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यूनियन ने किया चक्का जाम तो दो रूट पर बनी सहमति
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
रोडवेज यूनियनों के द्वारा समितियों की बसों के साथ चल रहे टाइम टेबल विवाद को लेकर चक्का जाम कर दिया। यूनियनों के द्वारा 12 सितंबर को ही इस बारे में घोषणा कर दी गई थी, जिसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप कर निपटाने का प्रयास नहीं किया। जिसके चलते यूनियन नेताओं ने वीरवार को सुबह सवा 4 बजे डिपो की पहली बस को रोककर चक्का जाम की घोषणा कर सभी बसें रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी करवा दी। वहीं, समितियों की बसों को भी बस स्टैंड में नहीं घुसने दिया गया। जिसके चलते निजी समितियों की बसें शहीद भगत सिंह चौक, धौड़ चौक व जहांआरा बाग स्टेडियम चौक से संचालित की गई। इससे पुलिस प्रशासन को यातायात नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जिसके बाद आरटीए का कार्यभार संभाल रही एडीसी आमना तस्नीम ने शाम करीब सवा 4 बजे यूनियन नेताओं को अपने कार्यालय में बुलाया। मीटिंग सफल रहने पर करीब सवा पांच 5 बजे रोडवेज यूनियनों ने चक्का जाम खोला। जीएम लेखराज ने बताया कि बैठक में रोहतक और गुड़गांव दो रूटों के टाइम टेबल पर सहमति बनी है। जबकि तीन रूटों के टाइम टेबल के लिए एडीसी ने नए आरटीए से मुलाकात करने के लिए कहा है।
ये है विवाद
रोडवेज और निजी बस संचालकों के बीच पिछले काफी समस से टाइम टेबल को लेकर विवाद चल रहा है। यूनियन नेता पांच रूटों के टाइम टेबल पर एतराज जता रहे हैं। जिनके अनुसार बहादुरगढ़, ढांसा बार्डर, रेवाड़ी, रोहतक, गुड़गांव के रूट पर रोडवेज से अधिक समय निजी बसों को दिया गया है। इसके चलते रोडवेज को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रूटों के समय को रिवाइज करने लिए आरटीए को यूनियनों के द्वारा पत्र लिखा गया था। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। जिस पर यूनियनों ने 12 सितंबर को घोषणा करते हुए कहा कि था कि अगर 14 सितंबर तक टाइम टेबल बदला नहीं गया तो डिपो में चक्का जाम कर दिया जाएगा।
यात्रियों को हुई परेशानी
चक्का जाम की घोषणा के चलते यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्र में सुबह रोडवेज बसें नहीं पहुंची तो छात्र समय वा स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच सके। वहीं, उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी कि आज बसें क्यों नहीं चल रही। वहीं दूसरी और अस्पताल व बाजार में आने वाले ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी काफी तकलीफ का सामना करना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर निजी बसों के संचालकों को भी दिक्कतें उठानी पड़ी। क्योंकि उनकी बसों को रोडवेज यूनियनों के सदस्यों ने बस स्टैंड के गेट से भी नहीं चलने दिया।
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वर्जन
टाइम टेबल को लेकर आरटीए से काफी बार पत्राचार किया जा चुका था। लेकिन समितियों के टाइम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा था। जिसके चलते उन्होंने 12 सितंबर को नोटिस दिया था कि 14 सितंबर तक समय में तब्दीली नहीं की गई तो चक्का जाम किया जाएगा। प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी तो चक्का जाम किया गया।
- प्रवीन डीघल, प्रदेश सचिव, एसकेएस।
- एडीसी के साथ बैठक कर शाम सवा 5 बजे खत्म की हड़ताल
- पांच रूटों पर निजी बसों के साथ टाइम टेबल पर चल रहा था विवाद
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झज्जर।
रोडवेज यूनियनों के द्वारा समितियों की बसों के साथ चल रहे टाइम टेबल विवाद को लेकर चक्का जाम कर दिया। यूनियनों के द्वारा 12 सितंबर को ही इस बारे में घोषणा कर दी गई थी, जिसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप कर निपटाने का प्रयास नहीं किया। जिसके चलते यूनियन नेताओं ने वीरवार को सुबह सवा 4 बजे डिपो की पहली बस को रोककर चक्का जाम की घोषणा कर सभी बसें रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी करवा दी। वहीं, समितियों की बसों को भी बस स्टैंड में नहीं घुसने दिया गया। जिसके चलते निजी समितियों की बसें शहीद भगत सिंह चौक, धौड़ चौक व जहांआरा बाग स्टेडियम चौक से संचालित की गई। इससे पुलिस प्रशासन को यातायात नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जिसके बाद आरटीए का कार्यभार संभाल रही एडीसी आमना तस्नीम ने शाम करीब सवा 4 बजे यूनियन नेताओं को अपने कार्यालय में बुलाया। मीटिंग सफल रहने पर करीब सवा पांच 5 बजे रोडवेज यूनियनों ने चक्का जाम खोला। जीएम लेखराज ने बताया कि बैठक में रोहतक और गुड़गांव दो रूटों के टाइम टेबल पर सहमति बनी है। जबकि तीन रूटों के टाइम टेबल के लिए एडीसी ने नए आरटीए से मुलाकात करने के लिए कहा है।
ये है विवाद
रोडवेज और निजी बस संचालकों के बीच पिछले काफी समस से टाइम टेबल को लेकर विवाद चल रहा है। यूनियन नेता पांच रूटों के टाइम टेबल पर एतराज जता रहे हैं। जिनके अनुसार बहादुरगढ़, ढांसा बार्डर, रेवाड़ी, रोहतक, गुड़गांव के रूट पर रोडवेज से अधिक समय निजी बसों को दिया गया है। इसके चलते रोडवेज को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रूटों के समय को रिवाइज करने लिए आरटीए को यूनियनों के द्वारा पत्र लिखा गया था। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। जिस पर यूनियनों ने 12 सितंबर को घोषणा करते हुए कहा कि था कि अगर 14 सितंबर तक टाइम टेबल बदला नहीं गया तो डिपो में चक्का जाम कर दिया जाएगा।
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यात्रियों को हुई परेशानी
चक्का जाम की घोषणा के चलते यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्र में सुबह रोडवेज बसें नहीं पहुंची तो छात्र समय वा स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच सके। वहीं, उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी कि आज बसें क्यों नहीं चल रही। वहीं दूसरी और अस्पताल व बाजार में आने वाले ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी काफी तकलीफ का सामना करना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर निजी बसों के संचालकों को भी दिक्कतें उठानी पड़ी। क्योंकि उनकी बसों को रोडवेज यूनियनों के सदस्यों ने बस स्टैंड के गेट से भी नहीं चलने दिया।
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टाइम टेबल को लेकर आरटीए से काफी बार पत्राचार किया जा चुका था। लेकिन समितियों के टाइम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा था। जिसके चलते उन्होंने 12 सितंबर को नोटिस दिया था कि 14 सितंबर तक समय में तब्दीली नहीं की गई तो चक्का जाम किया जाएगा। प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी तो चक्का जाम किया गया।
- प्रवीन डीघल, प्रदेश सचिव, एसकेएस।
- एडीसी के साथ बैठक कर शाम सवा 5 बजे खत्म की हड़ताल
- पांच रूटों पर निजी बसों के साथ टाइम टेबल पर चल रहा था विवाद