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बिना हेडमास्टर चल रहे जिले के 26 राजकीय स्कूल

Mon, 02 Oct 2017 12:31 AM IST
Updated Mon, 02 Oct 2017 12:31 AM IST
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बिना हेडमास्टर चल रहे जिले के 26 राजकीय स्कूल
बिना हेडमास्टर चल रहे जिले के 26 राजकीय स्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
राजकीय स्कूलों का आधा सत्र पूरा हो चुका है लेकिन आज भी 26 स्कूलों में हेडमास्टर की तैनाती नहीं है। नया शैक्षिक सत्र को छह माह का समय बीत चुका है लेकिन जिले के 26 सरकारी स्कूल बिना हेडमास्टर के ही चल रहे हैं। इतना ही नहीं सीनियर सेेकेंडरी स्कूलों में 35 लेक्चरर के पद भी लंबे समय खाली पड़े हैं। इसमें कक्षा नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। इन वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में जिले में प्राचार्य के भी 41 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। ऐसे में इन स्कूलों का प्रबंधन व रखरखाव भी ठीक प्रकार से नहीं हो पा रहा है। स्कूलों के अनुशासन पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। एसएमसी की मासिक बैठकें भी बाधित होती हैं।
जिले में इस समय शिक्षा का आधारभूत ढांचा पटरी पर नहीं है। इस समय तक दाखिला प्रक्रिया जारी रही है। इसके लिए स्कूल में हेडमास्टर और प्राचार्य का होना अति जरूरी होता है ताकि कागज प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए। स्कूल मुखिया ही स्कूल का प्रबंधन और रख-रखाव करते हैं। स्कूल का बढ़िया अनुशासन स्कूल मुखिया की दक्षता एवं योग्यता पर ही अधिक निर्भर करता है। ऐसे में हेडमास्टर और प्राचार्यो के बिना स्कूल की प्रगति संभव नहीं है। एसएलसी पर हस्ताक्षर और अन्य आवश्यक कागजात पर मुखिया के ही हस्ताक्षर होते हैं। स्कूल फंड का इस्तेमाल करना हो तो हेडमास्टर के बिना और मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। कई प्रकार के ऐसे दस्तावेज और फाइलें होती हैं जिनमें कार्यालय इंचार्ज के हस्ताक्षरों की वैधता नहीं होती ऐसे में स्कूल मुखिया की और भी जरूरत बन जाती है। पूरे स्कूल की कार्यशैली व शिक्षकों के कामकाज की समीक्षा आदि भी समय- समय करनी होती है। स्कूलों में गठित एसएमसी कमेटियों के संचालन व उनकी हर माह होने वाली मीटिंग को लेकर स्कूल मुखिया को ही पूरा प्रारूप तैयार करना होता है। अध्यापकों व बच्चों की रूटीन की समस्याओं व शिक्षण संबंधी दिक्कतों का निवारण करना व विभाग के नए निर्देशों व पॉलिसी की अनुपालना करना भी शामिल है।
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35 लेक्चरर की भी है कमी
वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में 35 लेक्चरर की भी कमी बनी हुई। इससे कक्षा नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। समय पर पाठ्यक्रम पूरा न होने को लेकर चिंता बनी रहती है। इसका बोर्ड परीक्षा परिणाम पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। कक्षा छठी सेे आठवीं तक पढ़ाने वाले मास्टर्स के भी 40 पद रिक्त पड़े हैं।
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जिले में करीब 365 राजकीय स्कूल हैं
जिले में करीब 365 राजकीय स्कूल हैं जिनमें प्राइमरी, मिडिल और हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। बौंद कलां ब्लॉक में 115 स्कूल हैं जिनमें 63 प्राइमरी स्कूल, 14 मिडल स्कूल व 38 हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। इस प्रकार दादरी ब्लॉक में करीब 120 प्राइमरी स्कूल के अलावा हाई, सीनियर व मिडिल स्कूल हैं। करीब 120 स्कूल बाढड़ा ब्लॉक में हैं। बौंद कलॉ ब्लाक में जेबीटी के 221 पद स्वीकृत हैं। इसी प्रकार मास्टर वर्ग के 360 और प्राध्यापक के करीब 210 पद स्वीकृत हैं।


वर्सन---
पद खाली होने पर स्कूली काम में किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आने दी जा रही है। स्कूलों में जरूरी प्रबंधन एवं अनुशासन पर विशेष ध्यान रहता है। विभाग जल्द ही इन रिक्त पदों पर तैनाती करेगा। - बीईओ, प्रकाश फौगाट
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