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‘मौत की लाइन’ से 20 हजार लोगों को मिलेगी निजात
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चरखी दादरी। हाईटेंशन लाइन की समस्या से जिले की बीस हजार की आबादी को जल्द निजात मिलने वाली है। निगम ने जिले में 125 डेंजर प्वाइंट चिह्नित कर हाईटेंशन लाइन हटाने का काम शुरू कर दिया है। इसमें शहर के 100 जगह तो गांवों में 25 जगह डेंजर प्वाइंट चिह्नित किए हैं। मौत की लाइन को हटाने के लिए पहले चरण में खंभे गाड़े जा रहे हैं। चार करोड़ का यह प्रोजेक्ट आगामी छह माह के अंदर पूरा होने की उम्मीद है। वर्तमान में आवासीय बस्तियों, मकानाें, प्रतिष्ठानों और शिक्षण संस्थानों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। कई परिवारों को दर्द दे चुकी हाईटेंशन लाइन का खौफ लोगों के दिलों में घर कर गया है। वर्तमान में लोग किसी आशंका के डर से इसके आसपास जाने से भी गुरेज करते हैं। कई जगह स्कूल भवनों के ऊपर से भी यह लाइन गुजर रही है। गांवों में तालाबों के ऊपर से भी लाइन गुजरने पर विकट समस्या बनी हुई है। मंदिर, धर्मशाला आदि सार्वजनिक स्थानों से गुजरने वाली लाइन सर्वाधिक परेशानी का कारण है। शहर में हाई वोल्टेज लाइन सैकड़ों मकानों के ऊपर से गुजर रही है। लोहारू रोड के दाहिनी तरफ बस्ती के ऊपर से लाइन गुजर रही है। शहर की प्रेम नगर कॉलोनी, एमसी कॉलोनी, प्रोफेसर कॉलोनी, ढाणी रोड एरिया, दिल्ली रोड एरिया, गांधी नगर एरिया सहित कई गांवों में हाई वोल्टेज की तारों से समस्या बनी हुई है। प्रेमनगर कॉलोनी में तो एक लाख वोल्टेज की लाइन मकानों के ऊपर से गुजर रही है।
कुछ साइट पर गाड़े जा चुके हैं खंभे
बिजली निगम का हेड ऑफिस इस काम को खुद अपने स्तर पर करवा रहा है। इस काम को शुरू करने केेे वर्क ऑर्डर हो गए हैं। कुछ प्वाइंटों पर तो बिजली निगम ने का भी शुरू कर दिया है। इसके तहत सबसे पहले आवासीय बस्ती के ऊपर से गुजरने वाली हाई वॉल्टेज की तारों को हटवाया जाएगा। इस काम पूरा होने पर काफी हद तक लोगों को राहत मिल सकेगी। हादसों का खतरा खत्म हो जाएगा। निगम के ठेकेदार ने कुछ साइटों पर खंभे भी खड़े कर दिए हैं।
अधिकारी, विधायक और मंत्रियों से भी लगाई है कई बार गुहार
हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने की मांग बहुत पुरानी है। लोगों ने बताया कि मकानों, शिक्षण संस्थानों, अन्य प्रतिष्ठानों के ऊपर से गुजरने वाली तार के चलते वे न तो खुद छत पर जाते हैं और न बच्चों को जाने देते हैं। इस संबंध में वे निगम के अधिकारियों से लेकर विधायक और मंत्रियों तक भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन इसके बाद भी काफी समय तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई। हाईटेंशन लाइन का मुद्दा अमर उजाला ने समय-समय पर प्रमुखता से उठाया है। अमर उजाला विगत तीन सालों में इस मुद्दे पर आठ से दस खबर प्रकाशित कर चुका है। 12 नवंबर 2018 के और पांच फरवरी 2019 के संस्करण में भी अमर उजाला ने इस पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।
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छह हजार घरों के ऊपर से गुजर रही है लाइन
निगम के अनुसार जिले में 125 जगहों पर हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट किया जाएगा। एक प्वाइंट की लाइन करीब 50 घरों के ऊपर से गुजरती है। इस लिहाज से 125 जगहों पर करीब छह हजार से ज्यादा घरों के ऊपर से लाइन गुजरती है। इन छह हजार घरों की आबादी करीब बीस हजार के पार है। इनमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं।
हाईटेंशन लाइन से इनको मिला दर्द
केस -एक : करीब पांच साल पहले चंपापुरी की गली नंबर आठ निवासी निशा सात वर्ष की उम्र में छत पर खेलते समय हाईटेंशन की चपेट में आ गई। इस हादसे में उसका एक हाथ और दोनों पांव बुरी तरह झुलस गए थे। उपचार के दौरान चिकित्सकों को उसका एक हाथ काटना पड़ा था।
केस -दो : चंपापुरी निवासी राममेहर ने बताया कि उसका बेटा राजेश दिल्ली पुलिस में कार्यरत है। करीब पांच साल पहले उसका बेटा और बेटी छत पर खेल रहे थे। जब राजेश उन्हें नीचे लाने गया तो अचानक हाईटेंशन की चपेट में आ गया। वहां मौजूद उसकी बहन ने धक्का दिया तो वह भी थोड़ी झुलस गई थी।
केस - तीन : वार्ड एक की गली नंबर तीन में किरयाणा स्टोर चलाने वाले सीताराम को भी करीब डेढ़ साल पहले करंट से मौत हो गई थी। मृतक के भाई राधेश्याम ने बताया कि वह नलका ठीक कर रहा था। इसी दौरान नलके की लोहे की रॉड ऊपर से गुजर रही तार को छू गई थी। इस हादसे में सीताराम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
कोट
इस प्रोजेक्ट के वर्क ऑर्डर हो गए हैं। कुछ स्थानों पर तो काम भी शुरू कर दिया है। सबसे पहले आवासीय बस्ती के ऊपर से गुजरने वाली तारों को हटाया जाएगा। इसके लिए नए खंभे और तार लगाई जानी हैं। - जयप्रकाश घणघण, एसडीओ, बिजली निगम
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कुछ साइट पर गाड़े जा चुके हैं खंभे
बिजली निगम का हेड ऑफिस इस काम को खुद अपने स्तर पर करवा रहा है। इस काम को शुरू करने केेे वर्क ऑर्डर हो गए हैं। कुछ प्वाइंटों पर तो बिजली निगम ने का भी शुरू कर दिया है। इसके तहत सबसे पहले आवासीय बस्ती के ऊपर से गुजरने वाली हाई वॉल्टेज की तारों को हटवाया जाएगा। इस काम पूरा होने पर काफी हद तक लोगों को राहत मिल सकेगी। हादसों का खतरा खत्म हो जाएगा। निगम के ठेकेदार ने कुछ साइटों पर खंभे भी खड़े कर दिए हैं।
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अधिकारी, विधायक और मंत्रियों से भी लगाई है कई बार गुहार
हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने की मांग बहुत पुरानी है। लोगों ने बताया कि मकानों, शिक्षण संस्थानों, अन्य प्रतिष्ठानों के ऊपर से गुजरने वाली तार के चलते वे न तो खुद छत पर जाते हैं और न बच्चों को जाने देते हैं। इस संबंध में वे निगम के अधिकारियों से लेकर विधायक और मंत्रियों तक भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन इसके बाद भी काफी समय तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई। हाईटेंशन लाइन का मुद्दा अमर उजाला ने समय-समय पर प्रमुखता से उठाया है। अमर उजाला विगत तीन सालों में इस मुद्दे पर आठ से दस खबर प्रकाशित कर चुका है। 12 नवंबर 2018 के और पांच फरवरी 2019 के संस्करण में भी अमर उजाला ने इस पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।
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छह हजार घरों के ऊपर से गुजर रही है लाइन
निगम के अनुसार जिले में 125 जगहों पर हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट किया जाएगा। एक प्वाइंट की लाइन करीब 50 घरों के ऊपर से गुजरती है। इस लिहाज से 125 जगहों पर करीब छह हजार से ज्यादा घरों के ऊपर से लाइन गुजरती है। इन छह हजार घरों की आबादी करीब बीस हजार के पार है। इनमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं।
हाईटेंशन लाइन से इनको मिला दर्द
केस -एक : करीब पांच साल पहले चंपापुरी की गली नंबर आठ निवासी निशा सात वर्ष की उम्र में छत पर खेलते समय हाईटेंशन की चपेट में आ गई। इस हादसे में उसका एक हाथ और दोनों पांव बुरी तरह झुलस गए थे। उपचार के दौरान चिकित्सकों को उसका एक हाथ काटना पड़ा था।
केस -दो : चंपापुरी निवासी राममेहर ने बताया कि उसका बेटा राजेश दिल्ली पुलिस में कार्यरत है। करीब पांच साल पहले उसका बेटा और बेटी छत पर खेल रहे थे। जब राजेश उन्हें नीचे लाने गया तो अचानक हाईटेंशन की चपेट में आ गया। वहां मौजूद उसकी बहन ने धक्का दिया तो वह भी थोड़ी झुलस गई थी।
केस - तीन : वार्ड एक की गली नंबर तीन में किरयाणा स्टोर चलाने वाले सीताराम को भी करीब डेढ़ साल पहले करंट से मौत हो गई थी। मृतक के भाई राधेश्याम ने बताया कि वह नलका ठीक कर रहा था। इसी दौरान नलके की लोहे की रॉड ऊपर से गुजर रही तार को छू गई थी। इस हादसे में सीताराम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
कोट
इस प्रोजेक्ट के वर्क ऑर्डर हो गए हैं। कुछ स्थानों पर तो काम भी शुरू कर दिया है। सबसे पहले आवासीय बस्ती के ऊपर से गुजरने वाली तारों को हटाया जाएगा। इसके लिए नए खंभे और तार लगाई जानी हैं। - जयप्रकाश घणघण, एसडीओ, बिजली निगम