{"_id":"5cc21c53bdec22142a722010","slug":"201556225107-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एल्बेंडाजोल की गोली खाने से तीन स्कूलों के 31 बच्चों की तबीयत बिगड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एल्बेंडाजोल की गोली खाने से तीन स्कूलों के 31 बच्चों की तबीयत बिगड़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहादुरगढ़। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर वीरवार को सरकारी और निजी स्कूलों में छह से 19 वर्ष तक के विद्यार्थियों को पेट के कीड़े मारने की दवा (एल्बेंडाजोल) खिलाई गई। एल्बेंडाजोल की गोली खाने से यहां के तीन स्कूलों के 31 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। सिर चकराने, पेट में दर्द होने और उल्टियां आने की एक के बाद एक बच्चों ने शिकायत की तो संबंधित स्कूलों के संचालक घबरा गए। आनन-फानन में बच्चों को नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। एक साथ 31 बच्चे भर्ती होने से अस्पताल में भी हड़कंप मच गया। कृमि मुक्ति दिवस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी सरकारी, गैर सरकारी व आंगनबाड़ी केंद्रों में एल्बेंडाजोल की गोलियां दी गई थी। स्कूलों में रिसेस के बाद छह वर्ष से ऊपर की आयु वाले बच्चों को दवाइयां खिलाई गई। तबेला स्कूल, लाइनपार स्थित नवयुग स्कूल और ग्रीन वैली स्कूल में करीब साढ़े 11 बजे बच्चों को दवा खिलाई गई थी। दवा लेने के कुछ देर बाद ही बच्चों में सिर चकराने, उल्टी और पेट में दर्द होने की शिकायतें होने लगी। एक के बाद एक इन तीनों स्कूलों में बच्चे बीमार होने लगे तो स्कूल संचालक व अध्यापकों में हड़कंप मच गया। इस संबंध में जब अभिभावकों को जानकारी मिली तो इन तीनों स्कूलों में अभिभावकों की भीड़ लग गई। इन तीनों विद्यालयों में 31 बच्चे बीमार हुए, सभी को नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर बच्चों का उपचार शुरू किया गया। बच्चों के स्वास्थ्य बिगड़ने की सूचना पर परिजन भी अस्पताल में पहुंच गए। करीब तीन बजे उपचार के बाद सभी बच्चों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
इन विद्यार्थियों की बिगड़ी तबीयत
एल्बेंडाजोल दवा के सेवन से राजकीय प्राथमिक पाठशाला तबेला की काजल, दिनेश, खुशी, राज कुमार, नितिशा, विकास, आदित्य व मधु की तबीयत बिगड़ गई। लाइनपार स्थित नवयुग स्कूल के श्रवण, यत्न, जाह्नवी, लक्ष्मी, डोली, इशा, अंजलि व कोमल बीमार हो गई। इनके अलावा ग्रीन वैली स्कूल के मनीष, गौरव, गौतम, बबली, सन्नी, खुशबू, सरिता, काजल, महिमा, अंजलि, मोहित, कशिश, अन्नु, त्रिवेश, ललितेश की भी हालत बिगड़ गई थी। एक निजी स्कूल की अध्यापिका ने बताया कि जब विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने एंबुलेंस के लिए कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। फिर एक ऑटो के जरिये विद्यार्थियों को अस्पताल तक ले जाया गया।
पेट के कीड़ों को नष्ट करती है दवा
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर यह दवा बच्चों को खिलाई जाती है। इस दवा से बच्चों के पेट के कीड़े मरते हैं। यह दवा परजीवी की सूक्ष्म-प्रोटीन पर वार करता है। शरीर को नुकसान पहुंचाएं बिना यह परजीवियों एवं कीड़ों को नष्ट कर देता है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य ठीक रहता है। कुछ खाने के बाद ही यह दवा ली जाती है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दवा से शरीर को कोई बड़ा नुकसान तो नहीं होता, लेकिन जी मिचलाना, उल्टी, सिरदर्द और पेट दर्द आदि की शिकायतें हो जाती है। दरअसल, जिन बच्चों के पेट में कीड़े होते हैं उन पर यह दवा सीधे अटैक करती है। ऐसी स्थिति में शरीर में हलचल हो जाती है। करीब दो घंटे बाद स्थिति सामान्य हो जाती है।
विज्ञापन
सभी बच्चे स्वस्थ हैं। उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे क्या कारण रहे, यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा।
डॉ. सुखविंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़।
विज्ञापन
इन विद्यार्थियों की बिगड़ी तबीयत
एल्बेंडाजोल दवा के सेवन से राजकीय प्राथमिक पाठशाला तबेला की काजल, दिनेश, खुशी, राज कुमार, नितिशा, विकास, आदित्य व मधु की तबीयत बिगड़ गई। लाइनपार स्थित नवयुग स्कूल के श्रवण, यत्न, जाह्नवी, लक्ष्मी, डोली, इशा, अंजलि व कोमल बीमार हो गई। इनके अलावा ग्रीन वैली स्कूल के मनीष, गौरव, गौतम, बबली, सन्नी, खुशबू, सरिता, काजल, महिमा, अंजलि, मोहित, कशिश, अन्नु, त्रिवेश, ललितेश की भी हालत बिगड़ गई थी। एक निजी स्कूल की अध्यापिका ने बताया कि जब विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने एंबुलेंस के लिए कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। फिर एक ऑटो के जरिये विद्यार्थियों को अस्पताल तक ले जाया गया।
विज्ञापन
पेट के कीड़ों को नष्ट करती है दवा
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर यह दवा बच्चों को खिलाई जाती है। इस दवा से बच्चों के पेट के कीड़े मरते हैं। यह दवा परजीवी की सूक्ष्म-प्रोटीन पर वार करता है। शरीर को नुकसान पहुंचाएं बिना यह परजीवियों एवं कीड़ों को नष्ट कर देता है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य ठीक रहता है। कुछ खाने के बाद ही यह दवा ली जाती है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दवा से शरीर को कोई बड़ा नुकसान तो नहीं होता, लेकिन जी मिचलाना, उल्टी, सिरदर्द और पेट दर्द आदि की शिकायतें हो जाती है। दरअसल, जिन बच्चों के पेट में कीड़े होते हैं उन पर यह दवा सीधे अटैक करती है। ऐसी स्थिति में शरीर में हलचल हो जाती है। करीब दो घंटे बाद स्थिति सामान्य हो जाती है।
विज्ञापन
सभी बच्चे स्वस्थ हैं। उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे क्या कारण रहे, यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा।
डॉ. सुखविंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़।