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Jhajjar-Bahadurgarh News: सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम और सोलर इन्वर्टर चार्जर से बचाई 58 मेगावाट बिजली

Fri, 22 Mar 2024 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Fri, 22 Mar 2024 12:22 AM IST
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58 MW electricity saved through solar water pumping system and solar inverter charger
झज्जर। प्राकृतिक ऊर्जा के जरिए प्रतिदिन सैकड़ों यूनिट बिजली बचाकर उसका दूसरी जगह प्रयोग हो सकता है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से पिछले कुछ समय में जिले में लगाए गए प्रोजेक्ट के जरिये न केवल बिजली बचाई गई, बल्कि कार्बन डाइक्साइड का वातावरण में उत्सर्जन कम हुआ है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अनुसार सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम के जरिये बिजली बचाई जा सकती है। सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम और सोलर इन्वर्टर चार्जर से 58 मेगावाट बिजली बचाई है।
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जिले में फिलहाल 4577 पंपिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इससे अब तक 23.27 मेगावाट बिजली की बचत हुई है। इससे पहले किसान सिंचाई के लिए डीजल के जरिये सिंचाई करते थे। प्रति एकड़ एक बार पानी देने में 900 रुपये का किसान का खर्चा आता था। एक सीजन में एक फसल में चार बार पानी देना पड़ता था। इससे किसान का खर्च लगभग 3500 रुपये आता था, लेकिन सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम के जरिये सिंचाई करने पर यह खर्चा नाममात्र का हुआ बल्कि बिजली भी बचाई गई। यही नहीं डीजल जलने से कार्बन डाइक्साइड पैदा होती है। अब सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम के जरिये सिंचाई होने से 28.3 टन सीओ2 कम हुआ है।
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सोलर इन्वर्टर चार्जर प्रतिदिन बचाता है तीन यूनिट बिजली
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अनुसार जिले में 4800 सिस्टम लगाए जा चुके हैं। यह 600 वाट का इन्वर्टर चार्जर होता है। इससे एक दिन में तीन यूनिट बिजली की बचत होती है। अब तक 28 मेगावाट यूनिट बिजली की बचत कर उसका दूसरी जगह प्रयोग किया जा चुका है।
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कन्या स्कूल में लगाए एलईडी बल्ब और वीएलडीसी फेन
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की तरफ से जिले के सभी कन्या स्कूलों में एलईडी बल्ब और वीएलडीसी फेन लगाए हैं। यह बहुत कम मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। हाल ही में 20 पंचायतों को भी 9 वॉट के 3120 एलईडी बल्ब दिए गए हैं। यह भी गांवों में सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं।


केवल दो सरकारी बिल्डिंगों पर लगे सोलर प्रोजेक्ट
सरकार द्वारा 500 वर्ग गज वाली जगहों पर सोलर प्रोजेक्ट का प्लान किया था, लेकिन अब तक लघु सचिवालय और कोर्ट कांप्लेक्स में ही लगे हैं।
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