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नोटबंदी की भरपाई आज तक नहीं कर पा रहे दुकानदार व व्यापारी
Updated Thu, 09 Nov 2017 02:15 AM IST
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अब तक नहीं हुई नोटबंदी से नुकसान की भरपाई
चरखी दादरी।
देश में एक साल पहले हुई नोटबंदी का नुकसान दुकानदार अब तक झेल रहे हैं। नोटबंदी के कारण छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट हो गया । वहीं बड़े व्यापारी अब तक नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए हैं। लोगों का मानना है कि नोटबंदी से देश आर्थिक रूप से पिछड़ गया है। दुकानदार और व्यापारियों का कहना है नोटबंदी से हुए नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हो पाई है।
नोटबंदी के कारण दुकानदारों को कई माह तक आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ा था। आम लोगों का रोजगार तक छीन गया था। त्योहारी सीजन व वेडिंग सीजन पर भी नोटबंदी की मार के कारण व्यापारियों का कारोबार चौपट बना रहा। नोटबंदी के कारण लोगों को कई माह तक लाइन में लगना पड़ा था। बुजुर्ग वर्ग के लिए पेंशन पर भी रोक लग गई थी। लोगों के अनुसार नोटबंदी से न तो भ्रष्टाचार कम हुआ न ही फर्जी नोटों पर रोक लगी। सरकार की कैशलेस प्लानिंग भी सही प्रकार से नहीं चल पाई। विभागों में अब तक कैशलेस की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हुई है। कैशलेस के प्रति लोगों में जागरूकता कतई नहीं है। लोग नकदी लेनदेन में रूचि ले रहे हैं।
बातचीत--
1--- दुकानदार वर्ग नोटबंदी के कारण अब तक आर्थिक नुकसान उठा रहा है। एक साल पहले हुई नोटबंदी से अब तक देश की आर्थिक व्यवस्था पर कोई अनुकूल असर नहीं पड़ा है। सरकार की प्लानिंग के तहत काला धन को बाहर लाना था लेकिन अब तक काले धन पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नोटबंदी के दौर में सारा कारोबार चौपट हो- गया था। सरकार के गलत फैसले से सभी दुकानदार परेशान हैं। सरकार ने फर्नीचर पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाकर उनके कामधंधे को चौपट कर रखा है। फर्नीचर पर जीएसटी कम से कम रेंज में लगना चाहिए।
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राजेंद्र, फर्नीचर दुकानदार
2---नोटबंदी के कारण दुकानदारों को दुकानदारी छोड़ कर लाइन में लगना पड़ा था। नोटबंदी के कारण प्रत्येक दुकानदार कई साल पीछे चला गया । लोगों के पास नए नोट न आने के कारण खरीददारी पर रोक लग गई थी। कारोबार एक दम से ठप हो गया था। सरकार ने काला धन लाने की बात कही थी लेकिन अब तक काले धन पर कोई खबर नहीं आई है। भ्रष्टाचार पर भी अंकुश नहीं लग सका। जीएसटी की वजह से कारोबार और भी चौपट हो गया। अब कामधंधे पूरी तरह से चौपट हो गए हैं।
जितेंद्र, मोबाइल दुकानदार
3---नोटबंदी के दौर से अब तक दुकानदार नहीं उभरे है। नोटबंदी के दौरे में घर चलाना भी मुश्किल हो गया था। काले धन को वापिस लाने के लिए नोटबंदी की थी लेकिन अब तक कोई काला धन नहीं आया है। सरकार भ्रष्टाचार पर भी कोई रोक नहीं लगा पाई। नोटबंदी का नुकसान दुकानदार अब तक झेल रहे हैं। नोटबंदी के दौरान हुए आर्थिक नुकसान से दुकानदार अब तक परेशान हैं। अब जीएसटी से दुकानदार परेशान हैं। जीएसटी दरों में संशोधन की जरूरत है।
गोबिंद, कॅास्मेटिक दुकानदार
4---नोटबंदी को एक साल बीत गया लेकिन कारोबार अब तक प्रभावित है। लोगों को नोटबंदी के कारण कोई फायदा नहीं हुआ है। नोटंबदी के कारण लोगों को चार-पांच माह तक करेंसी नहीं मिली जिसके कारण सारा धंधा प्रभावित हो गया था। सरकार के गलत फैसले का भुगतान हर वर्ग का दुकानदार अब तक झेल रहा है। नोटबंदी कुछ दिन बाद ही नए फर्जी नोट भी बाजार में काफी चलन में आ गए थे। नोटबंदी से स्वर्णकारों पर ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ा। सोने की मांग कम हो गई।
लीलाराम, स्वर्णकार दुुकानदार
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चरखी दादरी।
देश में एक साल पहले हुई नोटबंदी का नुकसान दुकानदार अब तक झेल रहे हैं। नोटबंदी के कारण छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट हो गया । वहीं बड़े व्यापारी अब तक नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए हैं। लोगों का मानना है कि नोटबंदी से देश आर्थिक रूप से पिछड़ गया है। दुकानदार और व्यापारियों का कहना है नोटबंदी से हुए नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हो पाई है।
नोटबंदी के कारण दुकानदारों को कई माह तक आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ा था। आम लोगों का रोजगार तक छीन गया था। त्योहारी सीजन व वेडिंग सीजन पर भी नोटबंदी की मार के कारण व्यापारियों का कारोबार चौपट बना रहा। नोटबंदी के कारण लोगों को कई माह तक लाइन में लगना पड़ा था। बुजुर्ग वर्ग के लिए पेंशन पर भी रोक लग गई थी। लोगों के अनुसार नोटबंदी से न तो भ्रष्टाचार कम हुआ न ही फर्जी नोटों पर रोक लगी। सरकार की कैशलेस प्लानिंग भी सही प्रकार से नहीं चल पाई। विभागों में अब तक कैशलेस की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हुई है। कैशलेस के प्रति लोगों में जागरूकता कतई नहीं है। लोग नकदी लेनदेन में रूचि ले रहे हैं।
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बातचीत--
1--- दुकानदार वर्ग नोटबंदी के कारण अब तक आर्थिक नुकसान उठा रहा है। एक साल पहले हुई नोटबंदी से अब तक देश की आर्थिक व्यवस्था पर कोई अनुकूल असर नहीं पड़ा है। सरकार की प्लानिंग के तहत काला धन को बाहर लाना था लेकिन अब तक काले धन पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नोटबंदी के दौर में सारा कारोबार चौपट हो- गया था। सरकार के गलत फैसले से सभी दुकानदार परेशान हैं। सरकार ने फर्नीचर पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाकर उनके कामधंधे को चौपट कर रखा है। फर्नीचर पर जीएसटी कम से कम रेंज में लगना चाहिए।
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राजेंद्र, फर्नीचर दुकानदार
2---नोटबंदी के कारण दुकानदारों को दुकानदारी छोड़ कर लाइन में लगना पड़ा था। नोटबंदी के कारण प्रत्येक दुकानदार कई साल पीछे चला गया । लोगों के पास नए नोट न आने के कारण खरीददारी पर रोक लग गई थी। कारोबार एक दम से ठप हो गया था। सरकार ने काला धन लाने की बात कही थी लेकिन अब तक काले धन पर कोई खबर नहीं आई है। भ्रष्टाचार पर भी अंकुश नहीं लग सका। जीएसटी की वजह से कारोबार और भी चौपट हो गया। अब कामधंधे पूरी तरह से चौपट हो गए हैं।
जितेंद्र, मोबाइल दुकानदार
3---नोटबंदी के दौर से अब तक दुकानदार नहीं उभरे है। नोटबंदी के दौरे में घर चलाना भी मुश्किल हो गया था। काले धन को वापिस लाने के लिए नोटबंदी की थी लेकिन अब तक कोई काला धन नहीं आया है। सरकार भ्रष्टाचार पर भी कोई रोक नहीं लगा पाई। नोटबंदी का नुकसान दुकानदार अब तक झेल रहे हैं। नोटबंदी के दौरान हुए आर्थिक नुकसान से दुकानदार अब तक परेशान हैं। अब जीएसटी से दुकानदार परेशान हैं। जीएसटी दरों में संशोधन की जरूरत है।
गोबिंद, कॅास्मेटिक दुकानदार
4---नोटबंदी को एक साल बीत गया लेकिन कारोबार अब तक प्रभावित है। लोगों को नोटबंदी के कारण कोई फायदा नहीं हुआ है। नोटंबदी के कारण लोगों को चार-पांच माह तक करेंसी नहीं मिली जिसके कारण सारा धंधा प्रभावित हो गया था। सरकार के गलत फैसले का भुगतान हर वर्ग का दुकानदार अब तक झेल रहा है। नोटबंदी कुछ दिन बाद ही नए फर्जी नोट भी बाजार में काफी चलन में आ गए थे। नोटबंदी से स्वर्णकारों पर ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ा। सोने की मांग कम हो गई।
लीलाराम, स्वर्णकार दुुकानदार