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छींटाकशी का जवाब देने को सीखे खेल ने दिलाया अर्जन अवार्ड
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:34 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। वुशू वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश को पहला गोल्ड दिलाने वाली पूजा कादियान का नाम अर्जुन अवार्ड की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। जो कि पूूजा कादियान के पैतृक गांव बेरी ही नहीं प्रदेश भर के लिए गौरव की बात है। लेकिन यहां तक पहुंचने से पूर्व की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। पूूजा कादियान ने पढ़ाई के समय छींटाकशी से बचने के लिए जो खेल सीखा था, उसी खेल ने उसे आज अर्जुन अवार्ड के मुकाम तक पहुंचा दिया है।
मूलरूप से बेरी की रहने वाली पूजा ने शरारती युवकों के कमेंट से तंग आकर मार्शल आर्ट सीखने का मन बना लिया था। शुरुआत में उन्हें परिवार का बिल्कुल सपोर्ट नहीं मिला। वह घर पर उपले बनाते वक्त ही प्रैक्टिस किया करती थी। पूजा वर्तमान में सीआरपीएफ दिल्ली में कांस्टेबल है।
पापा से छुपकर करती थीं प्रैक्टिस
पूजा के लिए वह मुश्किल का दौर था जब पापा से छिपकर प्रैक्टिस किया करती थीं। लेकिन जब धीरे-धीरे उनका खेल लोगों के सामने आया तो उनके पापा को लोगों से कमेंट मिलने शुरू हो गए थे। ऐसे में वह अपने खेल पर पूरा फोकस नहीं कर पा रही थी। इसलिए घरवालों से लड़कर अपनी नानी के घर दिल्ली चली गई। जहां से उनकी एक अच्छी शुरुआत हुई। आज पूजा के पिता उन पर गर्व करते हैं।
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2008 से अब तक नेशनल चैंपियन
2008 से अब तक वह नेशनल चैंपियन है। इसी वजह से उन्हें सीआरपीएफ दिल्ली में नौकरी मिली। सीआरपीएफ में रहते हुए वह तीन बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी थी। जहां उन्हें तीन बार सिल्वर मेडल मिला जबकि 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही।
साल्हावास में रह रहा है परिवार
मूलरूप से बेरी की रहने वाली पूजा का परिवार इन दिनों साल्हावास गांव में रह रहा है। पूजा के पिता अशोक ने बताया कि वह लकड़ियों की ठेकेदारी का कार्य करते हैं तथा पूजा की मां मेनका गृहिणी हैं। पूजा का भाई दीपक दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर अपने पिता कार्य में ही हाथ बंटा रहा है। वहीं पूजा की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है।
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झज्जर। वुशू वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश को पहला गोल्ड दिलाने वाली पूजा कादियान का नाम अर्जुन अवार्ड की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। जो कि पूूजा कादियान के पैतृक गांव बेरी ही नहीं प्रदेश भर के लिए गौरव की बात है। लेकिन यहां तक पहुंचने से पूर्व की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। पूूजा कादियान ने पढ़ाई के समय छींटाकशी से बचने के लिए जो खेल सीखा था, उसी खेल ने उसे आज अर्जुन अवार्ड के मुकाम तक पहुंचा दिया है।
मूलरूप से बेरी की रहने वाली पूजा ने शरारती युवकों के कमेंट से तंग आकर मार्शल आर्ट सीखने का मन बना लिया था। शुरुआत में उन्हें परिवार का बिल्कुल सपोर्ट नहीं मिला। वह घर पर उपले बनाते वक्त ही प्रैक्टिस किया करती थी। पूजा वर्तमान में सीआरपीएफ दिल्ली में कांस्टेबल है।
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पापा से छुपकर करती थीं प्रैक्टिस
पूजा के लिए वह मुश्किल का दौर था जब पापा से छिपकर प्रैक्टिस किया करती थीं। लेकिन जब धीरे-धीरे उनका खेल लोगों के सामने आया तो उनके पापा को लोगों से कमेंट मिलने शुरू हो गए थे। ऐसे में वह अपने खेल पर पूरा फोकस नहीं कर पा रही थी। इसलिए घरवालों से लड़कर अपनी नानी के घर दिल्ली चली गई। जहां से उनकी एक अच्छी शुरुआत हुई। आज पूजा के पिता उन पर गर्व करते हैं।
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2008 से अब तक नेशनल चैंपियन
2008 से अब तक वह नेशनल चैंपियन है। इसी वजह से उन्हें सीआरपीएफ दिल्ली में नौकरी मिली। सीआरपीएफ में रहते हुए वह तीन बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी थी। जहां उन्हें तीन बार सिल्वर मेडल मिला जबकि 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही।
साल्हावास में रह रहा है परिवार
मूलरूप से बेरी की रहने वाली पूजा का परिवार इन दिनों साल्हावास गांव में रह रहा है। पूजा के पिता अशोक ने बताया कि वह लकड़ियों की ठेकेदारी का कार्य करते हैं तथा पूजा की मां मेनका गृहिणी हैं। पूजा का भाई दीपक दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर अपने पिता कार्य में ही हाथ बंटा रहा है। वहीं पूजा की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है।