{"_id":"5c6da649bdec22738563efff","slug":"21550689865-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह मिनट झपकी नहीं आती तो सुरक्षित पहुंच जाते घर, दो चिता में हुआ चारों सदस्यों का अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह मिनट झपकी नहीं आती तो सुरक्षित पहुंच जाते घर, दो चिता में हुआ चारों सदस्यों का अंतिम संस्कार
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। चालक वीरेंद्र को अगर छह मिनट और नींद की झपकी नहीं आती तो पूरा परिवार सुरक्षित घर पहुंच जाता। हादसे की जगह से मृतक वीरेंद्र का घर मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर है। हादसे के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कार अचानक से ट्रक की तरफ गई। चालक ने ट्रक रोकने की कोशिश भी लेकिन ब्रेक लगने के बावजूद रोड़ियों से भरा ट्रक करीब 20 फुट तक कार को घसीटते हुए ले गया। टक्कर लगने के कारण कार की फ्रंट सीट तक का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। जानकारी के अनुसार कासनी गांव निवासी वीरेंद्र अपनी पत्नी सुशीला तथा बच्चों छुटकी व प्रियांशु के साथ तीन दिन पूर्व दिल्ली में अपनी भतीजी के शादी समारोह में शामिल होने के लिए गया था। बुधवार की सुबह शादी समारोह से वापस घर लौट रहा था तो उसकी कार का एक्सीडेंट रईया गांव के पास उस समय हो गया, जब दिल्ली में उसकी भतीजी की डोली उठ रही थी। इस हादसे में वीरेंद्र का पूरा परिवार खत्म हो गया तो उसका करीबी दोस्त सुनील भी हादसे का शिकार बन गया। शादी के घर में बेटी की विदाई के बाद मातम छा गया। जैसे ही इसकी खबर मिली तो परिवार के लोग तुरंत दिल्ली से झज्जर के लिए चल पड़े।
ट्रैक्टर से खींचकर निकाली कार
टक्कर लगने के बाद कार बुरी तरह से ट्रक के नीचे घुस गई थी। रईया गांव के ग्रामीणों ने ट्रैक्टर से खींचकर कार को ट्रक के नीचे से निकाला। इसके बाद पीछे की सीट पर बैठे सुशीला, छुटकी व प्रियांशु को बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं आगे का केबिन जेसीबी की सहायता से तोड़ा गया। इसके बाद कार से वीरेंद्र व सुनील के शव निकाले गए।
तीन एंबुलेंस में गांव पहुंचा शव
सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पांचों शवों को तीन एंबुलेंस में गांव ले जाया गया। जहां पर सुनील का शव गांव से पहले ही रोकना पड़ा क्योंकि उसके परिवार में मौसेरे भाई का इंतजार किया जा रहा था। इसके चलते सुनील का अंतिम संस्कार शाम पांच बजे उसके भाई के पहुंचने के बाद हुआ। वहीं मृतक वीरेंद्र के परिवार के चारों सदस्यों का अंतिम संस्कार शाम चार बजे दो चिताओं में किया गया।
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अंतिम संस्कार में शामिल हुए क्षेत्र के लोग
भीषण दुर्घटना का पता लगने पर आसपास के गांवों से भी लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे। अंतिम यात्रा में मंत्री ओपी धनखड़ के बेटे आदित्य धनखड़, यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान दीपक धनखड़, कुलदीप वत्स, नरेश हसनपुर, जिला परिषद के वाइस चेयरमैन योगेश सिलानी, विकास वाल्मीकि सहित अन्य शामिल रहे।
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झज्जर। चालक वीरेंद्र को अगर छह मिनट और नींद की झपकी नहीं आती तो पूरा परिवार सुरक्षित घर पहुंच जाता। हादसे की जगह से मृतक वीरेंद्र का घर मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर है। हादसे के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कार अचानक से ट्रक की तरफ गई। चालक ने ट्रक रोकने की कोशिश भी लेकिन ब्रेक लगने के बावजूद रोड़ियों से भरा ट्रक करीब 20 फुट तक कार को घसीटते हुए ले गया। टक्कर लगने के कारण कार की फ्रंट सीट तक का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। जानकारी के अनुसार कासनी गांव निवासी वीरेंद्र अपनी पत्नी सुशीला तथा बच्चों छुटकी व प्रियांशु के साथ तीन दिन पूर्व दिल्ली में अपनी भतीजी के शादी समारोह में शामिल होने के लिए गया था। बुधवार की सुबह शादी समारोह से वापस घर लौट रहा था तो उसकी कार का एक्सीडेंट रईया गांव के पास उस समय हो गया, जब दिल्ली में उसकी भतीजी की डोली उठ रही थी। इस हादसे में वीरेंद्र का पूरा परिवार खत्म हो गया तो उसका करीबी दोस्त सुनील भी हादसे का शिकार बन गया। शादी के घर में बेटी की विदाई के बाद मातम छा गया। जैसे ही इसकी खबर मिली तो परिवार के लोग तुरंत दिल्ली से झज्जर के लिए चल पड़े।
ट्रैक्टर से खींचकर निकाली कार
टक्कर लगने के बाद कार बुरी तरह से ट्रक के नीचे घुस गई थी। रईया गांव के ग्रामीणों ने ट्रैक्टर से खींचकर कार को ट्रक के नीचे से निकाला। इसके बाद पीछे की सीट पर बैठे सुशीला, छुटकी व प्रियांशु को बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं आगे का केबिन जेसीबी की सहायता से तोड़ा गया। इसके बाद कार से वीरेंद्र व सुनील के शव निकाले गए।
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तीन एंबुलेंस में गांव पहुंचा शव
सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पांचों शवों को तीन एंबुलेंस में गांव ले जाया गया। जहां पर सुनील का शव गांव से पहले ही रोकना पड़ा क्योंकि उसके परिवार में मौसेरे भाई का इंतजार किया जा रहा था। इसके चलते सुनील का अंतिम संस्कार शाम पांच बजे उसके भाई के पहुंचने के बाद हुआ। वहीं मृतक वीरेंद्र के परिवार के चारों सदस्यों का अंतिम संस्कार शाम चार बजे दो चिताओं में किया गया।
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अंतिम संस्कार में शामिल हुए क्षेत्र के लोग
भीषण दुर्घटना का पता लगने पर आसपास के गांवों से भी लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे। अंतिम यात्रा में मंत्री ओपी धनखड़ के बेटे आदित्य धनखड़, यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान दीपक धनखड़, कुलदीप वत्स, नरेश हसनपुर, जिला परिषद के वाइस चेयरमैन योगेश सिलानी, विकास वाल्मीकि सहित अन्य शामिल रहे।