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रैली फॉर रिवर्स कार्यक्रम में जल संरक्षण की ली शपथ
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:59 AM IST
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रैली फॉर रिवर्स कार्यक्रम में जल संरक्षण की ली शपथ
चरखी दादरी।
आरईडी स्कूल चरखी में रैली फॉर रिवर्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए विश्व में गहराते जल संकट व सूखती नदियों पर चिंता प्रकट की गई। इस दौरान छात्रों व शिक्षकों ने सूखती नदियों में अविरल जलधारा बहाने का संकल्प किया।
प्राचार्य अनुपम गोयल ने कहा कि विश्व की 10 सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गंगा नदी पर भी सूखने का संकट गहरा रहा है। कावेरी व गोदावरी जैसी नदी सूखने लगी हैं , कावेरी वर्ष में तीन महीने सागर में नहीं मिल पाती। इसका दोषी और कोई नहीं बल्कि इंसान हैं। इंसान ने इन नदियों के किनारों को बिल्कुल वृक्ष विहीन बना दिया हैं। इसलिए इन नदियों में जल धारा को हम सबको मिलकर वापस लाना है। प्राचार्य अनुपम गोयल ने कहा कि 25 प्रतिशत जमीन बंजर होने के कगार पर है। इसलिए एक सचेत नागरिक होने के नाते हमारा यह कत्र्तव्य है कि सभी नदियों के दोनों किनारों पर एक-एक किलोमीटर तक पेड़ लगाएं ताकि वृक्ष पानी को सोखकर किनारों को मजबूत रखें। यदि नदियों के किनारों पर हरे भरे वृक्ष होंगे तो नदियों में 12 मास तक पानी की अविरल धारा बहती रहेगी। इस दौरान 500 पौधे स्कूल परिवेश में लगाने का संकल्प लिया गया।
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चरखी दादरी।
आरईडी स्कूल चरखी में रैली फॉर रिवर्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए विश्व में गहराते जल संकट व सूखती नदियों पर चिंता प्रकट की गई। इस दौरान छात्रों व शिक्षकों ने सूखती नदियों में अविरल जलधारा बहाने का संकल्प किया।
प्राचार्य अनुपम गोयल ने कहा कि विश्व की 10 सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गंगा नदी पर भी सूखने का संकट गहरा रहा है। कावेरी व गोदावरी जैसी नदी सूखने लगी हैं , कावेरी वर्ष में तीन महीने सागर में नहीं मिल पाती। इसका दोषी और कोई नहीं बल्कि इंसान हैं। इंसान ने इन नदियों के किनारों को बिल्कुल वृक्ष विहीन बना दिया हैं। इसलिए इन नदियों में जल धारा को हम सबको मिलकर वापस लाना है। प्राचार्य अनुपम गोयल ने कहा कि 25 प्रतिशत जमीन बंजर होने के कगार पर है। इसलिए एक सचेत नागरिक होने के नाते हमारा यह कत्र्तव्य है कि सभी नदियों के दोनों किनारों पर एक-एक किलोमीटर तक पेड़ लगाएं ताकि वृक्ष पानी को सोखकर किनारों को मजबूत रखें। यदि नदियों के किनारों पर हरे भरे वृक्ष होंगे तो नदियों में 12 मास तक पानी की अविरल धारा बहती रहेगी। इस दौरान 500 पौधे स्कूल परिवेश में लगाने का संकल्प लिया गया।
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