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सवा माह में मिले स्वाइन फ्लू के दस मरीज, एक मरीज आरएमएल में भर्ती
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। जिले में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। 10 जनवरी के बाद से अब तक 33 स्वाइन फ्लू के संभावित मरीजों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से विभाग के आंकड़ों के अनुसार स्वाइन फ्लू के दस मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। इन में से नौ मरीजों की हालत ठीक हो चुकी है। जबकि बहादुरगढ़ का एक मरीज दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती है। अब तक जिले के बहादुरगढ़ में तीन, झज्जर में दो, बराही, मदाना कलां, डावला, जाखौदा में एक-एक मरीज स्वाइन फ्लू का मिल चुका है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में मिले स्वाइन फ्लू के मरीजों के अन्य परिजनों को भी बचाव के लिए दवाइयां भी खिलाई गई हैं। ताकि मरीज से परिवार के दूसरे मरीजों में स्वाइन फलू का वायरस न फैले।
वेंटिलेटर की नहीं सुविधा :
जिले में स्वाइन फ्लू के 10 मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। मरीज को प्राथमिक तौर पर तो झज्जर व बहादुरगढ़ के अस्पतालों में मरीज को उपचार मिल जाएगा और अगर मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी तो वह जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीज को नहीं मिलेगी। ऐसी स्थिति में मरीज को रोहतक
पीजीआई में रेफर किया जाएगा या फिर किसी निजी अस्पताल से संपर्क किया जाएगा। हालांकि फिलहाल तक विभाग की तरफ से इस सुविधा के लिए किसी निजी अस्पताल से अनुबंध तक नहीं किया गया है। विभाग
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के अधिकारी केवल यह बात ही कह रहे हैं कि निजी अस्पताल से वेंटिलेटर के लिए सहयोग लिया जा सकता है। उसका खर्च मरीज वहन करेगा या फिर विभाग की तरफ से दिया जाएगा, इसके बारे में तो विभाग के अधिकारी भी नहीं बता पा रहे हैं। दोनों अस्पतालों में आईसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। चिकित्सकों की टीम भी बना दी
गई हैं। इसके अलावा स्वाइन फ्लू के बचाव के लिए दवाइयां भी विभाग ने मंगवाई हुई हैं। ताकि मरीज का इलाज किया जा सके। अगर मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी तो उसे रोहतक पीजीआई का रास्ता ही दिखाया जा सकता है। हांलाकि जिला में स्वाइन फ्लू से कोई मौत नहीं हुई है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण व बचाव
फिजिशियन विभाग के एमडी डॉ. संजीव हसीजा ने कहा कि नाक का लगातार बहना, छींक आना, कफ, कोल्ड और लगातार खांसी आना, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न, सिर में जोरदार दर्द होना, नींद न आना, ज्यादा थकान, दवाई खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना और गले में खराश का लगातार बढ़ते रहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से इलाज करवाएं। स्वाइन फ्लू से बचाव इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाए भी किए जा सकते हैं। मरीज को आराम करना चाहिए, खूब पानी पीना चाहिए, शरीर में पानी की कमी न होने दें। उनका कहना है कि शुरुआत में पैरासीटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन लू के इलाज के लिए दी जाती हैं।
जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के 10 मरीज मिल चुके हैं। नौ मरीजों की हालत ठीक है और एक मरीज दिल्ली आरएमएल में भर्ती है। झज्जर और बहादुरगढ़ में आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। झज्जर और बहादुरगढ़ में वेंटिलेंटर की सुविधा नहीं है। मरीज को रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। निजी अस्पताल से वेंटिलेटर
की सुविधा के लिए सहयोग लिया जाएगा।
डॉ. कुलदीप सिंह, डीएमओ, झज्जर।
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झज्जर। जिले में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। 10 जनवरी के बाद से अब तक 33 स्वाइन फ्लू के संभावित मरीजों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से विभाग के आंकड़ों के अनुसार स्वाइन फ्लू के दस मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। इन में से नौ मरीजों की हालत ठीक हो चुकी है। जबकि बहादुरगढ़ का एक मरीज दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती है। अब तक जिले के बहादुरगढ़ में तीन, झज्जर में दो, बराही, मदाना कलां, डावला, जाखौदा में एक-एक मरीज स्वाइन फ्लू का मिल चुका है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में मिले स्वाइन फ्लू के मरीजों के अन्य परिजनों को भी बचाव के लिए दवाइयां भी खिलाई गई हैं। ताकि मरीज से परिवार के दूसरे मरीजों में स्वाइन फलू का वायरस न फैले।
वेंटिलेटर की नहीं सुविधा :
जिले में स्वाइन फ्लू के 10 मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। मरीज को प्राथमिक तौर पर तो झज्जर व बहादुरगढ़ के अस्पतालों में मरीज को उपचार मिल जाएगा और अगर मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी तो वह जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीज को नहीं मिलेगी। ऐसी स्थिति में मरीज को रोहतक
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पीजीआई में रेफर किया जाएगा या फिर किसी निजी अस्पताल से संपर्क किया जाएगा। हालांकि फिलहाल तक विभाग की तरफ से इस सुविधा के लिए किसी निजी अस्पताल से अनुबंध तक नहीं किया गया है। विभाग
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के अधिकारी केवल यह बात ही कह रहे हैं कि निजी अस्पताल से वेंटिलेटर के लिए सहयोग लिया जा सकता है। उसका खर्च मरीज वहन करेगा या फिर विभाग की तरफ से दिया जाएगा, इसके बारे में तो विभाग के अधिकारी भी नहीं बता पा रहे हैं। दोनों अस्पतालों में आईसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। चिकित्सकों की टीम भी बना दी
गई हैं। इसके अलावा स्वाइन फ्लू के बचाव के लिए दवाइयां भी विभाग ने मंगवाई हुई हैं। ताकि मरीज का इलाज किया जा सके। अगर मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी तो उसे रोहतक पीजीआई का रास्ता ही दिखाया जा सकता है। हांलाकि जिला में स्वाइन फ्लू से कोई मौत नहीं हुई है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण व बचाव
फिजिशियन विभाग के एमडी डॉ. संजीव हसीजा ने कहा कि नाक का लगातार बहना, छींक आना, कफ, कोल्ड और लगातार खांसी आना, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न, सिर में जोरदार दर्द होना, नींद न आना, ज्यादा थकान, दवाई खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना और गले में खराश का लगातार बढ़ते रहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से इलाज करवाएं। स्वाइन फ्लू से बचाव इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाए भी किए जा सकते हैं। मरीज को आराम करना चाहिए, खूब पानी पीना चाहिए, शरीर में पानी की कमी न होने दें। उनका कहना है कि शुरुआत में पैरासीटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन लू के इलाज के लिए दी जाती हैं।
जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के 10 मरीज मिल चुके हैं। नौ मरीजों की हालत ठीक है और एक मरीज दिल्ली आरएमएल में भर्ती है। झज्जर और बहादुरगढ़ में आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। झज्जर और बहादुरगढ़ में वेंटिलेंटर की सुविधा नहीं है। मरीज को रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। निजी अस्पताल से वेंटिलेटर
की सुविधा के लिए सहयोग लिया जाएगा।
डॉ. कुलदीप सिंह, डीएमओ, झज्जर।