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कृषि विभाग का खेल: एक माह तक बिना सब्सिडी बेची खरपतवार नाशक, किसानों की जरूरत पूरी हुई तो उसी पर शुरू की सब्सिडी
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:45 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
कृषि विभाग के आला अफसर कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के ही गृह जिले में किसानों के साथ खेल करने में जुटे हुए हैं। विभाग के अधिकारियों का खेल यह है कि जिले की सरकारी खाद-बीज दुकान पर गेहूं में डाले जाने वाली खरपतवार नाशक दवा वेस्ता एक माह तक बिना सब्सिडी के बेची गई। जब क्षेत्र के किसानों की आवश्यकता पूरी हो गई तो यही दवा विभाग के सब्सिडी वाले काउंटर पर उपलब्ध हो गई। विभाग ने सब्सिडी वाली दवा खरीदने के लिए इस बार किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। विभाग ने किसानों द्वारा आवेदन करने की तिथि 25 नवंबर तय की थी। विभाग ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए अपनी साइट को ही इस दिन तक चालू नहीं किया। अंतिम तिथि पर आधे घंटे तक साइट को खोला गया। आधे घंटे में ही सब्सिडी वाली दवा के लिए रजिस्ट्रेशन फुल हो गए।
विभाग का ये है असली खेल
अमर उजाला टीम ने मामले की पूरी तहकीकात की तो सामने आया है कि विभाग के अधिकारी मामले में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। क्योंकि जिन किसानों ने वेस्ता दवा के लिए रजिस्ट्रेशन किया था। उन्होंने लंबे इंतजार के बाद फसल बचाने के लिए अब इसे महंगे दामों पर खरीद लिया है। इसके चलते हालात ये बन गए हैं कि सब्सिडी वाली 2560 यूनिट में से किसान छह दिन में केवल 60 यूनिट लेकर गए हैं। अगर यही हालात रहे तो कृषि विभाग के अधिकारी इसे वापस मुख्यालय को सरेंडर करेंगे।
प्रति एकड़ किसानों को 250 रुपये का नुकसान
खरपतवार नाशक वेस्ता दवा की खरीद पर किसानों को प्रति एकड़ 250 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। विभाग द्वारा बिना सब्सिडी पर वेस्ता दवा की एक यूनिट 520 रुपये में किसानों को बेची गई है। जबकि अब यह सब्सिडी पर आ गई है तो किसानों को इसके दाम कम कर 470 रुपये प्रति यूनिट दी जा रही है। जिसमें भी 200 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।
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माइक्रो न्यूट्रेंट भी पहुंची लेट
गेहूं बिजाई से पहले जमीन में डाले जाने वाली माइक्रो न्यूट्रेंट बिजाई के समय किसानों को उपलब्ध नहीं करवाए गए। किसानों ने इनके बिना बिजाई कर दी तो विभाग के स्टोर में एक माह बाद पहुंच गए। विभाग के स्टोर में खेप के ढेर लगे देखकर कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को इसके अब प्रयोग के लिए मोटिवेट करने में जुट गए। किसान अगर अब इसका छिड़काव करते हैं तो उनका प्रति एकड़ के हिसाब से 200 रुपये खर्च बढ़ जाएगा। वहीं, अब फसल में इसका फायदा भी कम होगा। विभाग द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले माइक्रो न्यूट्रेंट में जिंक, सल्फेट, मैग्नीस सल्फेट, फैरस सल्फेट शामिल हैं।
ये बोले किसान
1. जहांगीरपुर निवासी किसान ओमप्रकाश ने बताया कि गेहूं में खरपतवार नाशक दवा डालनी थी। इसके लिए वह सरकारी खाद-बीज की दुकान पर गया था। लेकिन उसे सब्सिडी वाली दवा नहीं दी गई, जबकि स्टोर में दवा बड़े पैमाने पर मौजूद है।
2. दुबलधन माजरा निवासी नरेश कुमार ने बताया कि रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसान दवा लेने नहीं आ रहे। ऐसे में उन्हें सब्सिडी वाली दवा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। विभाग के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे। उन्हें पूर्व में भी बिना सब्सिडी पर ही दवा दी गई।
हर कदम पर किसानों के साथ छल: बैनीवाल
कृषि विभाग किसानों पर दोहरी मार डाल रहा है। विभाग के द्वारा किसानों के साथ हर कदम पर छल किया जा रहा है। बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग के द्वारा जानबूझकर दवाओं को लेट किया जा रहा है। सब्सिडी के लिए ऑनलाइन की बजाए, ऑफलाइन कार्य किया जाना चाहिए। ताकि किसान की पहुंच में यह हो सके।
वर्जन
विभाग के मुख्यालय से ही दवा लेट आई है। अभी केवल रजिस्ट्रेशन वाले किसानों को ही देने के आदेश हैं। अगर परमिट पर देने के आदेश मिले तो किसानों को सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। वहीं, अगर सब्सिडी वाली दवा स्टॉक में रहती है तो वापस भेज दी जाएगी।
- बालकृष्ण, उपप्रबंधक, एचएलआरडीसी।
वर्जन
दवा पहुंचने की जानकारी किसानों को नहीं मिलने के कारण सब्सिडी वाली दवा का स्टॉक अभी बचा हुआ है। किसानों तक इसकी ेजानकारी पहुंचाई जाएगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के आदेश विभाग के मुख्यालय से आए हैं।
- रोहताश, डीडीए, झज्जर।
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झज्जर।
कृषि विभाग के आला अफसर कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के ही गृह जिले में किसानों के साथ खेल करने में जुटे हुए हैं। विभाग के अधिकारियों का खेल यह है कि जिले की सरकारी खाद-बीज दुकान पर गेहूं में डाले जाने वाली खरपतवार नाशक दवा वेस्ता एक माह तक बिना सब्सिडी के बेची गई। जब क्षेत्र के किसानों की आवश्यकता पूरी हो गई तो यही दवा विभाग के सब्सिडी वाले काउंटर पर उपलब्ध हो गई। विभाग ने सब्सिडी वाली दवा खरीदने के लिए इस बार किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। विभाग ने किसानों द्वारा आवेदन करने की तिथि 25 नवंबर तय की थी। विभाग ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए अपनी साइट को ही इस दिन तक चालू नहीं किया। अंतिम तिथि पर आधे घंटे तक साइट को खोला गया। आधे घंटे में ही सब्सिडी वाली दवा के लिए रजिस्ट्रेशन फुल हो गए।
विभाग का ये है असली खेल
अमर उजाला टीम ने मामले की पूरी तहकीकात की तो सामने आया है कि विभाग के अधिकारी मामले में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। क्योंकि जिन किसानों ने वेस्ता दवा के लिए रजिस्ट्रेशन किया था। उन्होंने लंबे इंतजार के बाद फसल बचाने के लिए अब इसे महंगे दामों पर खरीद लिया है। इसके चलते हालात ये बन गए हैं कि सब्सिडी वाली 2560 यूनिट में से किसान छह दिन में केवल 60 यूनिट लेकर गए हैं। अगर यही हालात रहे तो कृषि विभाग के अधिकारी इसे वापस मुख्यालय को सरेंडर करेंगे।
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प्रति एकड़ किसानों को 250 रुपये का नुकसान
खरपतवार नाशक वेस्ता दवा की खरीद पर किसानों को प्रति एकड़ 250 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। विभाग द्वारा बिना सब्सिडी पर वेस्ता दवा की एक यूनिट 520 रुपये में किसानों को बेची गई है। जबकि अब यह सब्सिडी पर आ गई है तो किसानों को इसके दाम कम कर 470 रुपये प्रति यूनिट दी जा रही है। जिसमें भी 200 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।
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माइक्रो न्यूट्रेंट भी पहुंची लेट
गेहूं बिजाई से पहले जमीन में डाले जाने वाली माइक्रो न्यूट्रेंट बिजाई के समय किसानों को उपलब्ध नहीं करवाए गए। किसानों ने इनके बिना बिजाई कर दी तो विभाग के स्टोर में एक माह बाद पहुंच गए। विभाग के स्टोर में खेप के ढेर लगे देखकर कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को इसके अब प्रयोग के लिए मोटिवेट करने में जुट गए। किसान अगर अब इसका छिड़काव करते हैं तो उनका प्रति एकड़ के हिसाब से 200 रुपये खर्च बढ़ जाएगा। वहीं, अब फसल में इसका फायदा भी कम होगा। विभाग द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले माइक्रो न्यूट्रेंट में जिंक, सल्फेट, मैग्नीस सल्फेट, फैरस सल्फेट शामिल हैं।
ये बोले किसान
1. जहांगीरपुर निवासी किसान ओमप्रकाश ने बताया कि गेहूं में खरपतवार नाशक दवा डालनी थी। इसके लिए वह सरकारी खाद-बीज की दुकान पर गया था। लेकिन उसे सब्सिडी वाली दवा नहीं दी गई, जबकि स्टोर में दवा बड़े पैमाने पर मौजूद है।
2. दुबलधन माजरा निवासी नरेश कुमार ने बताया कि रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसान दवा लेने नहीं आ रहे। ऐसे में उन्हें सब्सिडी वाली दवा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। विभाग के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे। उन्हें पूर्व में भी बिना सब्सिडी पर ही दवा दी गई।
हर कदम पर किसानों के साथ छल: बैनीवाल
कृषि विभाग किसानों पर दोहरी मार डाल रहा है। विभाग के द्वारा किसानों के साथ हर कदम पर छल किया जा रहा है। बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग के द्वारा जानबूझकर दवाओं को लेट किया जा रहा है। सब्सिडी के लिए ऑनलाइन की बजाए, ऑफलाइन कार्य किया जाना चाहिए। ताकि किसान की पहुंच में यह हो सके।
वर्जन
विभाग के मुख्यालय से ही दवा लेट आई है। अभी केवल रजिस्ट्रेशन वाले किसानों को ही देने के आदेश हैं। अगर परमिट पर देने के आदेश मिले तो किसानों को सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। वहीं, अगर सब्सिडी वाली दवा स्टॉक में रहती है तो वापस भेज दी जाएगी।
- बालकृष्ण, उपप्रबंधक, एचएलआरडीसी।
वर्जन
दवा पहुंचने की जानकारी किसानों को नहीं मिलने के कारण सब्सिडी वाली दवा का स्टॉक अभी बचा हुआ है। किसानों तक इसकी ेजानकारी पहुंचाई जाएगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के आदेश विभाग के मुख्यालय से आए हैं।
- रोहताश, डीडीए, झज्जर।