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बादली सब स्टेशन में जरूरत 101 कर्मचारियों की, हैं केवल 29
Updated Tue, 08 Aug 2017 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली।
बिजली सब स्टेशन बादली इन दिनों कर्मचारियों की कमी झेल रहा है। सब स्टेशन के अधीन आने वाले करीब 23 गांवों में बिजली की सप्लाई के लिए मात्र 29 कर्मचारी ही काम रहे हैं, जबकि विभागीय तौर पर 101 कर्मचारियों की जरूरत है। ऐसे में सबसे मुख्यमंत्री की बनाई गई मेरा गांव जगमग गांव योजना का परिणाम अभी तक चारों गांवों में जीरो ही है।
कई वर्षों से कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी होने की अपेक्षा कमी ही होती जा रही है। करीब 23 हजार उपभोक्ताओं के लिए तैनात इन 29 कर्मचारियों में भी 14 कर्मचारी डीसी रेट पर लगे हैं, जबकि दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। ऐसे में विभाग का काम राम भरोसे ही चल रहा है और कोई भी फाल्ट हो जाए तो उसे दूर करने में कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि हर माह कर्मचारियों की कमी की जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को भेजी जाती है मगर कोई कर्मचारी नहीं बढ़ाया जा रहा।
कर्मचारियों की संख्या पर नजर डाली जाए तो जेई फर्स्ट की एक पोस्ट होनी चाहिए और वह भी खाली पड़ी है। जेई एसटीएन की एकमात्र पोस्ट खाली है। एएफएम की दो पोस्ट में से विभाग एक एएफएम से ही काम चला रहा है। एलएम की 17 पोस्ट होनी चाहिए मगर विभाग 10 से ही काम चला रहा है। इसी तरह से एएलएम में भी 47 में से 40 पद रिक्त हैं, जिनमें सातों कर्मचारी डीसी रेट पर काम कर रहे हैं, जबकि सीसी के बिना ही विभाग को काम चलाना पड़ रहा है।
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विभाग के पास एलडीसी भी मात्र 2 हैं और आवश्यकतानुसार 4 एलडीसी जरूरी हैं। इनमें भी एक सस्पेंड चल रहा है और 2 डीसी रेट पर विभाग का काम चला रहे हैं। यूडीसी की दोनों पोस्ट खाली हैं। वहीं, एमआर के 3 पद रिक्त पड़े हैं। बीडी पद के लिए चारों कुर्सियां खाली हैं। हर माह लाखों का लेखा-जोखा तैयार करने के लिए सीए भी नहीं हैं। सीकेडी 2 में से 1 डीसी रेट पर ही हैं। एसएसए के बिना ही विभाग का कामकाज प्रभावित हो रहा है क्योंकि 2 कुर्सियां एसएसए की बाट जोह रही हैं। विभाग के पास डीमैन, चालक और माली के पद भी रिक्त पड़े हैं। ऐसे में विभाग कर्मचारियों के टोटे से बुरी तरह से ग्रस्त है जिसका कोई इलाज नहीं है। कर्मचारियों की कमी से कर्मचारियों की परेशानियों का कोई पैमाना नहीं है। ऐसे में विभाग के एसडीई के सामने भी सभी गांवों में शेड्यूल के अनुसार बिजली सप्लाई करना आसान नहीं है, क्योंकि उन्हें बिजली सप्लाई की जिम्मेवारी के साथ-साथ लोगों के रोष का सामना भी करना पड़ जाता है। कई बार कर्मचारी छुट्टी पर होते हैं तो फाल्ट ठीक करने में बाधा आती है। ऐसे में शेड्यूल के अनुसार बिजली मिलने की ग्रामीण कल्पना कैसे कर सकते हैं।
क्षमता बढ़ी कर्मचारी नहीं
पिछले वर्ष सब स्टेशन को 33 केवी से बढ़ाकर 132 केवी कर दिया गया। मगर इसके बाद भी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की बजाए घटती गई। इसी का परिणाम है कि जब कोई फाल्ट होता है तो ठीक कराने में दो चार घंटे नहीं बल्कि दो से चार दिन तक लग जाते हैं। सबसे बुरा असर तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा बनाई गई मेरा गांव जगमग गांव योजना पर पड़ रहा है, जिसका परिणाम अभी तक चुने गए चारों गांवों में जीरो ही है। न तो घरों के बाहर मीटर लग पाए हैं न ही गांवों में अन्य मापदंड पूरे हो सके हैं।
चोरी पर नियंत्रण नहीं
कर्मचारियों की कमी के चलते बिजली चोरी रोकने में भी दिक्कत आ रही है। बिजली चोरों के हौसले बुलंद रहते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि कर्मचारियों की कमी की चलते छापामार कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकती है। गुभाना स्थित मिनी इंडस्ट्रीज में तो कभी बिजली कर्मचारी नजर तक नहीं आते हैं, क्योंकि उन्हें फाल्ट ठीक कराने से ही फुरसत नहीं मिलती, जबकि मिनी इंडस्ट्रीज में प्रति माह लाखों रुपये का चूना विभाग को बिजली चोरी कर लगाया जा रहा है।
क्या कहते हैं एसडीई
बादली सब स्टेशन के एसडीई खूबचंद के अनुसार कार्यालय में कर्मचारियों की कमी की मासिक रिपोर्ट भेजी जाती है मगर कर्मचारियों को नहीं बढ़ाया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि कमी तो पूरे प्रदेश में चल रही है मगर बादली में 23 हजार उपभोक्ताओं के लिए मात्र 29 कर्मचारियों का होना विभाग के पास एक बड़ी चुनौती है। इसके बाद भी कर्मचारी हर फाल्ट को दूर करने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं।
- जेई, एएलएम और सीसी तक नहीं
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बादली।
बिजली सब स्टेशन बादली इन दिनों कर्मचारियों की कमी झेल रहा है। सब स्टेशन के अधीन आने वाले करीब 23 गांवों में बिजली की सप्लाई के लिए मात्र 29 कर्मचारी ही काम रहे हैं, जबकि विभागीय तौर पर 101 कर्मचारियों की जरूरत है। ऐसे में सबसे मुख्यमंत्री की बनाई गई मेरा गांव जगमग गांव योजना का परिणाम अभी तक चारों गांवों में जीरो ही है।
कई वर्षों से कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी होने की अपेक्षा कमी ही होती जा रही है। करीब 23 हजार उपभोक्ताओं के लिए तैनात इन 29 कर्मचारियों में भी 14 कर्मचारी डीसी रेट पर लगे हैं, जबकि दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। ऐसे में विभाग का काम राम भरोसे ही चल रहा है और कोई भी फाल्ट हो जाए तो उसे दूर करने में कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि हर माह कर्मचारियों की कमी की जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को भेजी जाती है मगर कोई कर्मचारी नहीं बढ़ाया जा रहा।
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कर्मचारियों की संख्या पर नजर डाली जाए तो जेई फर्स्ट की एक पोस्ट होनी चाहिए और वह भी खाली पड़ी है। जेई एसटीएन की एकमात्र पोस्ट खाली है। एएफएम की दो पोस्ट में से विभाग एक एएफएम से ही काम चला रहा है। एलएम की 17 पोस्ट होनी चाहिए मगर विभाग 10 से ही काम चला रहा है। इसी तरह से एएलएम में भी 47 में से 40 पद रिक्त हैं, जिनमें सातों कर्मचारी डीसी रेट पर काम कर रहे हैं, जबकि सीसी के बिना ही विभाग को काम चलाना पड़ रहा है।
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विभाग के पास एलडीसी भी मात्र 2 हैं और आवश्यकतानुसार 4 एलडीसी जरूरी हैं। इनमें भी एक सस्पेंड चल रहा है और 2 डीसी रेट पर विभाग का काम चला रहे हैं। यूडीसी की दोनों पोस्ट खाली हैं। वहीं, एमआर के 3 पद रिक्त पड़े हैं। बीडी पद के लिए चारों कुर्सियां खाली हैं। हर माह लाखों का लेखा-जोखा तैयार करने के लिए सीए भी नहीं हैं। सीकेडी 2 में से 1 डीसी रेट पर ही हैं। एसएसए के बिना ही विभाग का कामकाज प्रभावित हो रहा है क्योंकि 2 कुर्सियां एसएसए की बाट जोह रही हैं। विभाग के पास डीमैन, चालक और माली के पद भी रिक्त पड़े हैं। ऐसे में विभाग कर्मचारियों के टोटे से बुरी तरह से ग्रस्त है जिसका कोई इलाज नहीं है। कर्मचारियों की कमी से कर्मचारियों की परेशानियों का कोई पैमाना नहीं है। ऐसे में विभाग के एसडीई के सामने भी सभी गांवों में शेड्यूल के अनुसार बिजली सप्लाई करना आसान नहीं है, क्योंकि उन्हें बिजली सप्लाई की जिम्मेवारी के साथ-साथ लोगों के रोष का सामना भी करना पड़ जाता है। कई बार कर्मचारी छुट्टी पर होते हैं तो फाल्ट ठीक करने में बाधा आती है। ऐसे में शेड्यूल के अनुसार बिजली मिलने की ग्रामीण कल्पना कैसे कर सकते हैं।
क्षमता बढ़ी कर्मचारी नहीं
पिछले वर्ष सब स्टेशन को 33 केवी से बढ़ाकर 132 केवी कर दिया गया। मगर इसके बाद भी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की बजाए घटती गई। इसी का परिणाम है कि जब कोई फाल्ट होता है तो ठीक कराने में दो चार घंटे नहीं बल्कि दो से चार दिन तक लग जाते हैं। सबसे बुरा असर तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा बनाई गई मेरा गांव जगमग गांव योजना पर पड़ रहा है, जिसका परिणाम अभी तक चुने गए चारों गांवों में जीरो ही है। न तो घरों के बाहर मीटर लग पाए हैं न ही गांवों में अन्य मापदंड पूरे हो सके हैं।
चोरी पर नियंत्रण नहीं
कर्मचारियों की कमी के चलते बिजली चोरी रोकने में भी दिक्कत आ रही है। बिजली चोरों के हौसले बुलंद रहते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि कर्मचारियों की कमी की चलते छापामार कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकती है। गुभाना स्थित मिनी इंडस्ट्रीज में तो कभी बिजली कर्मचारी नजर तक नहीं आते हैं, क्योंकि उन्हें फाल्ट ठीक कराने से ही फुरसत नहीं मिलती, जबकि मिनी इंडस्ट्रीज में प्रति माह लाखों रुपये का चूना विभाग को बिजली चोरी कर लगाया जा रहा है।
क्या कहते हैं एसडीई
बादली सब स्टेशन के एसडीई खूबचंद के अनुसार कार्यालय में कर्मचारियों की कमी की मासिक रिपोर्ट भेजी जाती है मगर कर्मचारियों को नहीं बढ़ाया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि कमी तो पूरे प्रदेश में चल रही है मगर बादली में 23 हजार उपभोक्ताओं के लिए मात्र 29 कर्मचारियों का होना विभाग के पास एक बड़ी चुनौती है। इसके बाद भी कर्मचारी हर फाल्ट को दूर करने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं।
- जेई, एएलएम और सीसी तक नहीं