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अन्नदान सर्वोतम दान : सागर
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। सर्वोच्च गरीबदासीय छतरी साहिब छुड़ानी धाम में चल रहे फाल्गुन मेला पर्व पर आचार्य गद्दीनशीन श्रीमहंत दया सागर ने श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए कहा कि आज देश में विभिन्न प्रकार के अनाज उगाए जाते हैं और हम उन अनाजों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। महंत ने कहा कि मांसाहारी चीजों के सेवन का सभी साधु-संतों व बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है। खास तौर पर कबीर व कबीर से प्रेरित संत व भक्त तो मांस व अंडे के कट्टर विरोधी रहे हैं। इसलिए बंदी छोड़ गरीबदास ने अनाज को खाद्य पदार्थों का राजा बताया है और अनाज के समक्ष हीरे-मोती को भी तुच्छ बताया है। उन्होंने अन्न की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि अन्न के सेवन के कारण ही हमारी यह काया बढ़ती व पलती है। सृष्टि के शुरू से लेकर अंत तक अन्न का महत्व रहता है। हमारे जीवन में भी आदी से अंत तक अन्न बहुत महत्वपूर्ण है। अन्न सात्विक भोजन है और इसके सेवन से बुरी भावनाएं अपेक्षाकृत कम उठती हैं। सभी के लिए रोटी आवश्यक है। चाहे साधारण जीव हो, साधु-संत हो, अमीर-गरीब सभी के लिए आवश्यक है। जो रोटी का दान करता है उसकी महिमा का गुणगान नहीं किया जा सकता। रोटी के इस महत्व और महिमा के बाजे इस संसार में चारों ओर बज रहे है। सारे लोकों में अनाज की महिमा भरपूर है। महंत दया सागर की प्रेरणा से पानीपत के इसराना से डॉ. जगबीर पंवार ने मंदिर में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाया और मेले में आने वाले श्रद्धालुओं व साधु-संतों के स्वास्थ्य की जांच की और दवा भी वितरित की। जसौर खेड़ी से ओम भगत व छुड़ानी धाम रामेश्वरदास ने आए हुए सभी संतों का अभिनंदन किया। स्वामी गुरुदयाल शास्त्री पानीपत, स्वामी दर्शनदास रामपूर धाम से प्रवचन सुनाए। मेलाधिकारी दयाकिशन टांडाहेड़ी ने आवास व्यवस्था संभाली। जबकि रामकिशन करौंथा ने पुजारी के रूप में सेवा की।
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बहादुरगढ़। सर्वोच्च गरीबदासीय छतरी साहिब छुड़ानी धाम में चल रहे फाल्गुन मेला पर्व पर आचार्य गद्दीनशीन श्रीमहंत दया सागर ने श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए कहा कि आज देश में विभिन्न प्रकार के अनाज उगाए जाते हैं और हम उन अनाजों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। महंत ने कहा कि मांसाहारी चीजों के सेवन का सभी साधु-संतों व बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है। खास तौर पर कबीर व कबीर से प्रेरित संत व भक्त तो मांस व अंडे के कट्टर विरोधी रहे हैं। इसलिए बंदी छोड़ गरीबदास ने अनाज को खाद्य पदार्थों का राजा बताया है और अनाज के समक्ष हीरे-मोती को भी तुच्छ बताया है। उन्होंने अन्न की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि अन्न के सेवन के कारण ही हमारी यह काया बढ़ती व पलती है। सृष्टि के शुरू से लेकर अंत तक अन्न का महत्व रहता है। हमारे जीवन में भी आदी से अंत तक अन्न बहुत महत्वपूर्ण है। अन्न सात्विक भोजन है और इसके सेवन से बुरी भावनाएं अपेक्षाकृत कम उठती हैं। सभी के लिए रोटी आवश्यक है। चाहे साधारण जीव हो, साधु-संत हो, अमीर-गरीब सभी के लिए आवश्यक है। जो रोटी का दान करता है उसकी महिमा का गुणगान नहीं किया जा सकता। रोटी के इस महत्व और महिमा के बाजे इस संसार में चारों ओर बज रहे है। सारे लोकों में अनाज की महिमा भरपूर है। महंत दया सागर की प्रेरणा से पानीपत के इसराना से डॉ. जगबीर पंवार ने मंदिर में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाया और मेले में आने वाले श्रद्धालुओं व साधु-संतों के स्वास्थ्य की जांच की और दवा भी वितरित की। जसौर खेड़ी से ओम भगत व छुड़ानी धाम रामेश्वरदास ने आए हुए सभी संतों का अभिनंदन किया। स्वामी गुरुदयाल शास्त्री पानीपत, स्वामी दर्शनदास रामपूर धाम से प्रवचन सुनाए। मेलाधिकारी दयाकिशन टांडाहेड़ी ने आवास व्यवस्था संभाली। जबकि रामकिशन करौंथा ने पुजारी के रूप में सेवा की।