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जन स्वास्थ्य विभाग ने नहीं डालीं पेयल और सीवरे लाइनें, साढ़े तीन करोड़ की लागत से 104 गलियों के निर्माण पर लगा ब्रेक
Updated Tue, 20 Nov 2018 01:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। हेड ऑफिस से जनस्वास्थ्य विभाग को 80 लाख के प्रोजेक्ट पर स्वीकृति नहीं मिली है और इसके चलते शहरी विकास रुक गया है। इन 80 लाख से शहर के 21 वार्डों में पेयजल और सीवर की लाइनें डाली जानी हैं और इसके बाद ही नगर परिषद इन गलियों को पक्का करवाएगी। ऐसी शहर में फिलहाल 104 गलियां हैं जिन्हें नगर परिषद पक्का करवाना चाहती है लेकिन सीवर और पेयजल लाइन डलने के इंतजार में काम शुरू नहीं हो पा रहा। पिछले करीब छह माह से 80 लाख के प्रोजेक्ट को स्वीकृति नहीं मिलने से नगर परिषद का साढ़े तीन करोड़ का प्रोजेक्ट भी लटका हुआ है।
नप के आंकड़ों अनुसार शहर के 21 वार्डों में अब भी 125 से अधिक कच्ची गलियां हैं। इन गलियों में मकान तो बन चुके हैं लेकिन यहां सीवर और पेयजल लाइनों सहित पक्की सड़क की सुविधा से लोग वंचित हैं। ये गलियां वैध कालोनियों की हैं और इसके बावजूद लोग लंबे समय से इन्हें पक्का करने सहित सीवर और पेयजल लाइनें डालने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर का सर्वे कर इन गलियों में नई पेयजल और सीवर लाइनें डालने का प्लान तैयार किया था। नप चेयरमैन अनुसार करीब 80 लाख से इन गलियों में सीवर और पेयजल लाइनें डाली जानी हैं और यह काम होने के बाद ही नगर परिषद इन्हें पक्का कराएगी।
जनस्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो इस संबंध में एस्टिमेट व ड्राइंग तैयार कर हेड ऑफिस कई माह पहले भेजी जा चुकी हैं लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पा रहा। ऐसे में शहर में रहने के बावजूद इन गलियों के लोगों को गांव की तर्ज पर भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही। इन कच्ची गलियों में सीवर और पेयजल लाइनें डलने और इनके पक्का होने से करीब 3000 मकानों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा। नप अधिकारियों का कहना है कि वो इन गलियों को पक्का कराने के लिए तैयार हैं लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के यहां सीवर और पेयजल लाइनें डालने का इंतजार कर रहे हैं। अब इन्हें अगर पक्का करवाया जाता है तो सीवर व पेयजल लाइनें डालते समय फिर से उखाड़ा जाएगा और इससे रुपयों की बर्बादी होगी।
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आधा दर्जन रिमाइंडर भेज चुकी नगर परिषद
जनस्वास्थ्य विभाग को नगर परिषद बाकायदा इस संबंध में आधा दर्जन रिमाइंडर भेज चुकी है और अब तक जन स्वास्थ्य विभाग ने केवल आश्वासन ही दिए हैं। विभाग का कहना है कि जैसे ही उनके प्रोजेक्ट को हेड ऑफिस से स्वीकृति मिल जाएगी वो शहर के 21 वार्डों की गलियों में पेयजल और सीवर लाइनें डालने का काम शुरू करा देंगे।
नगर परिषद चेयरमैन ने बताया कि हाल ही में उनके जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात हुई है और मौखिक रूप से उन्हें स्वीकृति मिल चुकी है और बस लिखित स्वीकृति भी दो-तीन के अंदर मिलने की उम्मीद है।
किस वार्ड में कितनी गलियां होंगी पक्की
वार्ड एक में करीब 10 ऐसी कच्ची गलियां हैं जिन्हें नगर परिषद करीब 215 लाख से पक्का कराएगी। वार्ड चार में पांच गलियों को 25 लाख से पक्का कराया जाएगा। वार्ड 11 में चार कच्ची गलियों को 15 लाख से पक्का कराने की भी नप की योजना है। इनके अलावा वार्ड 17 की 10 गलियों को पक्का कराने पर 40 लाख, वार्ड 18 की 20 गलियों को पक्का कराने पर एक करोड़, वार्ड 19 में 10 गलियां पक्की कराने पर 50 लाख, वार्ड 20 में 12 गलियां पक्की कराने पर 60 लाख व वार्ड 21 में 15 गलियां पक्की कराने पर करीब 75 लाख रुपये लागत आने की संभावना है।
12 हजार की आबादी को होगा फायदा
ये कच्ची गलियां एप्रूव्ड कॉलोनियों की हैं। इनमें से अगर एक गली में घरों की संख्या 30 भी मानें तो करीब मकानों की संख्या तीन हजार पार हो जाती है। अब एक मकान में अगर लोगों की संख्या चार मानें तो इस लिहाज से मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोगों की संख्या 12 हजार से पार चली जाती है। नगर परिषद के आंकड़े अनुसार पूरे शहर में गलियों व सड़कों की संख्या 1262 है और इनमें अनअप्रूव्ड कॉलोनियां शामिल नहीं है।
लोग बोले: नाम शहर का सुविधाएं गांव वाली भी नहीं
पिछले कई सालों से हम इस वार्ड में रह रहे हैं। अब तक हमारी गली में न तो सीवर लाइन डली है और न ही पेयजल लाइन। नगर परिषद भी गली पक्की नहीं करवा रही। कच्ची गली और सीवरेज व पेयजल लाइनें न होने से लोग परेशान हैं।
अजय कुमार, वार्ड 21
- गली कच्ची पड़ी है और हमें तो यहां से गुजरने की आदत पड़ी हुई है लेकिन जब कोई मेहमान घर आता है तो उन्हें काफी परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। नगर परिषद को जल्द ही गली को पक्की कराना चाहिए ताकि लोगों की समस्याएं खत्म हों।
बूंदा देवी, घिकाड़ा रोड क्षेत्र
-हमारी गली में न तो सीवर लाइन डली है और न ही पेयजल लाइन। इसके अलावा गली भी कच्ची पड़ी है। बारिश के दिनों में तो यहां से गुजरना दूभर हो जाता है। शहर में रहने के बाद भी गांव जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
पिंकी देवी, सैनिक कैंटीन क्षेत्र
-एक साल पहले वार्ड की कुछ गली बनी तो उनकी गली भी पक्की होने की उम्मीद जगी थी। इसके बाद से ही इंतजार कर रहे हैं कि कब गली पक्की हो। रात के समय यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है और खासकर बुजुर्गों को दिक्कतें होती हैं।
मीनू देवी, वार्ड 21
वर्जन::
हम जनस्वास्थ्य विभाग को रिमाइंडर डाल चुके हैं लेकिन उन्हें 80 लाख के प्रोजेक्ट पर लिखित स्वीकृति नहीं मिली है। जैसे ही विभाग यहां पेयजल और सीवर लाइनें डालेगा हम गली पक्की कराने का काम शुरू करवा देंगे।
-संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद
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चरखी दादरी। हेड ऑफिस से जनस्वास्थ्य विभाग को 80 लाख के प्रोजेक्ट पर स्वीकृति नहीं मिली है और इसके चलते शहरी विकास रुक गया है। इन 80 लाख से शहर के 21 वार्डों में पेयजल और सीवर की लाइनें डाली जानी हैं और इसके बाद ही नगर परिषद इन गलियों को पक्का करवाएगी। ऐसी शहर में फिलहाल 104 गलियां हैं जिन्हें नगर परिषद पक्का करवाना चाहती है लेकिन सीवर और पेयजल लाइन डलने के इंतजार में काम शुरू नहीं हो पा रहा। पिछले करीब छह माह से 80 लाख के प्रोजेक्ट को स्वीकृति नहीं मिलने से नगर परिषद का साढ़े तीन करोड़ का प्रोजेक्ट भी लटका हुआ है।
नप के आंकड़ों अनुसार शहर के 21 वार्डों में अब भी 125 से अधिक कच्ची गलियां हैं। इन गलियों में मकान तो बन चुके हैं लेकिन यहां सीवर और पेयजल लाइनों सहित पक्की सड़क की सुविधा से लोग वंचित हैं। ये गलियां वैध कालोनियों की हैं और इसके बावजूद लोग लंबे समय से इन्हें पक्का करने सहित सीवर और पेयजल लाइनें डालने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर का सर्वे कर इन गलियों में नई पेयजल और सीवर लाइनें डालने का प्लान तैयार किया था। नप चेयरमैन अनुसार करीब 80 लाख से इन गलियों में सीवर और पेयजल लाइनें डाली जानी हैं और यह काम होने के बाद ही नगर परिषद इन्हें पक्का कराएगी।
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जनस्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो इस संबंध में एस्टिमेट व ड्राइंग तैयार कर हेड ऑफिस कई माह पहले भेजी जा चुकी हैं लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पा रहा। ऐसे में शहर में रहने के बावजूद इन गलियों के लोगों को गांव की तर्ज पर भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही। इन कच्ची गलियों में सीवर और पेयजल लाइनें डलने और इनके पक्का होने से करीब 3000 मकानों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा। नप अधिकारियों का कहना है कि वो इन गलियों को पक्का कराने के लिए तैयार हैं लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के यहां सीवर और पेयजल लाइनें डालने का इंतजार कर रहे हैं। अब इन्हें अगर पक्का करवाया जाता है तो सीवर व पेयजल लाइनें डालते समय फिर से उखाड़ा जाएगा और इससे रुपयों की बर्बादी होगी।
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आधा दर्जन रिमाइंडर भेज चुकी नगर परिषद
जनस्वास्थ्य विभाग को नगर परिषद बाकायदा इस संबंध में आधा दर्जन रिमाइंडर भेज चुकी है और अब तक जन स्वास्थ्य विभाग ने केवल आश्वासन ही दिए हैं। विभाग का कहना है कि जैसे ही उनके प्रोजेक्ट को हेड ऑफिस से स्वीकृति मिल जाएगी वो शहर के 21 वार्डों की गलियों में पेयजल और सीवर लाइनें डालने का काम शुरू करा देंगे।
नगर परिषद चेयरमैन ने बताया कि हाल ही में उनके जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात हुई है और मौखिक रूप से उन्हें स्वीकृति मिल चुकी है और बस लिखित स्वीकृति भी दो-तीन के अंदर मिलने की उम्मीद है।
किस वार्ड में कितनी गलियां होंगी पक्की
वार्ड एक में करीब 10 ऐसी कच्ची गलियां हैं जिन्हें नगर परिषद करीब 215 लाख से पक्का कराएगी। वार्ड चार में पांच गलियों को 25 लाख से पक्का कराया जाएगा। वार्ड 11 में चार कच्ची गलियों को 15 लाख से पक्का कराने की भी नप की योजना है। इनके अलावा वार्ड 17 की 10 गलियों को पक्का कराने पर 40 लाख, वार्ड 18 की 20 गलियों को पक्का कराने पर एक करोड़, वार्ड 19 में 10 गलियां पक्की कराने पर 50 लाख, वार्ड 20 में 12 गलियां पक्की कराने पर 60 लाख व वार्ड 21 में 15 गलियां पक्की कराने पर करीब 75 लाख रुपये लागत आने की संभावना है।
12 हजार की आबादी को होगा फायदा
ये कच्ची गलियां एप्रूव्ड कॉलोनियों की हैं। इनमें से अगर एक गली में घरों की संख्या 30 भी मानें तो करीब मकानों की संख्या तीन हजार पार हो जाती है। अब एक मकान में अगर लोगों की संख्या चार मानें तो इस लिहाज से मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोगों की संख्या 12 हजार से पार चली जाती है। नगर परिषद के आंकड़े अनुसार पूरे शहर में गलियों व सड़कों की संख्या 1262 है और इनमें अनअप्रूव्ड कॉलोनियां शामिल नहीं है।
लोग बोले: नाम शहर का सुविधाएं गांव वाली भी नहीं
पिछले कई सालों से हम इस वार्ड में रह रहे हैं। अब तक हमारी गली में न तो सीवर लाइन डली है और न ही पेयजल लाइन। नगर परिषद भी गली पक्की नहीं करवा रही। कच्ची गली और सीवरेज व पेयजल लाइनें न होने से लोग परेशान हैं।
अजय कुमार, वार्ड 21
- गली कच्ची पड़ी है और हमें तो यहां से गुजरने की आदत पड़ी हुई है लेकिन जब कोई मेहमान घर आता है तो उन्हें काफी परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। नगर परिषद को जल्द ही गली को पक्की कराना चाहिए ताकि लोगों की समस्याएं खत्म हों।
बूंदा देवी, घिकाड़ा रोड क्षेत्र
-हमारी गली में न तो सीवर लाइन डली है और न ही पेयजल लाइन। इसके अलावा गली भी कच्ची पड़ी है। बारिश के दिनों में तो यहां से गुजरना दूभर हो जाता है। शहर में रहने के बाद भी गांव जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
पिंकी देवी, सैनिक कैंटीन क्षेत्र
-एक साल पहले वार्ड की कुछ गली बनी तो उनकी गली भी पक्की होने की उम्मीद जगी थी। इसके बाद से ही इंतजार कर रहे हैं कि कब गली पक्की हो। रात के समय यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है और खासकर बुजुर्गों को दिक्कतें होती हैं।
मीनू देवी, वार्ड 21
वर्जन::
हम जनस्वास्थ्य विभाग को रिमाइंडर डाल चुके हैं लेकिन उन्हें 80 लाख के प्रोजेक्ट पर लिखित स्वीकृति नहीं मिली है। जैसे ही विभाग यहां पेयजल और सीवर लाइनें डालेगा हम गली पक्की कराने का काम शुरू करवा देंगे।
-संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद