कोरोना: बहादुरगढ़ की चार हजार इकाइयों में से 90 फीसदी बंद, हताश श्रमिकों ने पकड़ा घर का रास्ता
सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन में औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित फैक्टरियां अनुमति लेकर चलाई जा सकती हैं लेकिन संक्रमण के मद्देनजर उद्यमी फिलहाल फैक्टरी चलाने से किनारा ही कर रहे हैं। वहीं श्रमिकों की घर वापसी का सिलसिला जारी है।
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हरियाणा में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन से उद्योगों की स्थिति एक बार फिर खराब हो गई है। बहादुरगढ़ में छोटी-बड़ी करीब 4000 औद्योगिक इकाई हैं। फिलहाल इनमें लगभग 90 फीसदी बंद पड़ी हैं। सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन में औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित फैक्टरियां अनुमति लेकर चलाई जा सकती हैं लेकिन संक्रमण के मद्देनजर उद्यमी फिलहाल फैक्टरी चलाने से किनारा ही कर रहे हैं। वहीं श्रमिकों की घर वापसी का सिलसिला जारी है।
इलाके की कुछ फैक्टरियों की ओर से पास बनवाए जा रहे हैं, लेकिन वे सिर्फ तैयार माल को डिस्पैच करने या फैक्टरी को सुरक्षित रखने के लिए हैं। फैक्टरियां बंद होने के कारण कुछ श्रमिक पैदल ही दिल्ली की तरफ निकल जाते हैं तो कुछ टूरिस्ट बसों से जाते हैं। यातायात के साधन काफी कम होने और कामगारों की संख्या अधिक होने की वजह से अधिकतर कामगार पैदल ही दिल्ली की ओर निकल रहे हैं।
दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैंड से यूपी व बिहार की बस पकड़कर ये अपने घर जा रहे हैं। लगभग हरेक श्रमिक के चेहरे पर काम न मिलने की परेशानी साफ दिखाई दे रही है। घर वापसी के बारे में पूछने पर बताते हैं कि फैक्टरी तो अब बंद हो गई है। काम उनके पास रहा नहीं है। ऐसे में वे यहां रहकर करेंगे भी क्या। दूसरा महामारी भी ज्यादा फैली हुई है। इसी वजह से वे अपने घर जाना चाहते हैं, घर में टाइम तो पास हो जाएगा। अपना घर तो अपना ही होता है।
लॉकडाउन का क्या भरोसा, कब तक चले
मधुबनी के निवासी रामआसरे एक स्थानीय फुटवियर फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन लगते ही फैक्टरी की तीन मशीनों पर काम करने वाले कारीगर अपने घर चले गए। इससे फैक्टरी की बाकी 9 मशीनों का काम भी रुक गया और मालिक को फैक्टरी ही बंद करनी पड़ी। परिणामस्वरूप दूसरी मशीनों के श्रमिक भी निकल गए। मैनेजर ने सभी मजदूरों का हिसाब भी कर दिया।
देवरिया के विनोद ने बताया कि उन्हें बहादुरगढ़ की जूता निर्माण फैक्टरी में काम मिला हुआ था। साथ में पत्नी भी काम करती थी। मगर अब काम नहीं रहा तो यहां किराये और रसोई चलाने के पैसे नहीं बचेंगे। लॉकडाउन का कोई अंदाजा नहीं है, यह कितने दिन तक चले। इसी वजह से घर लौट रहे हैं।
बहादुरगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र छिकारा का कहना है कि बहादुरगढ़ की लगभग सभी फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। कोई फैक्टरी प्रशासन से पास ले भी रहे है तो वो केवल पहले से तैयार माल को पैक कर भेजने के लिए अथवा अपने संयंत्र की सुरक्षा के लिए ले रही है।