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Jhajjar-Bahadurgarh News: निजी बस संचालकों की मनमानी, नहीं देते यात्रियों को टिकट

Wed, 04 Sep 2024 06:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 06:21 AM IST
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Arbitrariness of private bus operators, they do not give tickets to passengers

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झज्जर। जिले के अधिकतर रूटों पर निजी बस संचालकों की मनमानी चल रही है। निजी बस परिचालक यात्रा के दौरान यात्रा किराया तो वसूलते हैं, लेकिन उसके बदले में यात्री को टिकट नहीं देते हैं।
जिले में 100 से अधिक निजी बसें विभिन्न रूटों पर चलती है, लेकिन यात्रा के दौरान निजी बसों में यात्रियों को टिकट नहीं दी जाती। जब यात्री परिचालक से टिकट मांगते हैं तो उनके साथ बदतमीजी की जाती है। कई बार परिचालक यात्री को बस से उतारने की धमकी भी दे डालते हैं। ऐसा एक-दो बसों में नहीं बल्कि अधिकतर बसों में किया जा रहा है।
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पैसा बचाने के चक्कर में यात्रियों को टिकट नहीं देते हैं। ऐसे में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन निजी बसों की चेकिंग भी कोई नहीं करता। न तो आरटीए कार्यालय का इस तरफ कोई ध्यान है और न ही यातायात पुलिस बसों की जांच करती है। निजी बस संचालक अपनी मनमानी कर टिकट देना जरूरी नहीं समझते।
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निजी बस संचालकों के पास यदि खुल्ले पैसे नहीं होते तो वह बची हुई राशि वापस नहीं करते बल्कि वह अपने पास रख लेते हैं। अधिकतर रूटों पर पांच रुपये का चक्कर पड़ता है। झज्जर से बहादुरगढ़ का किराया 35 रुपये लगता है। यदि सवारी ने 40 या 50 रुपये दिए होते हैं तो बस परिचालक पांच रुपये वापस नहीं करते बल्कि 40 रुपये ही काट लेते हैं।


जिला परिवेदना समिति की बैठक में भी उठ चुका मामला
लगभग 11 माह पहले पूर्व मंत्री ओमप्रकाश यादव के समक्ष भी निजी बस संचालकों की तरफ से टिकट न देने और किराया ज्यादा वसूलने का मामला उठा था। तत्कालीन मंत्री ने डीसी को जांच करने के आदेश दिए थे। बाद में मामला रफादफा हो गया और कोई जांच नहीं हुई। न तो किराया ज्यादा लेना बंद हुआ और न ही टिकट देना।

वर्जन
यह मामला संज्ञान में नहीं है। यदि निजी बसों में परिचालक टिकट नहीं देता है तो गंभीर मामला है। इसकी जांच करवाई जाएगी।-रवींद्र यादव, आरटीए एवं एसडीएम झज्जर

वर्जन
सरकारी रोडवेज बसों में हर टिकट का रिकार्ड होता है। ऐसे में कोई हादसा होने की स्थिति में यह पता लग जाता है कि यात्री किस बस में था या उसका परिचालक कौन था। ऐसे ही निजी बस संचालकों को भी टिकट यात्रियों को देनी चाहिए। हादसा होने की स्थिति में यात्री या उसके परिजन क्लेम टिकट के आधार पर ही कर सकते हैं। इस तरफ आरटीए विभाग को देखना चाहिए। टिकट मिलना यात्री का हक होता है।-धनराज कुंडू, पूर्व रोडवेज महाप्रबंधक
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