{"_id":"2fd5159b94497fd6f8cb95480d7da10e","slug":"bhukkal-shok-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उधर भुक्कल को जेठ की मौत का था गम, यहां उपद्रवी जला रहे थे कोठी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उधर भुक्कल को जेठ की मौत का था गम, यहां उपद्रवी जला रहे थे कोठी
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर
Updated Fri, 26 Feb 2016 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जिस समय उपद्रवी कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल की कोठी जला रहे थे। उस समय भुक्कल परिवार कैथल के कलायत में अपने परिजन की हुई मौत का सदमा झेल रहा था। हिंसा के बाद वीरवार को जब भुक्कल झज्जर पहुंची तो अपनी कोठी का हाल देख कर भावुक हो उठी। उन्होंने डीसी अनीता यादव को अपने घर हुए नुकसान की जानकारी दी, साथ ही उपद्रव के कारण शहर में हुए जानमाल के नुकसान का जायजा लिया।
भुक्कल ने पत्रकारों से बातचीत में सरकार को कोसते हुए कहा कि यह सरकार के नकारा होने का प्रमाण है। पूर्व शिक्षा मंत्री एवं कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल भी 20 फरवरी को हुए उपद्रव का शिकार बने लोगों में से एक है। शाम के वक्त उपद्रवी उनकी कोठी में घुसे और पार्किंग में खड़ी गाड़ी को आग लगा दी। इसके बाद कोठी में जमकर तोड़फोड़ व आगजनी हुई। यह वाकया तब का है, जबकि गीता भुक्कल अपने जेठ की मौत के गम मे डूबी थी। परिवार में मौत उसी दिन हुई थी। यह भुक्कल परिवार के लिए दोहरी मार रही। पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि उपद्रवियों ने उनकी कोठी और उनके विधानसभा क्षेत्र में भी जमकर नुकसान पहुंचाया है।
बोली, सरकार हिंसा की जिम्मेदारी स्वीकार करे
पत्रकारों से बातचीत में विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि हिंसा सरकार के नकारा होने का प्रमाण है। सरकार जिम्मेदार है और वह इसे स्वीकार भी करे। कोई पांच मिनट में ये सब नहीं हो गया, पुलिस जिम्मेदारी से भागी। सरकार आम जन की सुरक्षा नहीं कर सकती हे तो फिर राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करे। पुलिस को सरेंडर कर देना चाहिए।
विज्ञापन
सालों में खेती की कमाई से बनाई दुकान, उपद्रवियों ने कर दी स्वाह
मेरी आंखों के सामने उपद्रवी ने पहले दुकान का शटर काटा, लूटपाट की और जाते समय दुकान में आग लगा गए। मैं मूकदर्शक बना देखता रहा। करता भी क्या शोर करता तो शायद मेरा भी यही हाल होता। यह कहते-कहते श्यामसुंदर की आंखें भर आती है। पीड़ित ने बताया कि खेतों में खून पसीने की मेहनत से एक एक पाई जोड़ कर जूतों की दुकान खड़ी की थी। जिसे अब बेटा गौरव दुकान को संभाल रहा था। परिवार की यही पूंजी थी। आखिर हर तरफ से सदैव शांत रहने वाले शहर को एकाएक उबाल कैसे खा गया, श्याम इसको लेकर यही कहते हैं यहां किसी की नजर लगी है।
वहीं गौरव ने बताया कि ऐसा उपद्रव उन्होंने जिंदगी में पहली बार देखा है और अब सह भी रहे हैं। आस-पास की कई दुकानों को छोड़ दिया गया, लेकिन उनकी दुकान को तबाह कर दिया गया। ऐसा लगता है कि उपद्रव की आड़ में दुश्मनी निकाली गई हो। 20 फरवरी की सायं उपद्रव मचा तो कुछ लोगों ने उनकी दुकान पर हल्ला बोला। शटर टूटा नहीं तो एक तरफ से काट दिया गया। गौरव ने बताया कि उसके पिता श्याम सुंदर गांव काहनौर से हैं। पहले खेती-बाड़ी का काम करते थे।
भुक्कल ने पत्रकारों से बातचीत में सरकार को कोसते हुए कहा कि यह सरकार के नकारा होने का प्रमाण है। पूर्व शिक्षा मंत्री एवं कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल भी 20 फरवरी को हुए उपद्रव का शिकार बने लोगों में से एक है। शाम के वक्त उपद्रवी उनकी कोठी में घुसे और पार्किंग में खड़ी गाड़ी को आग लगा दी। इसके बाद कोठी में जमकर तोड़फोड़ व आगजनी हुई। यह वाकया तब का है, जबकि गीता भुक्कल अपने जेठ की मौत के गम मे डूबी थी। परिवार में मौत उसी दिन हुई थी। यह भुक्कल परिवार के लिए दोहरी मार रही। पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि उपद्रवियों ने उनकी कोठी और उनके विधानसभा क्षेत्र में भी जमकर नुकसान पहुंचाया है।
विज्ञापन
बोली, सरकार हिंसा की जिम्मेदारी स्वीकार करे
पत्रकारों से बातचीत में विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि हिंसा सरकार के नकारा होने का प्रमाण है। सरकार जिम्मेदार है और वह इसे स्वीकार भी करे। कोई पांच मिनट में ये सब नहीं हो गया, पुलिस जिम्मेदारी से भागी। सरकार आम जन की सुरक्षा नहीं कर सकती हे तो फिर राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करे। पुलिस को सरेंडर कर देना चाहिए।
विज्ञापन
सालों में खेती की कमाई से बनाई दुकान, उपद्रवियों ने कर दी स्वाह
मेरी आंखों के सामने उपद्रवी ने पहले दुकान का शटर काटा, लूटपाट की और जाते समय दुकान में आग लगा गए। मैं मूकदर्शक बना देखता रहा। करता भी क्या शोर करता तो शायद मेरा भी यही हाल होता। यह कहते-कहते श्यामसुंदर की आंखें भर आती है। पीड़ित ने बताया कि खेतों में खून पसीने की मेहनत से एक एक पाई जोड़ कर जूतों की दुकान खड़ी की थी। जिसे अब बेटा गौरव दुकान को संभाल रहा था। परिवार की यही पूंजी थी। आखिर हर तरफ से सदैव शांत रहने वाले शहर को एकाएक उबाल कैसे खा गया, श्याम इसको लेकर यही कहते हैं यहां किसी की नजर लगी है।
वहीं गौरव ने बताया कि ऐसा उपद्रव उन्होंने जिंदगी में पहली बार देखा है और अब सह भी रहे हैं। आस-पास की कई दुकानों को छोड़ दिया गया, लेकिन उनकी दुकान को तबाह कर दिया गया। ऐसा लगता है कि उपद्रव की आड़ में दुश्मनी निकाली गई हो। 20 फरवरी की सायं उपद्रव मचा तो कुछ लोगों ने उनकी दुकान पर हल्ला बोला। शटर टूटा नहीं तो एक तरफ से काट दिया गया। गौरव ने बताया कि उसके पिता श्याम सुंदर गांव काहनौर से हैं। पहले खेती-बाड़ी का काम करते थे।