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मुआवजा नहीं दिया तो अदालत ने की रेलवे स्टेशन की प्रॉपर्टी अटैच
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रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहण की गई भूमि पर किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा की मूल राशि तो मिल गई थी। लेकिन उसकी पार्ट पेमेंट आज तक नहीं मिल पाई है। इसके लिए किसानों ने एडीजे अदालत में केस दायर किया हुआ है। इस पर 16 अगस्त को सुनवाई होनी है। अदालत ने इस मामले में रेलवे स्टेशन सहित अन्य प्रॉपर्टी को अटैच कर दिया है। जुलाई के अंत में रेलवे की डिप्टी चीफ मोना श्रीवास्तव ने अदालत से कुछ समय राशि जमा कराने के लिए मांगा था। अगर 16 अगस्त तक यह राशि रेलवे की ओर से जमा नहीं कराई गई तो अदालत इस मामले में कड़ा फैसला ले सकती है। किसान पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि इन केसों में करीब पांच लाख रुपये की राशि का मुआवजा पार्ट पेमेंट के रूप में बचा हुआ है। जबकि कुछ केस ऐसे भी हैं, जिनका एडीजे अदालत की ओर से मुआवजा बढ़ाए जाने के बावजूद भी रेलवे की ओर से वह राशि जमा नहीं कराई गई।
28 फरवरी 2007 को हुआ था अवॉर्ड
अधिवक्ता का कहना है कि 28 फरवरी 2007 को झज्जर व आसपास के गांव की जमीन अधिग्रहण करने के बाद अवॉर्ड सुनाया गया था। उस समय साढ़े 12 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया गया था। उसके बाद किसानों ने मुआवजा कम बताते हुए एडीजे राजेश मल्होत्रा की अदालत में केस दायर किया। वर्ष 2014 में अदालत ने इस मुआवजे को बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दिया था। उसके बाद जब किसान हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में पहुंचे तो अदालत ने वर्ष 2016 में यह मुआवजा राशि बढ़ाकर करीब 38 लाख रुपये कर दी थी। लेकिन यह राशि अब तक किसानों को नहीं मिली है। एडीजे अदालत की ओर से बनाए गए मुआवजे की राशि की पार्ट पेमेंट बची हुई हैं। इसकी सुनवाई 16 अगस्त को एडीजे विमल सपड़ा की अदालत में होनी है।
रेलवे की डिप्टी चीफ ने अदालत से कुछ समय मांगा था। उसके अनुसार अब रेलवे की तरफ राशि जमा कराने की उम्मीद है।
सुरेंद्र रंगा, अधिवक्ता, रेलवे।
अदालत ने रकम जमा करवाने के लिए रेलवे को 16 अगस्त तक का समय दिया है। रेलवे स्टेशन की प्रॉपर्टी को केस में अटैच किया हुआ है। 16 अगस्त को मामले की सुनवाई होनी है।
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राजेश कुमार, अधिवक्ता, किसान पक्ष।
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28 फरवरी 2007 को हुआ था अवॉर्ड
अधिवक्ता का कहना है कि 28 फरवरी 2007 को झज्जर व आसपास के गांव की जमीन अधिग्रहण करने के बाद अवॉर्ड सुनाया गया था। उस समय साढ़े 12 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया गया था। उसके बाद किसानों ने मुआवजा कम बताते हुए एडीजे राजेश मल्होत्रा की अदालत में केस दायर किया। वर्ष 2014 में अदालत ने इस मुआवजे को बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दिया था। उसके बाद जब किसान हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में पहुंचे तो अदालत ने वर्ष 2016 में यह मुआवजा राशि बढ़ाकर करीब 38 लाख रुपये कर दी थी। लेकिन यह राशि अब तक किसानों को नहीं मिली है। एडीजे अदालत की ओर से बनाए गए मुआवजे की राशि की पार्ट पेमेंट बची हुई हैं। इसकी सुनवाई 16 अगस्त को एडीजे विमल सपड़ा की अदालत में होनी है।
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रेलवे की डिप्टी चीफ ने अदालत से कुछ समय मांगा था। उसके अनुसार अब रेलवे की तरफ राशि जमा कराने की उम्मीद है।
सुरेंद्र रंगा, अधिवक्ता, रेलवे।
अदालत ने रकम जमा करवाने के लिए रेलवे को 16 अगस्त तक का समय दिया है। रेलवे स्टेशन की प्रॉपर्टी को केस में अटैच किया हुआ है। 16 अगस्त को मामले की सुनवाई होनी है।
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राजेश कुमार, अधिवक्ता, किसान पक्ष।