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Jhajjar-Bahadurgarh News: होलिका दहन पर नहीं होगा भद्रा का साया
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बहादुरगढ़। खुशियों और रंगों भरा त्योहार होली मंगलवार 7 मार्च को है और उसके अगले दिन 8 मार्च को रंगों का पर्व दुल्हेंडी मनाया जाएगा। होली बसंत ऋतु में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री ने बताया कि इस बार होलिका दहन में भद्रा का साया नहीं रहेगा। पंचांग की मानें तो भद्रा 6 मार्च को शाम 4 बजकर 18 मिनट से आरंभ होगी। मंगलवार को सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त भी हो जाएगी। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 6 मार्च को शाम 4:17 मिनट पर हुई और इसका समापन 7 मार्च को शाम 6 बजकर 9 मिनट पर होागा।
सूर्य की बेटी शनि की बहन है भद्रा
शास्त्रों के अनुसार भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। यह कड़क स्वभाव की मानी गई है। ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि ब्रह्म देवता ने भद्रा को नियंत्रित करने के लिए कालगणना और पंचांग में विशिष्ट स्थान दिया है।
बन रहा है होली पर दुर्लभ योग
हांली पर्व पर चंद्रमा सिंह राशि में गोचर करेगा। इसके अलावा मकर राशि में सूर्य, बुध और शनि त्रिग्रही योग में विराजमान होंगे। पंडित बद्रीप्रसाद ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति और शुक्र मीन राशि में मंगल वृषभ राशि में विराजमान होंगे।
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होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका की पूजा करने वाले व्यक्ति को उत्तर व पूर्व दिशा में मुख करके बैठना चाहिए। पूजा के लिए एक लौटा जल, फूल माला, गुलरियों की माला, चावल गंध, गुड़, हल्दी, गेहूं की बाली आदि पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है। दहन से पहले इसको निकाल लिया जाता है और इसे ऐसे स्थान पर छिपा दिया जाता है। जिससे प्रहलाद के रूप में इसकी सुरक्षा हो सके।
होलिका दहन : 7 मार्च
समय : 6:55 से 9:00 (लाभ चौघडिय़ा व कन्या-स्थिर लग्न)
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सूर्य की बेटी शनि की बहन है भद्रा
शास्त्रों के अनुसार भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। यह कड़क स्वभाव की मानी गई है। ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि ब्रह्म देवता ने भद्रा को नियंत्रित करने के लिए कालगणना और पंचांग में विशिष्ट स्थान दिया है।
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बन रहा है होली पर दुर्लभ योग
हांली पर्व पर चंद्रमा सिंह राशि में गोचर करेगा। इसके अलावा मकर राशि में सूर्य, बुध और शनि त्रिग्रही योग में विराजमान होंगे। पंडित बद्रीप्रसाद ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति और शुक्र मीन राशि में मंगल वृषभ राशि में विराजमान होंगे।
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होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका की पूजा करने वाले व्यक्ति को उत्तर व पूर्व दिशा में मुख करके बैठना चाहिए। पूजा के लिए एक लौटा जल, फूल माला, गुलरियों की माला, चावल गंध, गुड़, हल्दी, गेहूं की बाली आदि पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है। दहन से पहले इसको निकाल लिया जाता है और इसे ऐसे स्थान पर छिपा दिया जाता है। जिससे प्रहलाद के रूप में इसकी सुरक्षा हो सके।
होलिका दहन : 7 मार्च
समय : 6:55 से 9:00 (लाभ चौघडिय़ा व कन्या-स्थिर लग्न)