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डायरेक्टर से लेकर चपरासी तक के पद खाली, सेवाएं चरमराई

Wed, 27 Dec 2017 12:42 AM IST
Updated Wed, 27 Dec 2017 12:42 AM IST
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डायरेक्टर से लेकर चपरासी तक के पद खाली, सेवाएं चरमराई
डायरेक्टर से लेकर चपरासी तक के पद खाली, सेवाएं चरमराई
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
पशु अस्पताल के अपग्रेड तो दूर यहां डिप्टी डायरेक्टर, चिकित्सक, वीएलडीए, एनिमल असिस्टेंट, क्लर्क व असिस्टेंट के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिले के पशु अस्पताल में 37 एनिमल असिस्टेंट के पद लंबे समय से रिक्त होने की वजह से चिकित्सकों को पशुओं का उपचार करने में कठिनाई आ रही है। एनिमल असिस्टेंट की मदद से ही पशु चिकित्सक पशुओं का उपचार करता है। पशुपालन विभाग कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर का पद भी खाली पड़ा है जिससे विभाग कार्यालय के प्रबंधन एवं व्यवस्था में बाधाएं आ रही हैं। इतना ही नहीं पांच पशु चिकित्सकों व आठ वीएलडीए के पद भी खाली पड़े हैं। जिले में कुल 2.66 लाख पशु हैं।
जिला बन जाने के बाद पशुओं के रोगों की जांच के लिए जिला लैब भी नहीं बनी है। पशु अस्पताल में सामान्य बीमारियों का ही उपचार संभव है। गंभीर मामला आने पर भिवानी या हिसार भेज दिया जाता है। लैब में रोग की जांच करवाने के लिए पशु पालक को अपना पशु भिवानी या हिसार ले जाना पड़ता है जिससे उसे काफी आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। जिला स्तर पर पॉलीक्लीनिक होता है लेकिन अब तक यह सुविधा भी यहां शुरू नहीं हो सकी है। पॉलीक्लीनिक में सभी प्रकार के पशुओं के आपरेशन किए जाने की सुविधा होती है। पशुओं की ज्यादा संख्या को देखते हुए चरखी दादरी में इसकी सख्त जरूरत बनी हुई है।
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जिले में 2.66 लाख है पशुधन
चरखी दादरी में इस समय गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, बछड़े व कटड़ों समेत दो लाख 66 हजार 418 पशु हैं। आजकल पशुओं में नित नए रोग फैल रहा है। पशु उपचार का दायरा न बढ़ने की वजह से पशुपालकों को समय- समय पर काफी दिक्क्तें झेलनी पड़ रही हैं। पशु की हानि से पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
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पशुपालन विभाग में ये पद हैं खाली
विभाग के मेन अधिकारी डिप्टी डायरेक्टर का पद भी इस समय खाली पड़ा है। नारनौल के डिप्टी डायरेक्टर को चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है। इसकी वजह से फाइलों के अलावा कार्यालय प्रबंधन व व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पशु पालन विभाग में पांच पशु चिकित्सकों व दो वीएलडीए के पद भी लंबे समय से खाली चले आ रहे हैं। पशु चिकित्सकों के कुल 28 पद स्वीकृत हैं। यह पद रिक्त होने की वजह से खासकर ग्रामीण क्षेत्र में पशु उपचार का काम ज्यादा बाधित हो रहा है। विभाग कार्यालय में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और क्लर्कों की भी कमी बनी हुई है। इससे कार्यालयी कामकाज काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। सुपरिंटेंडेंट की देखरेख में ही मिनिस्ट्रियल स्टाफ का कामकाज पूरा होता है। कार्यालय की रूटीन की कागजी कार्यवाही, ई-मेल व डाक का काम भी बाधित हो रहा है। कार्यालय में इस समय क्लर्क के चार पद खाली पड़े हैं। चपरासी के भी कई पद खाली हैं। पशुपालन विभाग में इस समय 37 पशु परिचरों (एनीमल असिस्टेंट) की कमी बनी हुई है। पशु परिचर के 84 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 37 पद रिक्त पड़े हैं। पशु चिकित्सक जब पशु का उपचार करता है तो यह पशु परिचर चिकित्सक की मदद करते हैं ताकि चोट आदि नहीं लगने पाए। पशु परिचरों की कमी की वजह से चिकित्सक भी पशुओं का उपचार करने में कतराते हैं।



कोट
विभाग में एनिमल असिस्टेंट की कमी होने से चिकित्सकों को उपचार करने में बाधा आ रही है। कार्यालय की तरफ से समय-समय पर रिक्त पदों की डिमांड भेजी जा रही है। चिकित्सक हर पशुपालक तक पहुंचकर पशुओं का उपचार करते हैं। पशु बीमार होने पर तत्काल संभाल की जा रही है। - डॉ. सतबीर, एसडीओ, पशुपालन विभाग
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