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पाटौदा विवाद: एसडीएम ने बुलाए दोनों पक्ष, लेकिन नहीं बनी बात
Updated Sat, 17 Feb 2018 01:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
पाटौदा गांव में स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम की प्रतिमा खंडित किए जाने से शुरू हुआ विवाद सुलझने की बजाए उलझता जा रहा है। शुक्रवार को भी प्रशासनिक अधिकारियों ने विवाद को निपटाने के लिए प्रयास किए, लेकिन विवाद नहीं सुलझ पाया। जिसके बाद अब विवाद सुलझाने के लिए रविवार को सामाजिक तौर पर प्रयास हो सकते हैं।
एसडीएम रोहित यादव ने पाटौदा गांव के दोनों पक्षों को अपने कार्यालय में बुुलाया था। जहां पर राजपूत समाज के महेश चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब गलती दो युवकों ने की थी तो कमेटी के द्वारा पूरे गांव के राजपूत समाज को दंड किए जाने का क्या औचित्य था, इससे सामाजिक तौर पर उनका अपमान करने का प्रयास किया गया है। चौहान ने कहा कि उनके दो लोगों को कमेटी में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें भी कमेटी ने फैसला लेने के दौरान साइड कर दिया। प्रत्येक घर पर एक रुपया जुर्माना लगाकर राजपूत समाज को नीचा दिखाया गया है, अगर फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे कोर्ट में जाएंगे।
वहीं, दूसरे पक्ष के बीर सिंह यादव ने कहा कि फैसला लेने वाले कमेटी में सर्व समाज के लोग शामिल किए गए थे। यह फैसला यादव समाज के द्वारा नहीं बल्कि पूरे गांव के द्वारा चुने गए लोगों ने लिया था। एसडीएम रोहित यादव ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो ऐसे में पंचायत को इस प्रकार के फैसले नहीं देने चाहिए।
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झज्जर।
पाटौदा गांव में स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम की प्रतिमा खंडित किए जाने से शुरू हुआ विवाद सुलझने की बजाए उलझता जा रहा है। शुक्रवार को भी प्रशासनिक अधिकारियों ने विवाद को निपटाने के लिए प्रयास किए, लेकिन विवाद नहीं सुलझ पाया। जिसके बाद अब विवाद सुलझाने के लिए रविवार को सामाजिक तौर पर प्रयास हो सकते हैं।
एसडीएम रोहित यादव ने पाटौदा गांव के दोनों पक्षों को अपने कार्यालय में बुुलाया था। जहां पर राजपूत समाज के महेश चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब गलती दो युवकों ने की थी तो कमेटी के द्वारा पूरे गांव के राजपूत समाज को दंड किए जाने का क्या औचित्य था, इससे सामाजिक तौर पर उनका अपमान करने का प्रयास किया गया है। चौहान ने कहा कि उनके दो लोगों को कमेटी में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें भी कमेटी ने फैसला लेने के दौरान साइड कर दिया। प्रत्येक घर पर एक रुपया जुर्माना लगाकर राजपूत समाज को नीचा दिखाया गया है, अगर फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे कोर्ट में जाएंगे।
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वहीं, दूसरे पक्ष के बीर सिंह यादव ने कहा कि फैसला लेने वाले कमेटी में सर्व समाज के लोग शामिल किए गए थे। यह फैसला यादव समाज के द्वारा नहीं बल्कि पूरे गांव के द्वारा चुने गए लोगों ने लिया था। एसडीएम रोहित यादव ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो ऐसे में पंचायत को इस प्रकार के फैसले नहीं देने चाहिए।
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