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डेलीगेट के तौर पर पहुंचे तहसीलदार, असंतृष्ट किसानों ने सक्षम अधिकारी को भेजने की मांग पर एक दिन टाला घेराव प्रदर्शन

Tue, 05 Mar 2019 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2019 12:24 AM IST
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डेलीगेट के तौर पर पहुंचे तहसीलदार, असंतृष्ट किसानों ने  सक्षम अधिकारी को भेजने की मांग पर एक दिन टाला घेराव प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। एनएच-152 में अधिग्रहीत जमीन का कलेक्टर रेट बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा किसानों का धरना सोमवार को सातवें दिन भी जा रहा। धरना शुरू होने के बाद पहली दफा डेलीगेट के तौर पर तहसीलदार कंवल सिंह बातचीत के लिए पहुंचे। उन्होंने किसानों की मांग उच्चाधिकारियों को सौंपने की बात कही। इससे किसान असंतुष्ट नजर आए। किसानों ने मांग है कि उन्हें आश्वासन देने के लिए मंगलवार तक कोई सक्षम अधिकारी (डीसी, एडीसी और डीआरओ) आएं। हालांकि किसानों ने जिला प्रशासन सरकार की बातचीत की पहल को देखते हुए लघु सचिवालय घेराव प्रदर्शन एक दिन टाल दिया है। अगर मंगलवार तक किसानों को आश्वासन नहीं मिला तो बुधवार सुबह लघु सचिवालय का घेराव किया जाएगा।
धरने की अध्यक्षता कर रहे विनोद मौड़ी ने बताया कि सोमवार को तहसीलदार कंवल सिंह मौके पर पहुंचे। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों की जानकारी दी तो उन्होंने इसे जिला उपायुक्त की मार्फत सरकार तक भेजने का आश्वासन दिया। इस पर किसानों ने असंतुष्टता जाहिर की। किसानों ने कहा कि तहसीलदार की बजाय डीसी, एडीसी या डीआरओ जैसे सक्षम अधिकारी मौके पर पहुंचे और उनको मांगों के प्रति आश्वस्त करें। उन्होंने कहा कि तहसीलदार का वे पूरा सम्मान करते हैं लेकिन इस मुद्दे पर कोई उच्चाधिकारी ही किसानों को आश्वासन देने आए। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल को देखते लघु सचिवालय घेराव प्रदर्शन 24 घंटे के लिए स्थगित कर दिया है। मंगलवार तक सक्षम अधिकारी किसानों के बीच नहीं पहुंचा तो फिर बुधवार को महिलाओं और पशुओं के साथ ग्रामीण घेराव कर प्रदर्शन करेंगे। 17 गांवों के किसानों के इस प्रदर्शन को 70 से अधिक गांवों का समर्थन मिल चुका है। इसके अलावा क्षेत्र की खापों सहित सामाजिक व किसान संगठनों का भी समर्थन मिल चुका है। वहीं, राजनैतिक पार्टियों के नेता भी किसानों की मांग को जायज ठहरा चुके हैं।
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वहीं, उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा कि देखने में आया है कि शांतिपूर्ण धरने का कुछ असामाजिक लोग फायदा उठा लेते हैं और बेकसूर लोगों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ साधने के लिए ग्रीन कॉरिडोर को लेकर लोगों को बहका रहे हैं। ऐसे लोग झूठा प्रचार कर अपना काम निकालना चाहते हैं। उपायुक्त ने अपील की है कि ऐसे स्वार्थी लोगों के बहकावे में न आएं और कानूनी प्रक्रिया अपनाकर अपनी जमीन का मुआवजा बढ़वाएं। उन्होंने कहा कि सभी लोग शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। जिला में कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो उसका नुकसान सबको है। कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले से प्रशासन सख्ती से निपटेगा।
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किसानों को दिया जाने वाला मुआवजा फाइनल नहीं : डीसी
डीसी अजय सिंह तोमर ने कहा है कि जिले से निकलने वाला ग्रीन कॉरिडोर 152 ए दादरी के विकास के लिए बेहद जरूरी है। इसके बनने से जिले में हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कॉरिडोर बनने से क्षेत्र में उद्योग लगेंगे और लोगों को नौकरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को दिया जाने वाला मुआवजा फाइनल नही है। इसके बाद भी किसान न्यायालय के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया अपनाकर मुआवजा बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। उपायुक्त ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर 152ए दिल्ली मुंबई हाईवे का एक हिस्सा है। इसके बनने से चरखी दादरी क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी। साथ ही यहां नए उद्योग लगेंगे, जिससे हमारे क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर पर मिलेंगे। उपायुक्त ने कहा कि यह कॉरिडोर दादरी के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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