचे से तलाश नहीं कर सकी। इस दौरान श्रमिक काफी सदमे में रहे।
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पानी में डूबे अमित के छोटे भाई विनय का कहना है कि उत्तर प्रदेश स्थित रायबरेली से परिजन भी आ गए है। श्रमिकों के घर में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है। वहीं पुलिस चौकी इंचार्ज श्रीभगवान का कहना है कि एनसीआर माइनर में तलाश के दौरान बुधवार दोपहर बाद श्रमिक का शव फुलकर पानी में ऊपर आ गया। श्रमिक भी अपने स्तर पर तलाश में जुटे हुए थे। उल्लेखनीय है कि सोमवार की शाम को भट्टा श्रमिक अमित कुमार माइनर में नहाते समय पैर फिसलने से डूब गया था।