{"_id":"5baa8f63867a55019d6179f0","slug":"171537904483-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेत में भीगी फसल के बाद अब मंडी में बाजरे की बिक्री करना भी आफत से कम नहीं होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेत में भीगी फसल के बाद अब मंडी में बाजरे की बिक्री करना भी आफत से कम नहीं होगा
Updated Wed, 26 Sep 2018 01:11 AM IST
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चरखी दादरी। इस बार पछेती मानसून की बारिश किसानों के लिए बाजरे की बिक्री में भी रोड़ा बनने जा रही है। हाल ही में हुई बारिश से बाजरा की फसल में नमी की इस समय मात्रा 60 प्रतिशत तक बढ़ी हुई है जबकि सरकार 14 प्रतिशत से ज्यादा नमी की मात्रा वाले बाजरे को नहीं खरीदेगी। इसके लिए स्पेशल हिदायतें जारी कर दी गई है। जिले में मौजूदा सीजन में बाजरे की बिजाई 37.600 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कर रखी है। मौसम साफ होते ही किसान बाजरे की कटाई व कढ़ाई में जुट जाएंगे। एक अक्टूबर सेे बाजरे की खरीद शुरू होनी है। जिला प्रशासन की मानें तो तीन दिन हुई बारिश के चलते बाजरे की फसल में 40 फीसदी तक नुकसान की संभावना है।
अभी हाल ही में हुई तेज बारिश से खड़ी फसलों में काफी नुकसान हुआ है। बाजरा की फसल पक चुकी है। मौसम साफ होते ही किसान बाजरा की कटाई व कढ़ाई में जुट जाएंगे। रेतीला एरिया में बाजरा की कई भागों में कटाई की जा चुकी है। फसल की कटाई अब तेजी से शुरू हो जाएगी। जिले में बाजरे का कुल रकबा 37.600 हेक्टेयर क्षेेत्र हैं। जिन किसानों ने बाजरा की अगेती फसल की कटाई व कढ़ाई कर ली है उस अनाज में इस समय नमी की मात्रा बहुत ज्यादा बनी हुई है। किसानों को नमी की मात्रा कम करने के लिए अनाज को सूखाने के लिए अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अगर किसान फसल को सूखाकर मंडी में ले जाएगा तभी उसकी फसल की खरीद हो पाना संभव है। मौजूदा समय में हुई बारिश से बाजरा की नमी खत्म होने में कम से कम 10 दिन का समय लगेगा बशर्ते की मौसम लगातार साफ बना रहेगा। इस समय बाजरा में नमी की मात्रा 60 प्रतिशत तक बनी हुई है। ऐसे में किसानों को मंडी में बाजरा की फसल बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।
14 प्रतिशत से ज्यादा नमी होने पर नहीं होगी खरीद
सरकार की ओर से जारी हिदायतों के अनुसार 14 प्रतिशत से ज्यादा नमी की मात्रा पाए जाने पर बाजरे की खरीद नहीं हो सकेगी। यह खरीद का कार्य एक अक्टूबर से शुरू करने की सरकार की प्लानिंग है। नमी की मात्रा खरीद करने से पहले ही मापी जाएगी। इस बार बाजरे का समर्थन मूल्य 1950 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जो गत वर्ष की तुलना में करीब चार सौ रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है इसी वजह से किसानों ने बाजरों की बिजाई इस बार साढ़े तीन हजार हैक्टेयर क्षेत्र में ज्यादा कर रखी है।
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यह हैं खरीद के नियम
बाजरे के दाने में दूसरे अनाज की मात्रा तीन प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसी प्रकार डैमेज दाना की मात्रा भी 1.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साइटली डैमेज व डिस्कलरड दाना की मात्रा 4.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अनाज मंडी में बाजरा की खरीद के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जगह की व्यवस्था के अलावा किसानों के ट्रैक्टर आदि के खड़ा करने की व्यवस्था, पेयजल व बिजली की व्यवस्था पर भी फोकस किया जा रहा है ताकि किसानों को परेशानी न होने पाए।
जमीन की फर्द के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर
इस बार किसानों को फसल की बिक्री के लिए संभवतया जमीन की गिरदावरी की फर्द लेने के लिए पटवारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि सरकार ने किसानों के बीजित बाजरा, औसत पैदावार व किसानों का डॉटा पहले ही जुटा लिया है ऐसे में किसानों को अपने बिजाई क्षेत्र की प्रमाणिकता दर्शाने में कठिनाई नहीं आएगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत खरीद को आसान बनाया जा रहा है।
इस संबंध में मंडी मैनेजर रामनारायण का कहना है कि किन- किन एजेंसी को खरीद शुरू करनी है इस बारे में अभी हिदायतें नहीं पहुंची हैं। वैसे आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही है।
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अभी हाल ही में हुई तेज बारिश से खड़ी फसलों में काफी नुकसान हुआ है। बाजरा की फसल पक चुकी है। मौसम साफ होते ही किसान बाजरा की कटाई व कढ़ाई में जुट जाएंगे। रेतीला एरिया में बाजरा की कई भागों में कटाई की जा चुकी है। फसल की कटाई अब तेजी से शुरू हो जाएगी। जिले में बाजरे का कुल रकबा 37.600 हेक्टेयर क्षेेत्र हैं। जिन किसानों ने बाजरा की अगेती फसल की कटाई व कढ़ाई कर ली है उस अनाज में इस समय नमी की मात्रा बहुत ज्यादा बनी हुई है। किसानों को नमी की मात्रा कम करने के लिए अनाज को सूखाने के लिए अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अगर किसान फसल को सूखाकर मंडी में ले जाएगा तभी उसकी फसल की खरीद हो पाना संभव है। मौजूदा समय में हुई बारिश से बाजरा की नमी खत्म होने में कम से कम 10 दिन का समय लगेगा बशर्ते की मौसम लगातार साफ बना रहेगा। इस समय बाजरा में नमी की मात्रा 60 प्रतिशत तक बनी हुई है। ऐसे में किसानों को मंडी में बाजरा की फसल बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।
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14 प्रतिशत से ज्यादा नमी होने पर नहीं होगी खरीद
सरकार की ओर से जारी हिदायतों के अनुसार 14 प्रतिशत से ज्यादा नमी की मात्रा पाए जाने पर बाजरे की खरीद नहीं हो सकेगी। यह खरीद का कार्य एक अक्टूबर से शुरू करने की सरकार की प्लानिंग है। नमी की मात्रा खरीद करने से पहले ही मापी जाएगी। इस बार बाजरे का समर्थन मूल्य 1950 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जो गत वर्ष की तुलना में करीब चार सौ रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है इसी वजह से किसानों ने बाजरों की बिजाई इस बार साढ़े तीन हजार हैक्टेयर क्षेत्र में ज्यादा कर रखी है।
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यह हैं खरीद के नियम
बाजरे के दाने में दूसरे अनाज की मात्रा तीन प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसी प्रकार डैमेज दाना की मात्रा भी 1.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साइटली डैमेज व डिस्कलरड दाना की मात्रा 4.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अनाज मंडी में बाजरा की खरीद के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जगह की व्यवस्था के अलावा किसानों के ट्रैक्टर आदि के खड़ा करने की व्यवस्था, पेयजल व बिजली की व्यवस्था पर भी फोकस किया जा रहा है ताकि किसानों को परेशानी न होने पाए।
जमीन की फर्द के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर
इस बार किसानों को फसल की बिक्री के लिए संभवतया जमीन की गिरदावरी की फर्द लेने के लिए पटवारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि सरकार ने किसानों के बीजित बाजरा, औसत पैदावार व किसानों का डॉटा पहले ही जुटा लिया है ऐसे में किसानों को अपने बिजाई क्षेत्र की प्रमाणिकता दर्शाने में कठिनाई नहीं आएगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत खरीद को आसान बनाया जा रहा है।
इस संबंध में मंडी मैनेजर रामनारायण का कहना है कि किन- किन एजेंसी को खरीद शुरू करनी है इस बारे में अभी हिदायतें नहीं पहुंची हैं। वैसे आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही है।