{"_id":"6aa075bc1f5459bda50cc289","slug":"180-people-filled-out-eye-donation-pledge-forms-bahadurgarh-news-c-200-1-bgh1005-126995-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: 180 लोगों ने नेत्रदान संकल्प फार्म भरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: 180 लोगों ने नेत्रदान संकल्प फार्म भरे
Wed, 09 Sep 2026 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 09 Sep 2026 02:23 AM IST
विज्ञापन
फोटो-57: नेत्रदान का फार्म भरने वाले लोग। स्रोत स्वास्थ्य विभाग
बहादुरगढ़। नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग विभाग की ओर से आयोजित 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का मंगलवार को समापन हुआ। लोगों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का आयोजन नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मालविका बंसल की देखरेख में किया गया।
इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके तीमारदारों को नेत्रदान के लिए संकल्प दिलाया गया। पखवाड़े के दौरान करीब 180 लोगों ने नेत्रदान संकल्प फार्म भरे। डॉ. वर्षा, डॉ. हंसा और नेत्र विज्ञानी दिनेश कुमार ने भी लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया।
डॉ. मालविका बंसल ने कहा कि नेत्रदान महादान है। मृत्यु के बाद व्यक्ति के कॉर्निया का दान किसी दृष्टिहीन व्यक्ति को दुनिया देखने का अवसर दे सकता है। उन्होंने लोगों से स्वयं नेत्रदान का संकल्प लेने और परिवार व आसपास के लोगों को भी प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में नेत्रदान को लेकर कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें जागरूकता से दूर किया जा सकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मृत्यु के चार से छह घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया कराना बेहतर होता है। कार्यक्रम में नर्सिंग ऑफिसर, स्वास्थ्यकर्मी, मरीज और उनके तीमारदार मौजूद रहे।
विज्ञापन
इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके तीमारदारों को नेत्रदान के लिए संकल्प दिलाया गया। पखवाड़े के दौरान करीब 180 लोगों ने नेत्रदान संकल्प फार्म भरे। डॉ. वर्षा, डॉ. हंसा और नेत्र विज्ञानी दिनेश कुमार ने भी लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया।
विज्ञापन
डॉ. मालविका बंसल ने कहा कि नेत्रदान महादान है। मृत्यु के बाद व्यक्ति के कॉर्निया का दान किसी दृष्टिहीन व्यक्ति को दुनिया देखने का अवसर दे सकता है। उन्होंने लोगों से स्वयं नेत्रदान का संकल्प लेने और परिवार व आसपास के लोगों को भी प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में नेत्रदान को लेकर कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें जागरूकता से दूर किया जा सकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मृत्यु के चार से छह घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया कराना बेहतर होता है। कार्यक्रम में नर्सिंग ऑफिसर, स्वास्थ्यकर्मी, मरीज और उनके तीमारदार मौजूद रहे।