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Jhajjar-Bahadurgarh News: वार्षिक पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित
Sun, 07 Jan 2024 07:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 07 Jan 2024 07:56 PM IST
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झज्जर। उत्तर प्रदेश शासन की योजना के अन्तर्गत राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा वर्ष 2023-24 के लिए उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मियों को देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली प्रदेश की भाषाओं व बोलियों में मौलिक एवं दीर्घकालीन साहित्यिक सेवा के लिए पुरस्कार के लिए 20 जनवरी 2024 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान वार्षिक पुरस्कार 2023-24 के आवेदन किए जा सकते हैं।
उपायुक्त शक्ति सिंह ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश की देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली भाषाओं बोलियों, उर्दू भाषा (फारसी लिपि में) के साहित्य की समृद्धि, प्रचार एवं राज्य कर्मियों में साहित्यिक अभिरुचि उत्पन्न करना है। इन सभी पुरस्कारों की धनराशि एक-एक लाख होगी। हिन्दी, उर्दू, गद्य-पद्य में सृजनात्मक साहित्य के अतिरिक्त यात्रा वृत्तांत, आत्मकथा, जीवनी, संस्कृति, संस्मरण, विज्ञान, पर्यावरण, अद्यावधिक विषय, आलोचनात्मक साहित्य, भूगोल, इतिहास, दर्शन, पौराणिक, शिक्षा एवं वित्त से संबंधित पुस्तकें या अन्य भाषा में लिखी गयी उपयोगी पुस्तकों का हिन्दी व उर्दू में किये गये अनुवाद की पुस्तकें भी पुरस्कार के लिए विचारणीय होंगी। उन्होंने विभागाध्यक्षों से आह्वान किया कि जिला के कर्मियों में इस बारे ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार करें और एवं नोटिस बोर्ड पर लगवाने की व्यवस्था करें ताकि जिला के कर्मचारी साहित्यकार अधिक से अधिक संख्या में अपनी प्रविष्टि प्रेषित कर सकें।
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उपायुक्त शक्ति सिंह ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश की देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली भाषाओं बोलियों, उर्दू भाषा (फारसी लिपि में) के साहित्य की समृद्धि, प्रचार एवं राज्य कर्मियों में साहित्यिक अभिरुचि उत्पन्न करना है। इन सभी पुरस्कारों की धनराशि एक-एक लाख होगी। हिन्दी, उर्दू, गद्य-पद्य में सृजनात्मक साहित्य के अतिरिक्त यात्रा वृत्तांत, आत्मकथा, जीवनी, संस्कृति, संस्मरण, विज्ञान, पर्यावरण, अद्यावधिक विषय, आलोचनात्मक साहित्य, भूगोल, इतिहास, दर्शन, पौराणिक, शिक्षा एवं वित्त से संबंधित पुस्तकें या अन्य भाषा में लिखी गयी उपयोगी पुस्तकों का हिन्दी व उर्दू में किये गये अनुवाद की पुस्तकें भी पुरस्कार के लिए विचारणीय होंगी। उन्होंने विभागाध्यक्षों से आह्वान किया कि जिला के कर्मियों में इस बारे ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार करें और एवं नोटिस बोर्ड पर लगवाने की व्यवस्था करें ताकि जिला के कर्मचारी साहित्यकार अधिक से अधिक संख्या में अपनी प्रविष्टि प्रेषित कर सकें।
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