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टीकरी बार्डर खोलने के लिए मानवाधिकार आयोग में लगाई गुहार
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टीकरी बार्डर। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। क्षेत्र के उद्यमियों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से टीकरी बार्डर का रास्ता खुलवाने की गुहार लगाई है। उद्यमियों ने कहा है कि इस रास्ते से दिल्ली-हरियाणा में आवागमन बंद होने से न केवल क्षेत्र के उद्योगों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है बल्कि लाखों लोगों का रोजगार भी प्रभावित हो रहा है।
मानवाधिकार आयोग में दी गई दरखास्त में उद्यमियों ने कहा है कि हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक शहर बहादुरगढ़ में सूक्ष्म, मध्यम और बड़े मिलाकर 9000 से अधिक उद्योग चलते हैं। इनमें जूते-चप्पल, ऑटोमोबाइल, स्पेयर पार्ट्स, पैकिंग आदि के उद्योग शामिल हैं। ये उद्योग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 750,000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं। लेकिन किसान आंदोलन के चलते नौ महीने से टीकरी बार्डर बंद है। बार्डर सील रहने से बहादुरगढ़ के उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं। करीब 2,000 इकाइयां लगभग बंद हैं या बंद होने की कगार पर हैं। अधिकतर यूनिट मालिक दिल्ली से हैं और लाखों कर्मचारी भी दिल्ली से आते हैं। सभी उद्योग कच्चे व तैयार माल की आपूर्ति के लिए काफी हद तक दिल्ली पर निर्भर हैं। उद्यमियों का कहना है कि इस सीलिंग के कारण कुल 80 हजार करोड़ टर्नओवर में से करीब 20000 करोड़ टर्नओवर का नुकसान हो रहा है।
बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरिन्दर छिकारा ने आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि बहादुरगढ़ के उद्योग मार्च 2020 में हुए पहले लॉकडाउन से ही मुश्किल समय से गुजर रहे हैं। किसान आंदोलन की वजह से सीमाओं को सील करने के कारण हालत ज्यादा खराब हो गई है। वाहनों को आसपास के गांवों की घुमावदार, संकरी व टूटी सड़कों से होकर बहादुरगढ़ आना पड़ता है। जिससे 5 मिनट की जगह कम से कम 2 घंटे लगते हैं। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों, व्यापारियों, माल से भरी गाड़ियों व अन्य लोगों को आने-जाने में बड़ी परेशानी होती है। बार्डर को दिल्ली पुलिस ने सील किया हुआ है।
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वर्जन-
हमने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दरखास्त देकर टीकरी बार्डर खोलने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। हमें पता है कि केंद्र सरकार और किसानों के बीच मुद्दों के निपटारे के लिए गतिरोध है। लेकिन टिकरी बार्डर की कम से कम एक तरफ की सड़क को खोल दिया जाए तो सभी को सुविधा होगी। आयोग संबंधित प्राधिकरण/दिल्ली पुलिस को वन साइड रोड खोलने का निर्देश दे तो अंतरराज्यीय आवाजाही को आसान बनाया जा सकता है और उद्योग सुचारु रूप से चल सकते हैं।
- नरिन्दर छिकारा, उद्योगपति, बहादुरगढ़
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मानवाधिकार आयोग में दी गई दरखास्त में उद्यमियों ने कहा है कि हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक शहर बहादुरगढ़ में सूक्ष्म, मध्यम और बड़े मिलाकर 9000 से अधिक उद्योग चलते हैं। इनमें जूते-चप्पल, ऑटोमोबाइल, स्पेयर पार्ट्स, पैकिंग आदि के उद्योग शामिल हैं। ये उद्योग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 750,000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं। लेकिन किसान आंदोलन के चलते नौ महीने से टीकरी बार्डर बंद है। बार्डर सील रहने से बहादुरगढ़ के उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं। करीब 2,000 इकाइयां लगभग बंद हैं या बंद होने की कगार पर हैं। अधिकतर यूनिट मालिक दिल्ली से हैं और लाखों कर्मचारी भी दिल्ली से आते हैं। सभी उद्योग कच्चे व तैयार माल की आपूर्ति के लिए काफी हद तक दिल्ली पर निर्भर हैं। उद्यमियों का कहना है कि इस सीलिंग के कारण कुल 80 हजार करोड़ टर्नओवर में से करीब 20000 करोड़ टर्नओवर का नुकसान हो रहा है।
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बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरिन्दर छिकारा ने आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि बहादुरगढ़ के उद्योग मार्च 2020 में हुए पहले लॉकडाउन से ही मुश्किल समय से गुजर रहे हैं। किसान आंदोलन की वजह से सीमाओं को सील करने के कारण हालत ज्यादा खराब हो गई है। वाहनों को आसपास के गांवों की घुमावदार, संकरी व टूटी सड़कों से होकर बहादुरगढ़ आना पड़ता है। जिससे 5 मिनट की जगह कम से कम 2 घंटे लगते हैं। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों, व्यापारियों, माल से भरी गाड़ियों व अन्य लोगों को आने-जाने में बड़ी परेशानी होती है। बार्डर को दिल्ली पुलिस ने सील किया हुआ है।
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हमने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दरखास्त देकर टीकरी बार्डर खोलने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। हमें पता है कि केंद्र सरकार और किसानों के बीच मुद्दों के निपटारे के लिए गतिरोध है। लेकिन टिकरी बार्डर की कम से कम एक तरफ की सड़क को खोल दिया जाए तो सभी को सुविधा होगी। आयोग संबंधित प्राधिकरण/दिल्ली पुलिस को वन साइड रोड खोलने का निर्देश दे तो अंतरराज्यीय आवाजाही को आसान बनाया जा सकता है और उद्योग सुचारु रूप से चल सकते हैं।
- नरिन्दर छिकारा, उद्योगपति, बहादुरगढ़