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Jhajjar-Bahadurgarh News: पंचायत चुनाव की सरगर्मियां तेज, मतदाताओं का मन टटोलने में जुटे दावेदार

Sun, 18 Feb 2024 03:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 18 Feb 2024 03:19 AM IST
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Activity for Panchayat elections intensifies, contenders busy in wooing the voters.
बादली। विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से तीन गांव में पंचायत चुनाव कराने के लिए आरक्षण जारी करने के बाद चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवारों ने घर-घर जाकर लोगों की नब्ज टटोलना शुरू कर दिया है। चौक चौराहे पर चुनाव की चर्चा जोर शोर से होने लगी।बादली, पाहसौर और एम पी माजरा गांव में अभी तक पंचायत चुनाव नही हुए हैं गांवों को नगर पालिका बनाना और बाद में जनमत संग्रह के माध्यम से पंचायती राज बहाल करना है। इससे पहली पंचायत में तीनों ही गांव में सरपंच पद महिला के लिए आरक्षित था। अब ग्रामीणों को पंचायती चुनाव का बेसब्री से इंतजार है।
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2010 से एससी वर्ग से बना है सरपंच
बादली में सरपंच पद सामान्य वर्ग के लिए है। पिछले चुनाव में सरपंच एससी महिला के लिए आरक्षित था जिसमें सुमन छनपाड़िया सरपंच चुनी गई थी। इससे पहले वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में एससी वर्ग से ही रतिराम छनपाड़िया चुनाव जीते थे। हालांकि सीट सामान्य थी लेकिन एससी वर्ग से रतिराम छनपाड़िया पर ग्रामीणों ने विश्वास जताया और चुनाव जिताकर गांव की बागडोर सौंपी। अब 14 साल बाद गांव में सामान्य श्रेणी के सरपंच बनने की आस लगी है। सामान्य श्रेणी संभावित उम्मीदवार ग्रामीणों के बीच में अपना प्रचार करने में जुट गए हैं।
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पहली बार महिला एससी के लिए आरक्षित हुआ पाहसोर
पाहसोर गांव में करीब 1200 मतदाता है और पंचायती चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। ब्राहमण बाहुल्य गांव में सरपंच पद महिला एससी के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसा पहला अवसर है जब गांव में एससी वर्ग से सरपंच का चुना जाएगा। गांव में इससे पहले सरपंच पद एससी महिला के लिए आरक्षित नहीं हुआ है, हालांकि पिछले चुनाव में भी महिला सरपंच रही है लेकिन वह ब्राहमण थी। इस बार सरपंच पद एससी महिला के लिए आरक्षित होने के चलते गांव में सुगबुगाहट शुरू हो गई है और चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है।
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पिछली बार भी रही महिला सरपंच
एमपी माजरा रोहतक के सांसद अरविंद शर्मा का पैतृक और क्षेत्र का सबसे छोटा गांव है। सरपंच पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। गांव में करीब 650 मतदाता है लेकिन चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। पिछली बार महिला ही गांव की सरपंच थी और अब एक बार महिला के लिए आरक्षित है। इससे पहले एमपी माजरा भी बादली गांव की पंचायत का हिस्सा होती थी लेकिन अब अलग से पंचायत का दर्जा दिया है। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर चर्चाओं का दौर है।
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