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अवार्ड राशि में संशोधन के लिए कमेटी गठित, डीआरओ को दी शक्तियां
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चरखी दादरी। एनएच-152 डी के लिए अधिग्रहीत जमीन की अवार्ड राशि में संशोधन के लिए जिला उपायुक्त मुकेश आहूजा की रिपोर्ट के आधार पर डीआरओ को शक्तियां प्रदान कर दी गई हैं। संशोधन की रिपोर्ट तैयार करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। सीटीएम विरेंद्र सिंह को इसका चेयरमैन बनाया गया है। इस कमेटी को जल्द रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। वहीं, धरने पर बैठे किसान वीरवार को प्रदेश में 29 जगहों पर रेल रोकने के फैसले पर अडिग हैं। इसे देखकर जिला प्रशासन ने धारा-144 लागू कर दी है। इसके अलावा लॉ एंड ऑर्डर को कायम रखने के लिए चार जिलों से पुलिस फोर्स भी चरखी दादरी पहुंच चुकी है। दादरी जिले में बनवाए जा रहे ग्रीन कॉरिडोर मामले में जिला उपायुक्त मुकेश आहूजा ने राज्य सरकार को रिपोर्ट व सिफारिश भेजी थी। इसके आधार पर जिला राजस्व अधिकारी सुखबीर सिंह को जमीन अधिग्रहण के संशोधित रेट निर्धारित करने की शक्तियां प्रदान कर दी गई हैं। जिले के 17 गांवों की अधिग्रहीत जमीन के अब नए रेट निर्धारित होंगे, जिनके आधार पर भूमि मालिकों के लिए नया अवार्ड घोषित किया जाएगा। राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त केसनी आनंद अरोड़ा ने दादरी जिला के राजस्व अधिकारी सुखबीर सिंह को पत्र क्रमांक 1180- आर-5/6681 में नए रेट निर्धारित करने के लिए आदेश जारी किए हैं। जिला राजस्व अधिकारी ने पत्र की प्राप्ति के तुरंत बाद इस पर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ से जयपुर की दूरी को कम करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ग्रीन कॉरिडोर के नाम से एनएच 152डी राजमार्ग का निर्माण करवाने जा रहा है। इस ग्रीन कॉरिडोर के लिए दादरी के 17 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जमीन के लिए 18 जनवरी 2019 व 26 फरवरी 2019 को अवार्ड घोषित किया गया था, जिसके आधार पर 17 गांवों के जमीन मालिकों को मुआवजा दिया जाना था। दोनों अवार्ड से ग्रामीण खुश नहीं थे।
इस मामले में दादरी उपायुक्त से ग्रामीणों की बैठकें भी हो चुकी हैं। लोकसभा चुनाव के बाद उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने इस पूरे प्रकरण को ध्यान से सुना और कानूनी प्रावधान एवं पूरे तथ्यों को ध्यान में रखकर ते हुए ाज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट भिजवाई, जिसमें किसानों के लिए नई सिफारिशें की गई। उपायुक्त ने 21 जून, 2019 को पत्र क्रमांक 488/ कैंप/एमबी के माध्यम से ये रिपोर्ट भिजवाई थी। राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ने उपायुक्त की सिफारिशों को मान लिया है और इस आधार पर जिला राजस्व अधिकारी को संशोधित दरें निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से पहले ही इस मामले में राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए सक्षम करार दिया जा चुका है।
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उपायुक्त ने यूं ठहराया पूर्व अवार्ड राशि को गलत
गांव बौंदकलां, बौंद खुर्द, रानीला, भागेश्वरी, झिंझर, खातीवास, समसपुर, दादरी, ढाणी फौगाट, टिकान कलां, कपूरी रामनगर, मौड़ी, बलकरा, मकड़ानी, मकड़ाना, दातौली व चिड़िया के किसानों की जमीन के पूर्व में घोषित दो अवार्ड को उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में तर्कसंगत व व्यवहारिक नहीं माना और नए सिरे से सारे तथ्यों का संकलन कर अपनी अनुशंसाएं तैयार कीं। इसमें विशेष तथ्य यह है कि वर्ष 2013-14 के बाद दादरी क्षेत्र के लिए कलेक्टर रेटों में कोई संशोधन नहीं किया गया था। इसके अलावा 18 जनवरी को घोषित अवार्ड में एक ही पट्टी पर पड़ने वाले गांवों को साढ़े नौ लाख से 42 लाख तक व 26 फरवरी को एक माह बाद घोषित अवार्ड में 10.45 लाख से पचास लाख तक का मुआवजा देने की सूचना जारी की गई। एक माह में और एक ही सीमा रेखा में आने वाली जमीन की दरों में इतना अंतर नहीं हो सकता।
क्या है मामला
ज्ञात रहे कि गंगहेडी से इस्माइलाबाद तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। यह ग्रीन कॉरिडोर चरखी दादरी जिले से भी होकर गुजरेगा। इसके लिए 17 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जानी है। जमीन की मौजूदा अवार्ड राशि से किसान संतुष्ट नहीं हैं। चरखी दादरी के अलावा जींद जिले के किसान अवार्ड राशि में संशोधन की मांग कर रहे हैं। चरखी दादरी में किसानों का धरना गत 26 फरवरी से लगातार जारी है। गत 12 जून को सीएम की मौजूदगी में दोनों जिलों के किसानों के प्रतिनिधिमंडल से केंद्रिय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की वार्ता भी हुई थी। इसमें तय हुआ था कि प्रदेश सरकार अवार्ड राशि का संशोधित प्रपोजल भेजेगी।
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उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ से जयपुर की दूरी को कम करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ग्रीन कॉरिडोर के नाम से एनएच 152डी राजमार्ग का निर्माण करवाने जा रहा है। इस ग्रीन कॉरिडोर के लिए दादरी के 17 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जमीन के लिए 18 जनवरी 2019 व 26 फरवरी 2019 को अवार्ड घोषित किया गया था, जिसके आधार पर 17 गांवों के जमीन मालिकों को मुआवजा दिया जाना था। दोनों अवार्ड से ग्रामीण खुश नहीं थे।
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इस मामले में दादरी उपायुक्त से ग्रामीणों की बैठकें भी हो चुकी हैं। लोकसभा चुनाव के बाद उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने इस पूरे प्रकरण को ध्यान से सुना और कानूनी प्रावधान एवं पूरे तथ्यों को ध्यान में रखकर ते हुए ाज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट भिजवाई, जिसमें किसानों के लिए नई सिफारिशें की गई। उपायुक्त ने 21 जून, 2019 को पत्र क्रमांक 488/ कैंप/एमबी के माध्यम से ये रिपोर्ट भिजवाई थी। राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ने उपायुक्त की सिफारिशों को मान लिया है और इस आधार पर जिला राजस्व अधिकारी को संशोधित दरें निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से पहले ही इस मामले में राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए सक्षम करार दिया जा चुका है।
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उपायुक्त ने यूं ठहराया पूर्व अवार्ड राशि को गलत
गांव बौंदकलां, बौंद खुर्द, रानीला, भागेश्वरी, झिंझर, खातीवास, समसपुर, दादरी, ढाणी फौगाट, टिकान कलां, कपूरी रामनगर, मौड़ी, बलकरा, मकड़ानी, मकड़ाना, दातौली व चिड़िया के किसानों की जमीन के पूर्व में घोषित दो अवार्ड को उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में तर्कसंगत व व्यवहारिक नहीं माना और नए सिरे से सारे तथ्यों का संकलन कर अपनी अनुशंसाएं तैयार कीं। इसमें विशेष तथ्य यह है कि वर्ष 2013-14 के बाद दादरी क्षेत्र के लिए कलेक्टर रेटों में कोई संशोधन नहीं किया गया था। इसके अलावा 18 जनवरी को घोषित अवार्ड में एक ही पट्टी पर पड़ने वाले गांवों को साढ़े नौ लाख से 42 लाख तक व 26 फरवरी को एक माह बाद घोषित अवार्ड में 10.45 लाख से पचास लाख तक का मुआवजा देने की सूचना जारी की गई। एक माह में और एक ही सीमा रेखा में आने वाली जमीन की दरों में इतना अंतर नहीं हो सकता।
क्या है मामला
ज्ञात रहे कि गंगहेडी से इस्माइलाबाद तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। यह ग्रीन कॉरिडोर चरखी दादरी जिले से भी होकर गुजरेगा। इसके लिए 17 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जानी है। जमीन की मौजूदा अवार्ड राशि से किसान संतुष्ट नहीं हैं। चरखी दादरी के अलावा जींद जिले के किसान अवार्ड राशि में संशोधन की मांग कर रहे हैं। चरखी दादरी में किसानों का धरना गत 26 फरवरी से लगातार जारी है। गत 12 जून को सीएम की मौजूदगी में दोनों जिलों के किसानों के प्रतिनिधिमंडल से केंद्रिय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की वार्ता भी हुई थी। इसमें तय हुआ था कि प्रदेश सरकार अवार्ड राशि का संशोधित प्रपोजल भेजेगी।