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नई पांच एंबुलेंस मिली, तीन भेजी जाएंगी सीएचसी केंद्रों पर
Updated Tue, 27 Nov 2018 12:53 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। स्वास्थ्य विभाग ने जिले को पांच नई एंबुलेंस दी हैं। इनकी भिवानी में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही है और आगामी दो-तीन दिन में जिला मुख्यालय में पहुंच जाएंगी। इनमें से तीन एंबुलेंस बौंदकलां, गोपी और झोझूकलां सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) पर भेजी जाएंगी जबकि दो एंबुलेंस जिला मुख्यालय में ही रखी जाएंगी। जरूरत के समय इन एंबुलेंसों को पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर भेजा जाएगा। नई एंबुलेंस मिलने के बाद जिले में सरकारी एंबुलेंस की संख्या नौ से बढ़कर 14 हो गई है।
जिले की आठ लाख की आबादी के लिए अभी भी एंबुलेंस पर्याप्त नहीं है। पिछले सप्ताह तक जिला स्वास्थ्य विभाग के पास महज नौ एंबुलेंस ही थीं। वहीं, बाढड़ा उपमंडल के अलावा बौंदकलां और झोझूकलां ब्लॉक से जुड़े गांवों के लोग तो इस सेवा से वंचित थे। उनके क्षेत्र में स्थित सीएचसी केंद्र पर ही एंबुलेंस नहीं थी। जरूरत पड़ने पर पुराने जिला मुख्यालय भिवानी कंट्रोल रूम में फोन करना पड़ता था। वहां से चरखी दादरी अस्पताल में फोन किया जाता था और तब एंबुलेंस सेवा उपलब्ध हो पाती थी। कई दफा एंबुलेंस की कमी के चलते लोगों को प्राइवेट वाहनों का प्रबंध कर मरीज को पहले सीएचसी और फिर जिला मुख्यालय अस्पताल लाना पड़ता था। यह स्थिति पिछले लंबे समय से बनी थी लेकिन इसमें सुधार नहीं हो पा रहा था।
सीएमओ विरेंद्र यादव ने कुछ दिन पहले ही एंबुलेंस सेवा में सुधार करने की योजना तैयार की थी। इससे पहले अमर उजाला ने सीएचसी केंद्रों पर एंबुलेंस सेवा न होने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। जिलेवासियों के लिए खुशी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने सीएमओ विरेंद्र यादव की डिमांड को मंजूरी देने के साथ-साथ एंबुलेंस भी ऑन रिकॉर्ड मुहैया करवा दी है। ये एंबुलेंस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के लिए भिवानी भेजी गई है, वहां से दो-तीन दिन में ये एंबुलेंस चरखी दादरी सिविल अस्पताल पहुंच जाएंगी। वहीं, एंबुलेंस मिलने की स्थिति स्पष्ट होते ही स्वास्थ्य विभाग ने आगामी प्लानिंग भी बना दी है। नई पांच एंबुलेंस में तीन को बौंदकलां, गोपी और झोझूकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जाएगा। ये एंबुलेंस वहीं रहेंगी और किसी विकट स्थिति में ही इन्हें जिला मुख्यालय अस्पताल मंगवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस सप्ताह के अंत तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर एंबुलेंस जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंच जाएंगी।
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9 में से 2 एंबुलेंस थी कंडम
नई पांच एंबुलेंस आने से पहले पूरे जिले में नौ सरकारी एंबुलेंस थी। इनमें से सात वर्किंग में जबकि दो कंडम हो चुकी थीं। जिला मुख्यालय अस्पताल पर एंबुलेंस की कमी के चलते तीनों सीएचसी और 14 पीएचसी केंद्रों में से किसी पर एंबुलेंस सुविधा मुहैया नहीं थी। बता दें कि इन नौ में से तीन पुरानी एंबुलेंस भिवानी से भेजी गई थीं जोकि ठीक हालत में ही नहीं थी। इसके चलते जिला अधिकारियों ने इन्हें प्रयोग में ही नहीं लिया।
निजी एंबुलेंस संचालक लेते थे मनमाफिक किराया
एंबुलेंस का प्रति किलोमीटर सरकारी रेट करीब सात रुपये प्रति किलोमीटर तय है। सिविल अस्पताल में एंबुलेंस सेवा की कमी का फायदा निजी एंबुलेंस संचालक उठाते थे। रेफर करने की स्थिति में ये मरीज के तीमारदारों से मनमाफिक किराया लेते थे। विभागीय सूत्रों की मानें तो गुरुग्राम छोड़कर आने के तीन हजार रुपये एंबुलेंस चालक लेते थे। इसके चलते मरीज के परिजनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
सड़क हादसों के बाद खलती थी कमी
पिछले आंकड़ों को देखें तो जिले में हर साल पांच से छह बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इन दुर्घटनाओं में आठ या इससे अधिक लोग घायल होते हैं जबकि कुछ मौतें भी होती हैं। इन हादसों के बाद सिविल अस्पताल में एंबुलेंस सेवा की कमी अधिक खलती है। गत साल सड़क हादसे के घायलों को तो सिविल अस्पताल से दुग्ध वाहन में पीजीआई पहुंचा गया था। इसी तरह सभी बड़े सड़क हादसों में लोग इंसानियत का परिचय देकर अपने निजी वाहनों में घायलों को पीजीआई पहुंचाते नजर आ चुके हैं।
पांच नई एंबुलेंस जिला को मिल चुकी हैं और इनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही हैं। इनमें से तीन एंबुलेंस गोपी, बौंदकलां और बाढड़ा सीएचसी केंद्रों पर भेजी जाएंगी। इस समय वहां एंबुलेंस नहीं है। दो नई एंबुलेंस जिला मुख्यालय अस्पताल में रखी जाएंगी। - डॉ. विरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। स्वास्थ्य विभाग ने जिले को पांच नई एंबुलेंस दी हैं। इनकी भिवानी में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही है और आगामी दो-तीन दिन में जिला मुख्यालय में पहुंच जाएंगी। इनमें से तीन एंबुलेंस बौंदकलां, गोपी और झोझूकलां सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) पर भेजी जाएंगी जबकि दो एंबुलेंस जिला मुख्यालय में ही रखी जाएंगी। जरूरत के समय इन एंबुलेंसों को पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर भेजा जाएगा। नई एंबुलेंस मिलने के बाद जिले में सरकारी एंबुलेंस की संख्या नौ से बढ़कर 14 हो गई है।
जिले की आठ लाख की आबादी के लिए अभी भी एंबुलेंस पर्याप्त नहीं है। पिछले सप्ताह तक जिला स्वास्थ्य विभाग के पास महज नौ एंबुलेंस ही थीं। वहीं, बाढड़ा उपमंडल के अलावा बौंदकलां और झोझूकलां ब्लॉक से जुड़े गांवों के लोग तो इस सेवा से वंचित थे। उनके क्षेत्र में स्थित सीएचसी केंद्र पर ही एंबुलेंस नहीं थी। जरूरत पड़ने पर पुराने जिला मुख्यालय भिवानी कंट्रोल रूम में फोन करना पड़ता था। वहां से चरखी दादरी अस्पताल में फोन किया जाता था और तब एंबुलेंस सेवा उपलब्ध हो पाती थी। कई दफा एंबुलेंस की कमी के चलते लोगों को प्राइवेट वाहनों का प्रबंध कर मरीज को पहले सीएचसी और फिर जिला मुख्यालय अस्पताल लाना पड़ता था। यह स्थिति पिछले लंबे समय से बनी थी लेकिन इसमें सुधार नहीं हो पा रहा था।
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सीएमओ विरेंद्र यादव ने कुछ दिन पहले ही एंबुलेंस सेवा में सुधार करने की योजना तैयार की थी। इससे पहले अमर उजाला ने सीएचसी केंद्रों पर एंबुलेंस सेवा न होने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। जिलेवासियों के लिए खुशी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने सीएमओ विरेंद्र यादव की डिमांड को मंजूरी देने के साथ-साथ एंबुलेंस भी ऑन रिकॉर्ड मुहैया करवा दी है। ये एंबुलेंस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के लिए भिवानी भेजी गई है, वहां से दो-तीन दिन में ये एंबुलेंस चरखी दादरी सिविल अस्पताल पहुंच जाएंगी। वहीं, एंबुलेंस मिलने की स्थिति स्पष्ट होते ही स्वास्थ्य विभाग ने आगामी प्लानिंग भी बना दी है। नई पांच एंबुलेंस में तीन को बौंदकलां, गोपी और झोझूकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जाएगा। ये एंबुलेंस वहीं रहेंगी और किसी विकट स्थिति में ही इन्हें जिला मुख्यालय अस्पताल मंगवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस सप्ताह के अंत तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर एंबुलेंस जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंच जाएंगी।
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9 में से 2 एंबुलेंस थी कंडम
नई पांच एंबुलेंस आने से पहले पूरे जिले में नौ सरकारी एंबुलेंस थी। इनमें से सात वर्किंग में जबकि दो कंडम हो चुकी थीं। जिला मुख्यालय अस्पताल पर एंबुलेंस की कमी के चलते तीनों सीएचसी और 14 पीएचसी केंद्रों में से किसी पर एंबुलेंस सुविधा मुहैया नहीं थी। बता दें कि इन नौ में से तीन पुरानी एंबुलेंस भिवानी से भेजी गई थीं जोकि ठीक हालत में ही नहीं थी। इसके चलते जिला अधिकारियों ने इन्हें प्रयोग में ही नहीं लिया।
निजी एंबुलेंस संचालक लेते थे मनमाफिक किराया
एंबुलेंस का प्रति किलोमीटर सरकारी रेट करीब सात रुपये प्रति किलोमीटर तय है। सिविल अस्पताल में एंबुलेंस सेवा की कमी का फायदा निजी एंबुलेंस संचालक उठाते थे। रेफर करने की स्थिति में ये मरीज के तीमारदारों से मनमाफिक किराया लेते थे। विभागीय सूत्रों की मानें तो गुरुग्राम छोड़कर आने के तीन हजार रुपये एंबुलेंस चालक लेते थे। इसके चलते मरीज के परिजनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
सड़क हादसों के बाद खलती थी कमी
पिछले आंकड़ों को देखें तो जिले में हर साल पांच से छह बड़ी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इन दुर्घटनाओं में आठ या इससे अधिक लोग घायल होते हैं जबकि कुछ मौतें भी होती हैं। इन हादसों के बाद सिविल अस्पताल में एंबुलेंस सेवा की कमी अधिक खलती है। गत साल सड़क हादसे के घायलों को तो सिविल अस्पताल से दुग्ध वाहन में पीजीआई पहुंचा गया था। इसी तरह सभी बड़े सड़क हादसों में लोग इंसानियत का परिचय देकर अपने निजी वाहनों में घायलों को पीजीआई पहुंचाते नजर आ चुके हैं।
पांच नई एंबुलेंस जिला को मिल चुकी हैं और इनकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही हैं। इनमें से तीन एंबुलेंस गोपी, बौंदकलां और बाढड़ा सीएचसी केंद्रों पर भेजी जाएंगी। इस समय वहां एंबुलेंस नहीं है। दो नई एंबुलेंस जिला मुख्यालय अस्पताल में रखी जाएंगी। - डॉ. विरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी