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गोवंशों पर भारी पड़ी श्राद्घों का अमावस्या, 14 की मौत, 6 पशु अस्पताल भेजीं
Updated Thu, 11 Oct 2018 01:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। श्राद्धों की अमावस्या एक बार फिर से क्षेत्र के गोवंश पर भारी पड़ी। बार-बार लोगों से अपील करने के बाद भी गो-ग्रास के नाम पर इन्हें तले हुए व्यंजन दिए गए और इन्हें पचा न पाने पर 14 गायों की मौत हो गई। मृत गोवंशों को बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ के सदस्यों और गोभक्तों ने जेसीबी एवं टैक्टर-ट्रॉली की सहायता से उठाकर नगर के बाहर खेतों में मिट्टी दी गई।
गोभक्त रिंपी फौगाट ने बताया कि इस तरह से अपने पूवर्जों को श्रद्धा प्रदान करने के चक्कर में कहीं न कहीं लोग देवी-देवताओं का निवास मानें जाने वाली गो माता की हत्या में भागीदारी बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने श्राद्धों की अमावस्या पर गायों को केवल हरा चारा व ऐसे पदार्थ ही देने की अपील की थी जिन्हें गोवंश पचा सकें। बुधवार सुबह ही क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से नागरिकों द्वारा उन्हें फोन पर मृत गायों की सूचना उनकी टीम को मिली। इसके बाद इन सभी जगहों पर टीम पहुंची तो 14 गायें मृत मिली जबकि 5 गायों को मौके पर प्राथमिक उपचार देने के बाद कमोद स्थित बाबा न्याराम दास वेलफेयर सोसायटी संचालित पशु अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया गया। इसके अलावा 6 गाय मौके पर ही इलाज मिलने से ठीक हो गईं। रिंपी ने बताया कि ये सिलसिला अभी थमा नहीं है बल्कि देर शाम तक मोबाइल के जरिये नागरिकों द्वारा मृत गायों की सूचना उन्हें मिल रही है। मृत गायों को मिट्टी देने में अजय, मंजीत, संजय चाहार, आशीष चौहान, भगत सिंह, दीपक वाल्मीकि, रामफल फौगाट, महेंद्र जेई, श्याम सुंदर भागवी, दिनेश शर्मा, आकाश सैनी, सुरेश, मनोज सिंगला, मोहित, मास्टर दिनेश डाडू व अन्य गोभक्त मौजूद रहे।
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चरखी दादरी। श्राद्धों की अमावस्या एक बार फिर से क्षेत्र के गोवंश पर भारी पड़ी। बार-बार लोगों से अपील करने के बाद भी गो-ग्रास के नाम पर इन्हें तले हुए व्यंजन दिए गए और इन्हें पचा न पाने पर 14 गायों की मौत हो गई। मृत गोवंशों को बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ के सदस्यों और गोभक्तों ने जेसीबी एवं टैक्टर-ट्रॉली की सहायता से उठाकर नगर के बाहर खेतों में मिट्टी दी गई।
गोभक्त रिंपी फौगाट ने बताया कि इस तरह से अपने पूवर्जों को श्रद्धा प्रदान करने के चक्कर में कहीं न कहीं लोग देवी-देवताओं का निवास मानें जाने वाली गो माता की हत्या में भागीदारी बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने श्राद्धों की अमावस्या पर गायों को केवल हरा चारा व ऐसे पदार्थ ही देने की अपील की थी जिन्हें गोवंश पचा सकें। बुधवार सुबह ही क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से नागरिकों द्वारा उन्हें फोन पर मृत गायों की सूचना उनकी टीम को मिली। इसके बाद इन सभी जगहों पर टीम पहुंची तो 14 गायें मृत मिली जबकि 5 गायों को मौके पर प्राथमिक उपचार देने के बाद कमोद स्थित बाबा न्याराम दास वेलफेयर सोसायटी संचालित पशु अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया गया। इसके अलावा 6 गाय मौके पर ही इलाज मिलने से ठीक हो गईं। रिंपी ने बताया कि ये सिलसिला अभी थमा नहीं है बल्कि देर शाम तक मोबाइल के जरिये नागरिकों द्वारा मृत गायों की सूचना उन्हें मिल रही है। मृत गायों को मिट्टी देने में अजय, मंजीत, संजय चाहार, आशीष चौहान, भगत सिंह, दीपक वाल्मीकि, रामफल फौगाट, महेंद्र जेई, श्याम सुंदर भागवी, दिनेश शर्मा, आकाश सैनी, सुरेश, मनोज सिंगला, मोहित, मास्टर दिनेश डाडू व अन्य गोभक्त मौजूद रहे।
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