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प्रशासन की सख्ती के बावजूद स्कूल संचालक नहीं करा रहे वेरिफिकेशन
Updated Thu, 14 Sep 2017 01:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
हर मां-बाप स्कूलों में अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर इन दिनों काफी चिंतित है। मगर स्कूल संचालकों की ओर से उन्हें किसी तरह का भरोसा नहीं दिया जा रहा। स्कूल संचालकों के वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति है। प्रशासन की कड़ाई के बिना इनकी स्थिति सुधरने वाली नहीं है। इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है क्योंकि प्रशासन ने क्षेत्र के निजी स्कूलों को स्कूल स्टाफ की वेरिफिकेशन कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक आदेशों को तीन दिन बीतने के बावजूद भी बुधवार तक एक भी स्कूल वेरिफिकेशन के लिए आगे नहीं आया। शायद वे प्रशासन के डंडे का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन को इसके पीछे काफी सख्ती दिखानी पड़ेगी।
वहीं, बुधवार को बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बीके गोयल के अलावा ट्रैफिक एसएचओ अशोक कुमार, सिटी एसएचओ प्रदीप कुमार, डीएसपी के अलावा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई स्कूलों में जाकर खामियों को चैक किया। इनमें पीडीएम स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल में अधिकारियों ने अनेक खामियां उजागर की। फिलहाल अधिकारी स्कूल संचालकों को समझाने में जुटे हुए हैं।
वेरिफिकेशन न कराने का यह एक बड़ा कारण
कई स्कूल संचालकों को डर है कि वेरिफिकेशन कराने के बाद कर्मचारियों को ऑन रोल दिखाना पड़ेगा। इससे स्कूल संचालकों को काफी नुकसान होने की संभावना है। वेरिफिकेशन न कराने की यही एक बड़ी वजह सामने आ रही है। मगर स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन से स्कूल संचालक किसी भी सूरत में नहीं बच सकते। आखिरकार स्कूल संचालकों को वेरिफिकेशन हर हालत में करानी पड़ेगी। अन्यथा उन्हें कानून के डंडे का सामना करना पड़ेगा।
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वैन में लगी होती है सीएनजी किट
इंधन खर्च बचाने के उद्देश्य से विभिन्न निजी वैन चालकों ने गाड़ियों में सीएनजी किट लगवा रखी है। कुछ में कंपनी फिटेड सीएनजी किट है तो अधिकतर वैनों में मार्केट में सड़क किनारे बैठे मैकेनिकों से सीएनजी किट लगवा रखी है। आमजन सीएनजी वाले वाहनों में गैस रिसाव या पाइप फटने से हादसा होने का खतरा मानते हैं।
बिना अनुमति बच्चों को लाते हैं निजी वाहन
बहादुरगढ़ शहर में बड़े निजी स्कूलों की संख्या 40 के आसपास है। शहर के बाल भारती स्कूल की ओर से छात्रों की सुविधा के लिए बस भी मुहैया नहीं कराई गई। बाकी स्कूलों में बस है। मगर जिन स्कूलों में बसें हैं। उनमें भी ऑटो और वैन से बच्चों को स्कूल लाया जाता है। बाल भारती स्कूल में लगभग 20-30 वैन और ऑटो लगे हुए हैं। इस तरह शहर में 100 से अधिक ऑटो और वैन बच्चों को लाने व ले जाने में लगे हुए हैं।
प्रशासन की ओर से नहीं हुई गंभीर जांच
परिवहन विभाग हो या पुलिस प्रशासन किसी ने भी कभी यातायात नियमों को धता बताते हुए स्कूली बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे ऐसे वैन व तिपहिया चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई।
क्या कहते हैं अधिकारी
बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बीके गोयल ने कहा कि वे लगातार स्कूलों में जाकर खामियों को चैक कर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर वे पूरी तरह गंभीर हैं। स्कूल संचालकों का सबसे पहला उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके बाद पढ़ाई। बुधवार को उन्होंने क्षेत्र के कई स्कूलों में जाकर चेकिंग की। कमियां मिलने पर स्कूल संचालकों को फटकार लगाई है।
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बहादुरगढ़।
हर मां-बाप स्कूलों में अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर इन दिनों काफी चिंतित है। मगर स्कूल संचालकों की ओर से उन्हें किसी तरह का भरोसा नहीं दिया जा रहा। स्कूल संचालकों के वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति है। प्रशासन की कड़ाई के बिना इनकी स्थिति सुधरने वाली नहीं है। इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है क्योंकि प्रशासन ने क्षेत्र के निजी स्कूलों को स्कूल स्टाफ की वेरिफिकेशन कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक आदेशों को तीन दिन बीतने के बावजूद भी बुधवार तक एक भी स्कूल वेरिफिकेशन के लिए आगे नहीं आया। शायद वे प्रशासन के डंडे का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन को इसके पीछे काफी सख्ती दिखानी पड़ेगी।
वहीं, बुधवार को बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बीके गोयल के अलावा ट्रैफिक एसएचओ अशोक कुमार, सिटी एसएचओ प्रदीप कुमार, डीएसपी के अलावा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई स्कूलों में जाकर खामियों को चैक किया। इनमें पीडीएम स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल में अधिकारियों ने अनेक खामियां उजागर की। फिलहाल अधिकारी स्कूल संचालकों को समझाने में जुटे हुए हैं।
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वेरिफिकेशन न कराने का यह एक बड़ा कारण
कई स्कूल संचालकों को डर है कि वेरिफिकेशन कराने के बाद कर्मचारियों को ऑन रोल दिखाना पड़ेगा। इससे स्कूल संचालकों को काफी नुकसान होने की संभावना है। वेरिफिकेशन न कराने की यही एक बड़ी वजह सामने आ रही है। मगर स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन से स्कूल संचालक किसी भी सूरत में नहीं बच सकते। आखिरकार स्कूल संचालकों को वेरिफिकेशन हर हालत में करानी पड़ेगी। अन्यथा उन्हें कानून के डंडे का सामना करना पड़ेगा।
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वैन में लगी होती है सीएनजी किट
इंधन खर्च बचाने के उद्देश्य से विभिन्न निजी वैन चालकों ने गाड़ियों में सीएनजी किट लगवा रखी है। कुछ में कंपनी फिटेड सीएनजी किट है तो अधिकतर वैनों में मार्केट में सड़क किनारे बैठे मैकेनिकों से सीएनजी किट लगवा रखी है। आमजन सीएनजी वाले वाहनों में गैस रिसाव या पाइप फटने से हादसा होने का खतरा मानते हैं।
बिना अनुमति बच्चों को लाते हैं निजी वाहन
बहादुरगढ़ शहर में बड़े निजी स्कूलों की संख्या 40 के आसपास है। शहर के बाल भारती स्कूल की ओर से छात्रों की सुविधा के लिए बस भी मुहैया नहीं कराई गई। बाकी स्कूलों में बस है। मगर जिन स्कूलों में बसें हैं। उनमें भी ऑटो और वैन से बच्चों को स्कूल लाया जाता है। बाल भारती स्कूल में लगभग 20-30 वैन और ऑटो लगे हुए हैं। इस तरह शहर में 100 से अधिक ऑटो और वैन बच्चों को लाने व ले जाने में लगे हुए हैं।
प्रशासन की ओर से नहीं हुई गंभीर जांच
परिवहन विभाग हो या पुलिस प्रशासन किसी ने भी कभी यातायात नियमों को धता बताते हुए स्कूली बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे ऐसे वैन व तिपहिया चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई।
क्या कहते हैं अधिकारी
बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बीके गोयल ने कहा कि वे लगातार स्कूलों में जाकर खामियों को चैक कर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर वे पूरी तरह गंभीर हैं। स्कूल संचालकों का सबसे पहला उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके बाद पढ़ाई। बुधवार को उन्होंने क्षेत्र के कई स्कूलों में जाकर चेकिंग की। कमियां मिलने पर स्कूल संचालकों को फटकार लगाई है।