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सफाई में 8.66 करोड़ खर्च फिर भी स्वच्छता में पिछड़ा जिला
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 की सूची ने नगर परिषद के सफाई प्रबंधों के दावों की पोल खोल दी है। इस सूची में नगर परिषद को 850वीं रैंक मिली है जबकि पिछली दफा यह 314 थी। इस बार चरखी दादरी नगर परिषद की रैंक घटने के बजाय 536 पायदान बढ़ी है। अब अगर शहर की सफाई संबंधी नगर परिषद के सालाना खर्च की बात करें तो यह करीब 8.66 करोड़ रुपये है। शहर की सफाई के गिरते स्तर को देखकर नप अधिकारी नए सिरे से प्लान तैयार करने में जुट गए हैं। रैंकिंग में आए उछाल को आबादी के अनुरूप संसाधनों का नहीं होना और अधिकारियों की समस्याओं के प्रति नजरअंदाजी को माना जा रहा है।
केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार चरखी दादरी नगर परिषद का परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। बुधवार को ही देश के सभी शहरों की सूची जारी की गई है। पड़ोसी जिले और पुराना जिला मुख्यालय भिवानी की रैंकिंग में इस बार आठ अंक का सुधार हुआ है तो वहीं, दायरे में भिवानी से काफी छोटा होने के बाद भी चरखी दादरी नगर परिषद की रैंकिंग और ऊपर चढ़ी है। इसके मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सफाई व्यवस्था का स्तर काफी गिरा है। वहीं, नप सूत्रों का कहना है कि जिला मुख्यालय बनने के बाद भी नप के संसाधनों में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। फिलहाल नगर परिषद के पास वर्ष 2011 की जनसंख्या मुताबिक संसाधन हैं। इनमें से भी ज्यादातर नगर परिषद कार्यालय में खड़े हैं। 2011 की जनगणना मुताबिक शहर की जनसंख्या करीब 56 हजार थी जो कि अब बढ़कर 90 हजार से पार जा चुकी है। इस समय न तो जनसंख्या के मुताबिक सफाई कर्मचारी हैं और न ही संसाधन हैं। इसके अलावा अब तक डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा के तहत पूरे शहर को कवर नहीं किया जा सका है। वहीं, नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि सर्वेक्षण रिपोर्ट आने के बाद अब नए सिरे से सफाई व्यवस्था की प्लान तैयार की जाएगी। इसके तहत जागरूकता अभियान और संसाधनों में बढ़ोतरी करना अहम बिंदु रहेंगे।
सफाई कर्मियों की तनख्वाह का खर्च साढ़े आठ करोड़ रुपये
नगर परिषद का सफाई संबंधी बजट 8.66 करोड़ रुपये सालाना है। यह बजट 2018-2019 के लिए फाइनल किया गया था। इसमें 190 सफाई कर्मियों की तनख्वाह प्रति वर्ष साढ़े आठ करोड़ रुपये है। वहीं, एक साल में नगर परिषद के वाहनों में 16 लाख रुपये का डीजल डाला गया है। इस लिहाज से एक माह में डीजल का खर्च करीब सवा लाख रुपये आया है लेकिन इसके बाद भी रैंकिंग का स्तर करीब ढाई गुना बढ़ा है।
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ये हैं नगर परिषद के पास संसाधन
सफाई कर्मी- 190
कच्चे कर्मचारी- 131
पक्के कर्मचारी- 58
ट्रैक्टर-ट्रॉली- 05
लोढर- 01
ऑटो टीपर- 10
हाथ रेहड़ी - 80
छोटे डस्टबिन 60
स्टील डस्टबिन 80
पांच टीपर अब तक नहीं उतरे सड़कों पर
करीब डेढ़ माह पहले हेड ऑफिस से बजट स्वीकृति होने के बाद नगर परिषद ने पांच नए ऑटो टीपर खरीदे थे। इनके नगर परिषद कार्यालय आने के बाद टीपरों की संख्या बढ़कर दस हो गई थी। ऑटो टीपर नप कार्यालय पहुंचने के बाद अधिकारियों ने डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा पूरे शहर में शुरू करने का दावा भी किया था। इसे करीब डेढ़ माह बीत चुके हैं लेकिन अब तक टीपरों को कचरा उठान के लिए वार्डों में नहीं भेजा गया है। ये टीपर इस समय नगर परिषद कार्यालय में खड़े हैं। नप अधिकारियों का कहना है कि इनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया नहीं हुई है और इसके लिए आवेदन वो कर चुके हैं।
इन संसाधनों की खरीद ठंडे बस्ते में
- छोटी स्वीपिंग मशीन
- दो डंपर प्लेजर
- बड़े डस्टबिन ढाई क्यूम
- जेसीबी मशीन
पार्षद बोले: संसाधनों की कमी रैंकिंग बढ़ने का कारण
- शहर की जनसंख्या के मुताबिक नप के पास संसाधन नहीं है। यह रैंकिंग बढ़ने का प्रमुख कारण है। इस बार 850वीं रैंक आई है। यह बहुत बढ़ गई है। विरेंद्र पप्पू, पार्षद, वार्ड-19
- नगर परिषद के पास सफाई के लिए मास्टर प्लान ही नहीं है। इसके अलावा संसाधनों की भी कमी है। इस कमी को पूरी करने के लिए अधिकारी कतई गंभीर नहीं है। - महेश गुप्ता, पार्षद, वार्ड-2
- यह सब गलत मैनेजमेंट की देन है। इस बार जो रैंकिंग आई है वो बेहद निराशाजनक है। पार्षद तो मेहनत कर रहे हैं लेकिन अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे।
कुलदीप गांधी, पार्षद, वार्ड-18
- वार्डों में जनसंख्या के मुताबिक सफाई कर्मी नहीं हैं। ऐसे में पूरे शहर की प्रतिदिन सफाई नहीं हो सकती। यही रैंकिंग का ग्राफ बढ़ने का मुख्य कारण भी है।
ऊषा चौहान, पार्षद, वार्ड-14
संसाधनों को बढ़ाने की हेड ऑफिस से स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही स्वीपिंग मशीन सहित अन्य संसाधन हम खरीद लेंगे। शहर की सफाई व्यवस्था को और दुरुस्त करने की दरकार है और इस संबंध में अधिकारियों को मैंने निर्देश भी दे दिए हैं। - संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद
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चरखी दादरी। स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 की सूची ने नगर परिषद के सफाई प्रबंधों के दावों की पोल खोल दी है। इस सूची में नगर परिषद को 850वीं रैंक मिली है जबकि पिछली दफा यह 314 थी। इस बार चरखी दादरी नगर परिषद की रैंक घटने के बजाय 536 पायदान बढ़ी है। अब अगर शहर की सफाई संबंधी नगर परिषद के सालाना खर्च की बात करें तो यह करीब 8.66 करोड़ रुपये है। शहर की सफाई के गिरते स्तर को देखकर नप अधिकारी नए सिरे से प्लान तैयार करने में जुट गए हैं। रैंकिंग में आए उछाल को आबादी के अनुरूप संसाधनों का नहीं होना और अधिकारियों की समस्याओं के प्रति नजरअंदाजी को माना जा रहा है।
केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार चरखी दादरी नगर परिषद का परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। बुधवार को ही देश के सभी शहरों की सूची जारी की गई है। पड़ोसी जिले और पुराना जिला मुख्यालय भिवानी की रैंकिंग में इस बार आठ अंक का सुधार हुआ है तो वहीं, दायरे में भिवानी से काफी छोटा होने के बाद भी चरखी दादरी नगर परिषद की रैंकिंग और ऊपर चढ़ी है। इसके मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सफाई व्यवस्था का स्तर काफी गिरा है। वहीं, नप सूत्रों का कहना है कि जिला मुख्यालय बनने के बाद भी नप के संसाधनों में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। फिलहाल नगर परिषद के पास वर्ष 2011 की जनसंख्या मुताबिक संसाधन हैं। इनमें से भी ज्यादातर नगर परिषद कार्यालय में खड़े हैं। 2011 की जनगणना मुताबिक शहर की जनसंख्या करीब 56 हजार थी जो कि अब बढ़कर 90 हजार से पार जा चुकी है। इस समय न तो जनसंख्या के मुताबिक सफाई कर्मचारी हैं और न ही संसाधन हैं। इसके अलावा अब तक डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा के तहत पूरे शहर को कवर नहीं किया जा सका है। वहीं, नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि सर्वेक्षण रिपोर्ट आने के बाद अब नए सिरे से सफाई व्यवस्था की प्लान तैयार की जाएगी। इसके तहत जागरूकता अभियान और संसाधनों में बढ़ोतरी करना अहम बिंदु रहेंगे।
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सफाई कर्मियों की तनख्वाह का खर्च साढ़े आठ करोड़ रुपये
नगर परिषद का सफाई संबंधी बजट 8.66 करोड़ रुपये सालाना है। यह बजट 2018-2019 के लिए फाइनल किया गया था। इसमें 190 सफाई कर्मियों की तनख्वाह प्रति वर्ष साढ़े आठ करोड़ रुपये है। वहीं, एक साल में नगर परिषद के वाहनों में 16 लाख रुपये का डीजल डाला गया है। इस लिहाज से एक माह में डीजल का खर्च करीब सवा लाख रुपये आया है लेकिन इसके बाद भी रैंकिंग का स्तर करीब ढाई गुना बढ़ा है।
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ये हैं नगर परिषद के पास संसाधन
सफाई कर्मी- 190
कच्चे कर्मचारी- 131
पक्के कर्मचारी- 58
ट्रैक्टर-ट्रॉली- 05
लोढर- 01
ऑटो टीपर- 10
हाथ रेहड़ी - 80
छोटे डस्टबिन 60
स्टील डस्टबिन 80
पांच टीपर अब तक नहीं उतरे सड़कों पर
करीब डेढ़ माह पहले हेड ऑफिस से बजट स्वीकृति होने के बाद नगर परिषद ने पांच नए ऑटो टीपर खरीदे थे। इनके नगर परिषद कार्यालय आने के बाद टीपरों की संख्या बढ़कर दस हो गई थी। ऑटो टीपर नप कार्यालय पहुंचने के बाद अधिकारियों ने डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा पूरे शहर में शुरू करने का दावा भी किया था। इसे करीब डेढ़ माह बीत चुके हैं लेकिन अब तक टीपरों को कचरा उठान के लिए वार्डों में नहीं भेजा गया है। ये टीपर इस समय नगर परिषद कार्यालय में खड़े हैं। नप अधिकारियों का कहना है कि इनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया नहीं हुई है और इसके लिए आवेदन वो कर चुके हैं।
इन संसाधनों की खरीद ठंडे बस्ते में
- छोटी स्वीपिंग मशीन
- दो डंपर प्लेजर
- बड़े डस्टबिन ढाई क्यूम
- जेसीबी मशीन
पार्षद बोले: संसाधनों की कमी रैंकिंग बढ़ने का कारण
- शहर की जनसंख्या के मुताबिक नप के पास संसाधन नहीं है। यह रैंकिंग बढ़ने का प्रमुख कारण है। इस बार 850वीं रैंक आई है। यह बहुत बढ़ गई है। विरेंद्र पप्पू, पार्षद, वार्ड-19
- नगर परिषद के पास सफाई के लिए मास्टर प्लान ही नहीं है। इसके अलावा संसाधनों की भी कमी है। इस कमी को पूरी करने के लिए अधिकारी कतई गंभीर नहीं है। - महेश गुप्ता, पार्षद, वार्ड-2
- यह सब गलत मैनेजमेंट की देन है। इस बार जो रैंकिंग आई है वो बेहद निराशाजनक है। पार्षद तो मेहनत कर रहे हैं लेकिन अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे।
कुलदीप गांधी, पार्षद, वार्ड-18
- वार्डों में जनसंख्या के मुताबिक सफाई कर्मी नहीं हैं। ऐसे में पूरे शहर की प्रतिदिन सफाई नहीं हो सकती। यही रैंकिंग का ग्राफ बढ़ने का मुख्य कारण भी है।
ऊषा चौहान, पार्षद, वार्ड-14
संसाधनों को बढ़ाने की हेड ऑफिस से स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही स्वीपिंग मशीन सहित अन्य संसाधन हम खरीद लेंगे। शहर की सफाई व्यवस्था को और दुरुस्त करने की दरकार है और इस संबंध में अधिकारियों को मैंने निर्देश भी दे दिए हैं। - संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद