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मछली पालन की ओर किसानों का बढ़ा रुझान
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
परंपरागत खेती से अब किसानों का मोहभंग होने लगा है। आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए किसान अब नवीनतम तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर रहे हैं। जिसका परिणाम है कि झज्जर के किसान अब मछली पालन की ओर डायवर्ट हो रहे हैं। विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि तीन साल पहले जिले में जहां केवल सात एकड़ में मछली पालन होता था। वहीं अब 150 एकड़ जमीन पर झींगा मछली पालन शुरू हो गया है। मत्सय पालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो ढाई एकड़ जमीन पर हर वर्ष किसान करीब दस लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। जिसके चलते दूसरे किसान भी मछली पालन की ओर आकर्षित होने लगे हैं। खास बात यह है कि दिल्ली एनसीआर में होनेे के कारण यहां के किसानों के लिए मार्केट की भी समस्या नहीं है।
विभाग दे रहा 50 फीसदी सब्सिडी
मत्स्य विभाग के ओर से प्रति हेक्टेयर साढे़ 12 लाख रुपये की सब्सिडी किसानों को दी जा रही है। एक हेक्टेयर में किसान को व्यवसाय शुरू करने के लिए करीब 25 लाख रुपये का खर्च करना होता है। जिसका पचास फीसदी अनुदान विभाग की ओर से दिया जाता है। सितंबर मास तक लगभग 37 लाख 66 हजार 681 रुपये का अनुदान दिया गया है। मीठे पानी वाले क्षेत्र में तालाब खुदाई के लिए विभाग की ओर से 60 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है।
456 तालाबों में हो रहा उत्पादन
गांवों के 456 तालाबों की 824 हेक्टेयर जमीन पर विभाग के द्वारा युवाओं को पट्टे पर जमीन दिलवाकर मछली पालन करवाया जा रहा है। जिससे 248 युवाओं को स्वरोजगार तो मिला ही है। साथ में पंचायतों के लिए भी तालाब आय का केंद्र बने हैं। सितंबर माह तक विभाग के आंकड़ों के अनुसार 8586 टन मत्स्य उत्पादन हुआ है। मछली पालन के लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रशिक्षण मुहैया कराने के साथ-साथ बैंकों से सस्ती दरों पर ऋण व अनुदान सुविधा भी सहजता से उपलब्ध कराई जा रही है।
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तलाव में बनेगी फिश हैचरी
मत्स्य पालन विभाग की ओर से तलाव गांव में ऑर्नामेंटल फिश हैचरी बनाई जाएगी। जिस पर करीब 13 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ इस प्रोजेक्ट को लेकर इजरायल दौरे के दौरान भी तकनीक समझ कर आए हैं। विभाग की इस हैचरी में रंगीन मछलियां भी पाली जाएंगी। वहीं किसानों को मछली पालन से जोड़ने के लिए यहां पर जागरूकता कार्यक्रम व कोर्स करवाए जाएंगे।
वर्जन
विभाग की ओर से किसानों को मत्स्य पालन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। मछली पालन के फायदे समझकर किसान इसे खेती के तौर पर अपनाने के लिए आगे आने लगे हैं। किसानों के सहयोग के लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। पिछले छह माह में जिले में 8586 टन मत्स्य का उत्पादन हुआ है।
- श्रीपाल राठी, सीईओ, मत्स्य पालन विभाग।
- 456 पंचायती तालाबों के अलावा 150 एकड़ जमीन पर शुुरू हुआ मछली पालन
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झज्जर।
परंपरागत खेती से अब किसानों का मोहभंग होने लगा है। आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए किसान अब नवीनतम तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर रहे हैं। जिसका परिणाम है कि झज्जर के किसान अब मछली पालन की ओर डायवर्ट हो रहे हैं। विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि तीन साल पहले जिले में जहां केवल सात एकड़ में मछली पालन होता था। वहीं अब 150 एकड़ जमीन पर झींगा मछली पालन शुरू हो गया है। मत्सय पालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो ढाई एकड़ जमीन पर हर वर्ष किसान करीब दस लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। जिसके चलते दूसरे किसान भी मछली पालन की ओर आकर्षित होने लगे हैं। खास बात यह है कि दिल्ली एनसीआर में होनेे के कारण यहां के किसानों के लिए मार्केट की भी समस्या नहीं है।
विभाग दे रहा 50 फीसदी सब्सिडी
मत्स्य विभाग के ओर से प्रति हेक्टेयर साढे़ 12 लाख रुपये की सब्सिडी किसानों को दी जा रही है। एक हेक्टेयर में किसान को व्यवसाय शुरू करने के लिए करीब 25 लाख रुपये का खर्च करना होता है। जिसका पचास फीसदी अनुदान विभाग की ओर से दिया जाता है। सितंबर मास तक लगभग 37 लाख 66 हजार 681 रुपये का अनुदान दिया गया है। मीठे पानी वाले क्षेत्र में तालाब खुदाई के लिए विभाग की ओर से 60 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है।
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456 तालाबों में हो रहा उत्पादन
गांवों के 456 तालाबों की 824 हेक्टेयर जमीन पर विभाग के द्वारा युवाओं को पट्टे पर जमीन दिलवाकर मछली पालन करवाया जा रहा है। जिससे 248 युवाओं को स्वरोजगार तो मिला ही है। साथ में पंचायतों के लिए भी तालाब आय का केंद्र बने हैं। सितंबर माह तक विभाग के आंकड़ों के अनुसार 8586 टन मत्स्य उत्पादन हुआ है। मछली पालन के लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रशिक्षण मुहैया कराने के साथ-साथ बैंकों से सस्ती दरों पर ऋण व अनुदान सुविधा भी सहजता से उपलब्ध कराई जा रही है।
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तलाव में बनेगी फिश हैचरी
मत्स्य पालन विभाग की ओर से तलाव गांव में ऑर्नामेंटल फिश हैचरी बनाई जाएगी। जिस पर करीब 13 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ इस प्रोजेक्ट को लेकर इजरायल दौरे के दौरान भी तकनीक समझ कर आए हैं। विभाग की इस हैचरी में रंगीन मछलियां भी पाली जाएंगी। वहीं किसानों को मछली पालन से जोड़ने के लिए यहां पर जागरूकता कार्यक्रम व कोर्स करवाए जाएंगे।
वर्जन
विभाग की ओर से किसानों को मत्स्य पालन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। मछली पालन के फायदे समझकर किसान इसे खेती के तौर पर अपनाने के लिए आगे आने लगे हैं। किसानों के सहयोग के लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। पिछले छह माह में जिले में 8586 टन मत्स्य का उत्पादन हुआ है।
- श्रीपाल राठी, सीईओ, मत्स्य पालन विभाग।
- 456 पंचायती तालाबों के अलावा 150 एकड़ जमीन पर शुुरू हुआ मछली पालन