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सरपंचों को बरगला रही है भाजपा सरकार: भुक्कल
Mon, 08 Jul 2024 06:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 08 Jul 2024 06:24 AM IST
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धायक गीता भुक्कल,झज्जर
संवाद न्यूज एजेंसी
साल्हावास। विधायक गीता भुक्कल ने रविवार को झज्जर विधानसभा के अंतर्गत गांव मालियावास, खानपुर खुर्द आदि गांवों का दौरा किया। यहां उन्होंने भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायाब सैनी द्वारा 21 लाख तक बिना ई-टेंडरिंग के काम करने की घोषणा कर सरपंचों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सरपंच समझदार हैं वे इनके बहकावे में आने वाले नहीं है।
विधायक ने कहा कि सरपंच भूले नहीं है कि किस तरह तानाशाही बीजेपी सरकार ने अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे सरपंचों के ऊपर लाठियां भांजी थी। सरपंचों को ग्रांट न देकर सिर्फ घोषणा की जा रही है। घोषणाओं से गांव का विकास होने वाला नहीं है। ई-टेंडर के लिए बनाए गए नियमों के कारण आज सरपंचों में विरोधाभास की स्थिति भी बनी हुई है। सरपंचों के लिए 15 से 16 कार्यों की सूची सरपंचों पर एक तरह से थोपी हुई है। इसके अलावा कोई भी अन्य काम सरपंच नहीं करवा सकते।
सरपंचों पर लगाई पाबंदी तुरंत प्रभाव से हटाई जानी चाहिए। सरपंचों को वे सभी कार्य करने की छूट मिलनी चाहिए जो गांव में करवाए जाने हैं। ग्राम पंचायत को मिलने वाली ग्रांट राशि में से 50 प्रतिशत राशि के बिना टेंडर के काम करवाने होते हैं तथा 50 प्रतिशत राशि के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया जरूरी की हुई है। सरकार को इस बारे में पूर्ण रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए।
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साल्हावास। विधायक गीता भुक्कल ने रविवार को झज्जर विधानसभा के अंतर्गत गांव मालियावास, खानपुर खुर्द आदि गांवों का दौरा किया। यहां उन्होंने भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायाब सैनी द्वारा 21 लाख तक बिना ई-टेंडरिंग के काम करने की घोषणा कर सरपंचों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सरपंच समझदार हैं वे इनके बहकावे में आने वाले नहीं है।
विधायक ने कहा कि सरपंच भूले नहीं है कि किस तरह तानाशाही बीजेपी सरकार ने अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे सरपंचों के ऊपर लाठियां भांजी थी। सरपंचों को ग्रांट न देकर सिर्फ घोषणा की जा रही है। घोषणाओं से गांव का विकास होने वाला नहीं है। ई-टेंडर के लिए बनाए गए नियमों के कारण आज सरपंचों में विरोधाभास की स्थिति भी बनी हुई है। सरपंचों के लिए 15 से 16 कार्यों की सूची सरपंचों पर एक तरह से थोपी हुई है। इसके अलावा कोई भी अन्य काम सरपंच नहीं करवा सकते।
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सरपंचों पर लगाई पाबंदी तुरंत प्रभाव से हटाई जानी चाहिए। सरपंचों को वे सभी कार्य करने की छूट मिलनी चाहिए जो गांव में करवाए जाने हैं। ग्राम पंचायत को मिलने वाली ग्रांट राशि में से 50 प्रतिशत राशि के बिना टेंडर के काम करवाने होते हैं तथा 50 प्रतिशत राशि के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया जरूरी की हुई है। सरकार को इस बारे में पूर्ण रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए।
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