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बंद पड़े ईंट भट्ठे चालू न होने से पलायन कर रहे मजदूर

Sat, 18 Nov 2017 01:42 AM IST
Updated Sat, 18 Nov 2017 01:42 AM IST
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बंद पड़े ईंट भट्ठे चालू न होने से पलायन कर रहे मजदूर
अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
जिले में ईंट भट्ठों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। पहले तो जिग जैग तकनीक न होने से भट्ठे बंद पड़े थे। अब एनजीटी द्वारा एनसीआर में ईंट भट्ठों पर रोक लगाने के कारण भट्ठे शुरू नहीं हो पा रहे हैं। जिले के ईंट भट्ठे पूरी तरह से बंद हैं। कुछेक भट्ठे तो ऐसे हैं जो साल भर से बंद पड़े हैं। ऐसे में जहां भट्ठा संचालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है तो वहीं भट्ठों के मजदूरों ने भी पलायन शुरू कर दिया है। फिलहाल ईंटों की ट्रैक्टर-ट्रालियों के माध्यम से आपूर्ति करने वाले मजदूर रुके हुए हैं परंतु अब उनकी रोजी-रोटी पर भी संकट मंडराने लगा है।

तेजी से बढ़ रहे हैं ईंटों के दाम
ईंट भट्ठे न चलने के कारण ईंटों के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कम पकी हुई ईंट से लकेर अव्वल दर्जे तक ईंटों के दामों में भी उछाल आया है। पिछले माह के दामों को देखा जाए तो इस महीने दाम कहीं अधिक बढ़ गए हैं। इससे निर्माण कार्य कराने वाले लोगों को भी काफी अधिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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ऐसे होता है जिग-जैग भट्ठे में काम
जिले में लगभग 325 भट्ठे हैं। बहुत से ईंट भट्ठे लोगों ने किसानों से जमीन किराये पर लेकर बनाए हैं। भट्ठों को लगाने पर ही उनका लाखों रुपया खर्च हो चुका है। दरअसल, अक्तूबर में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली एनसीआर में बिना जिग-जैग इंडयुक्ड ड्राफ्ट्स तकनीक और बिना लाइसेंस के ईंट भट्ठे चलाने पर रोक लगा दी थी। जिग-जैग तकनीक से बनाए जाने वाले ईंटों के भट्ठे वर्तमान भट्ठों से बिल्कुल विपरीत होते हैं। जिग-जैग तकनीक वाला ईंट भट्ठा चौरस होता है। जबकि पुरानी तकनीक वाला भट्ठा लंबा व गोलाकार होता है। पुरानी तकनीक वाला भट्ठा काला धुआं छोड़ता है जबकि जिग-जैग तकनीक वाला भट्ठा सफेद धुआं छोड़ता है। इस तकनीक को अपनाने के लिए ईंट भट्ठा संचालकों को काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। यदि इतना पैसा वह कहीं से लगा भी दें तो ईंट इतनी महंगी नहीं हो पाएंगी कि वे कमाई कर सकें।
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क्या कहते हैं मजदूर
- मजदूर राम लुहाया ने कहा कि भट्ठा बंद रहने से यहां काम करने वाले काफी मजदूर चले गए हैं। जब तक ईंटें भट्ठा पर बची हुई हैं, तब तक ही यहां काम है। बाद में हमें भी जाना पड़ेगा।
- मजदूर संजय का कहना है कि भट्ठे के कारण हमारी रोजी-रोटी चल रही थी। अब भट्ठा कई महीनों से बंद है। जो पुराना माल बचा है, उसके बिकने तक ही रोजगार है, इसके बाद पलायन करना पड़ेगा।

भट्ठे जल्द चालू करने का आदेश दे सरकार : सुरेंद्र
बहादुरगढ़-झज्जर मार्ग पर ईंट भट्ठा चलाने वाले सुरेंद्र कुमार का कहना है कि पिछले एक महीने से भट्ठे पूरी तरह बंद पड़े हैं। जब भी वे चलाने की सोचते हैं तो सरकार की ओर से कोई न कोई आदेश आ जाता है। अब एक महीने से बंद पड़े भट्ठे से उन्हें काफी नुकसान हो गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार जिग-जैग भट्ठों को चलाने की जल्द से जल्द अनुमति दें।


डीसी से मिलकर की भट्ठे चालू करवाने की मांग : विनोद
हरियाणा भट्ठा एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने जिला उपायुक्त और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर जल्द से जल्द ईंट भट्ठे चालू करवाने की मांग की है।

ईंटों के भाव प्रति हजार में
ईंटे एक माह पहले अब
पीली 1000 रुपये 1200 रुपये
लाल पेटी 2100 रुपये 2300 रुपये
अव्वल ईंट 3200 रुपये 3400-3500 रुपये
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