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नागरिक अस्पताल में अव्यवस्थाएं देख भड़कीं डीजी हेल्थ
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:04 AM IST
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डीजी हेल्थ
- फोटो : bureau
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डीजी हेल्थ डॉ. कमला ने बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे नागरिक अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अस्पताल कर्मियों और डॉक्टरों को जैसे ही डीजी के आने की सूचना मिली तो अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कर्मचारी सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और अन्य कार्यों में लग गए, लेकिन जब डीजी ने पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया तो वे अव्यवस्थाएं देख भड़क गईं और उन्होंने डिप्टी सीएमओ और एसएमओ को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने 24 घंटे के दौरान सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की बात कही। सबसे ज्यादा नाराजगी डीजी ने सफाई व्यवस्था, दवाइयों की किल्लत और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में हो रही परेशानी को लेकर जताई। बाद में पत्रकारों से रूबरू होते हुए डीजी ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में बड़ी खामियां हैं। लापरवाही का खामियाजा आने वाले एक-दो दिनों में कुछ कर्मचारियों को सस्पेंशन या चार्जशीट के रूप में भुगतना पड़ेगा।
शिकायतें आती गईं और डीजी बुलाती गईं
डीजी जब अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद सीएमओ कार्यालय में पहुंची तो लंबे समय से कार्य न होने पर परेशान लोगों ने उनके समक्ष अपनी शिकायतें रखीं। जैसे-जैसे लोगों की शिकायतें आती गईं और संबंधित अधिकारी, कर्मचारी को डीजी बुलाती गईं। फिर क्या था, अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
ये आईं प्रमुख शिकायतें
सबसे पहले एक व्यक्ति ने डीजी के समक्ष दवाइयां न मिलने की शिकायत की। डीजी ने तुरंत फार्मासिस्ट को बुलाया और दवाइयों की वास्तविक स्थिति के बारे में पूछा। तब डीजी को पता चला कि 322 दवाइयों में से सिर्फ 193 दवाइयां ही उपलब्ध हैं। तब डीजी ने फटकार लगाते हुए तुरंत जो दवाईयां नहीं हैं, उनकी लिस्ट देने की बात कही।
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वहीं बाद में एक बुजुर्ग जन्म प्रमाण पत्र पिछले पांच माह से न बनाए जाने को लेकर पहुंचा। तभी डीजी ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले क्लर्क को बताया। डीजी ने कहा कि सबसे ज्यादा शिकायतें आपकी आ रही हैं। जब क्लर्क ने यहां डेपुटेशन पर सिर्फ एक या दो दिन तक झज्जर नागरिक अस्पताल में ड्यूटी होने की बात कही, तब डीजी ने एसएमओ को फटकार लगाई और जिला मुख्यालय पर रेगुलर स्टाफ की नियुक्ति करने की बात कही। फिर जैसे-जैसे शिकायतें आती गईं, डीजी अधिकारियों की खिंचाई करती गईं। डीजी के उग्र तेवर को देखते हुए पूरे अस्पताल कर्मचारियों की सांसें अटकी हुईं थीं।
शवगृह में जल्द फ्रिज मुहैया करवाने का आश्वासन
डीजी ने कहा कि बजट की कोई कमी नहीं है। मरीजों और उनके तीमारदारों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए जितना बजट चाहिए, वो आप ले सकते हो। इसके लिए वे सीधे उनसे बात या पत्राचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वीरवार शाम तक करीब छह लाख रुपये का बजट डाल दिया जाएगा।
सफाई व्यवस्था जल्द हो दुरुस्त
डीजी ने अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही। डीजी ने कहा कि सरकार प्रति वर्ष करोड़ों रुपये आउटसोर्सिंग पर खर्च करती है, लेकिन फिर भी सफाई नहीं हो पा रही है। ऐसी खामियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
मानदेय घोटाले में जल्द होगी कार्रवाई आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय को ठेकेदार द्वारा एक ही कर्मचारी दो से अधिक स्थानों पर ज्वाइनिंग दिखाकर घपला करने के मामले में कहा कि पूरा मामला उनके संज्ञान में है। जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। विभाग के पास आई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इन सबके कागजात दिखाने की बात भी डीजी ने कही। डीजी ने कहा कि डॉक्टर और अन्य कर्मचारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करें, ताकि किसी को परेशानी न हो।
एमओ की होती है अस्पताल की जिम्मेदारी
पिछले दिनों झज्जर के अस्पताल में एक नवजात और एक 13 साल की बच्ची की मौत के मामले में डीजी ने कहा कि हर मामले पर मीडिया लापरवाही का आरोप लगाता है। डॉ. मरीज को इलाज के लिए तभी एडमिट करता है, जब उसे लगता है कि यहां इलाज संभव है। वरना सारे अस्पताल रेफरल अस्पताल बन जाएंगे। डीजी ने माना कि उन्होंने बहुत कुछ यहां चेक किया। अस्पताल की जिम्मेदारी एमओ की होती है, लेकिन यहां सब ठीक नहीं मिला। इस दिशा में आने वाले एक-दो दिनों में कार्रवाई की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा कर्मियों को सस्पेंशन या चार्जशीट के रूप में भुगतना पड़ेगा।
डीजी ने माना डॉक्टरों की कमी
चतुर्थ श्रेणी कर्मियों द्वारा स्टिच, पट्टी आदि करने के सवाल पर डीजी ने कहा ये गलत काम नहीं है। स्टाफ की हर जगह कमी है। सबको इतना तो सीखना ही चाहिए कि कोई सड़क पर घायल भी हो तो उसकी मदद हो सके।
अपनी प्रोपर ड्रेस में आएं डॉक्टर और कर्मचारी
डीजी डॉ. कमला ने डॉक्टर और कर्मचारियों को अपनी ड्रेस में आने की बात कही। साथ में यह भी कहा कि ड्रेस पर नेम प्लेट भी लगी होनी चाहिए। ऐसा न करने वाले डॉक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मैडम! पांच दिन से काट रहे एक्सरे के लिए चक्कर
जिले के विभिन्न राजकीय स्कूलों में कार्यरत मिड डे-मील वर्करों ने भी डीजी हेल्थ को अपना दुखड़ा सुनाया। मिड डे-मील वर्कर सुदेश, दयावती, कमला आदि ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें मेडिकल प्रमाण पत्र जमा करवाने के लिए कहा गया है। इसके लिए उन्हें अपने एक्सरे करवाने हैं, लेकिन पिछले पांच दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। एक्सरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि केवल ढाई हजार रुपये उनका मानदेय है। पांच दिनों से सौ-सौ रुपये किराया भरकर झज्जर आ रहे हैं, लेकिन एक्सरा नहीं हो रहा। मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए डीजी ने एसएमओ से कहीं से भी उनके एक्सरे करवाने की बात कही।
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शिकायतें आती गईं और डीजी बुलाती गईं
डीजी जब अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद सीएमओ कार्यालय में पहुंची तो लंबे समय से कार्य न होने पर परेशान लोगों ने उनके समक्ष अपनी शिकायतें रखीं। जैसे-जैसे लोगों की शिकायतें आती गईं और संबंधित अधिकारी, कर्मचारी को डीजी बुलाती गईं। फिर क्या था, अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
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ये आईं प्रमुख शिकायतें
सबसे पहले एक व्यक्ति ने डीजी के समक्ष दवाइयां न मिलने की शिकायत की। डीजी ने तुरंत फार्मासिस्ट को बुलाया और दवाइयों की वास्तविक स्थिति के बारे में पूछा। तब डीजी को पता चला कि 322 दवाइयों में से सिर्फ 193 दवाइयां ही उपलब्ध हैं। तब डीजी ने फटकार लगाते हुए तुरंत जो दवाईयां नहीं हैं, उनकी लिस्ट देने की बात कही।
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वहीं बाद में एक बुजुर्ग जन्म प्रमाण पत्र पिछले पांच माह से न बनाए जाने को लेकर पहुंचा। तभी डीजी ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले क्लर्क को बताया। डीजी ने कहा कि सबसे ज्यादा शिकायतें आपकी आ रही हैं। जब क्लर्क ने यहां डेपुटेशन पर सिर्फ एक या दो दिन तक झज्जर नागरिक अस्पताल में ड्यूटी होने की बात कही, तब डीजी ने एसएमओ को फटकार लगाई और जिला मुख्यालय पर रेगुलर स्टाफ की नियुक्ति करने की बात कही। फिर जैसे-जैसे शिकायतें आती गईं, डीजी अधिकारियों की खिंचाई करती गईं। डीजी के उग्र तेवर को देखते हुए पूरे अस्पताल कर्मचारियों की सांसें अटकी हुईं थीं।
शवगृह में जल्द फ्रिज मुहैया करवाने का आश्वासन
डीजी ने कहा कि बजट की कोई कमी नहीं है। मरीजों और उनके तीमारदारों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए जितना बजट चाहिए, वो आप ले सकते हो। इसके लिए वे सीधे उनसे बात या पत्राचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वीरवार शाम तक करीब छह लाख रुपये का बजट डाल दिया जाएगा।
सफाई व्यवस्था जल्द हो दुरुस्त
डीजी ने अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही। डीजी ने कहा कि सरकार प्रति वर्ष करोड़ों रुपये आउटसोर्सिंग पर खर्च करती है, लेकिन फिर भी सफाई नहीं हो पा रही है। ऐसी खामियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
मानदेय घोटाले में जल्द होगी कार्रवाई आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय को ठेकेदार द्वारा एक ही कर्मचारी दो से अधिक स्थानों पर ज्वाइनिंग दिखाकर घपला करने के मामले में कहा कि पूरा मामला उनके संज्ञान में है। जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। विभाग के पास आई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इन सबके कागजात दिखाने की बात भी डीजी ने कही। डीजी ने कहा कि डॉक्टर और अन्य कर्मचारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करें, ताकि किसी को परेशानी न हो।
एमओ की होती है अस्पताल की जिम्मेदारी
पिछले दिनों झज्जर के अस्पताल में एक नवजात और एक 13 साल की बच्ची की मौत के मामले में डीजी ने कहा कि हर मामले पर मीडिया लापरवाही का आरोप लगाता है। डॉ. मरीज को इलाज के लिए तभी एडमिट करता है, जब उसे लगता है कि यहां इलाज संभव है। वरना सारे अस्पताल रेफरल अस्पताल बन जाएंगे। डीजी ने माना कि उन्होंने बहुत कुछ यहां चेक किया। अस्पताल की जिम्मेदारी एमओ की होती है, लेकिन यहां सब ठीक नहीं मिला। इस दिशा में आने वाले एक-दो दिनों में कार्रवाई की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा कर्मियों को सस्पेंशन या चार्जशीट के रूप में भुगतना पड़ेगा।
डीजी ने माना डॉक्टरों की कमी
चतुर्थ श्रेणी कर्मियों द्वारा स्टिच, पट्टी आदि करने के सवाल पर डीजी ने कहा ये गलत काम नहीं है। स्टाफ की हर जगह कमी है। सबको इतना तो सीखना ही चाहिए कि कोई सड़क पर घायल भी हो तो उसकी मदद हो सके।
अपनी प्रोपर ड्रेस में आएं डॉक्टर और कर्मचारी
डीजी डॉ. कमला ने डॉक्टर और कर्मचारियों को अपनी ड्रेस में आने की बात कही। साथ में यह भी कहा कि ड्रेस पर नेम प्लेट भी लगी होनी चाहिए। ऐसा न करने वाले डॉक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मैडम! पांच दिन से काट रहे एक्सरे के लिए चक्कर
जिले के विभिन्न राजकीय स्कूलों में कार्यरत मिड डे-मील वर्करों ने भी डीजी हेल्थ को अपना दुखड़ा सुनाया। मिड डे-मील वर्कर सुदेश, दयावती, कमला आदि ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें मेडिकल प्रमाण पत्र जमा करवाने के लिए कहा गया है। इसके लिए उन्हें अपने एक्सरे करवाने हैं, लेकिन पिछले पांच दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। एक्सरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि केवल ढाई हजार रुपये उनका मानदेय है। पांच दिनों से सौ-सौ रुपये किराया भरकर झज्जर आ रहे हैं, लेकिन एक्सरा नहीं हो रहा। मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए डीजी ने एसएमओ से कहीं से भी उनके एक्सरे करवाने की बात कही।