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शॉर्ट सर्किट से तीन गांवों की सीमा पर 11 किसानों की 51 एकड़ गेहूं की फसल जली
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झज्जर। सोमवार को डीघल, मदाना व छोछी गांवों की सीमा पर स्थित खेतों में बिजली की तारों में हुई शॉर्ट सर्किट से किसानों की करीब 51 एकड़ गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई। सूचना के बाद दमकल केंद्र की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची और चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इससे पहले किसानों ने भी आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन आग बेकाबू होती गई और एक के बाद एक खेत में फैलती गई। देखते ही देखते 11 किसानों की 51 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। किसानों ने कहा कि उन्होंने अपने परिवारों का पालन पोषण करने के लिए गेहूं की फसल बोई थी। लेकिन जब फसल पक कर तैयार हुई तो बिजली की एक चिंगारी ने उनके सपनों को राख कर दिया। बड़ी मेहनत से तैयार की गई फसल पल भर में उनकी आंखों के सामने जलकर राख हो गई। किसानों ने सरकार से उन्हें मुआवजा देने की मांगी की है।
इन किसानों को हुआ नुकसान
डीघल, छोछी व मदना गांव की सीमा पर लगी आग से जयपाल की छह एकड़, तारीफ सिंह की साढ़े चार एकड़, सतीश की एक, जयभगवान की पांच, कृष्ण की सात, भूपन की चार, ओम प्रकाश की 11, अनूप की एक, बेगराज की एक, सुरेश की तीन व सत्यवान की आठ एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। बिजली के तारों से निकली चिंगारी के कारण फसल में लगी आग देखकर उसे काबू करने के लिए किसानों ने ट्यूबवेल आदि चलाकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन तापमान अधिक होने व हवाएं चलने के कारण आग बेकाबू होती गई। इसी बीच किसानों ने फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी। लेकिन जब तक दमकल केंद्र की गाड़ी मौके पर पहुंची उस समय तक काफी फसल चलकर राख हो चुकी थी।
बिना अनुबंध के काम कर रहे कच्चे कर्मचारी
दमकल विभाग में कर्मचारियों की कमी खल रही है। कच्चे कर्मचारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। इन कच्चे कर्मचारियों के अनुबंध की समय सीमा भी आठ अप्रैल को पूरी हो चुकी है। करीब 25 दिन से आपातकालीन सेवाएं होने के कारण व विभाग से मंजूरी मिलने के इंतजार में कच्चे कर्मचारी बिना मंजूरी के ही काम कर रहे हैं। लेकिन दमकल विभाग की लापरवाही के कारण इन कर्मचारियों का अनुबंध नहीं बढ़ाया गया है। जिले में करीब 36 कच्चे कर्मचारी हैं। झज्जर के दमकल केंद्र में 6 और बहादुरगढ़ के दमकल केंद्रों में करीब 30 कच्चे कर्मचारी हैं। झज्जर के दमकल केंद्र में मात्र सात पक्के कर्मचारी हैं। यहां पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां व एक बाइक है। इनके हिसाब से अकेले झज्जर के दमकल केंद्र में 90 कर्मचारी चाहिए। लेकिन यहां पर कच्चे व पक्के कर्मचारियों को मिलाकर इंचार्ज सहित मात्र 13 कर्मचारी कार्यरत हैं।
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तीन गांवों की सीमा पर आग लगने से 51 एकड़ गेहूं की फसल जल गई है। कच्चे कर्मचारियों का अनुबंध आठ अप्रैल को समाप्त हो गया था। इस बार विभाग से मंजूरी मिलने में देरी हुई है। जल्द ही विभाग से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। तब तक आपातकालीन सेवाओं को देखते हुए ये लोग काम कर रहे हैं।
बिजेंद्र डागर, दमकल केंद्र प्रभारी, झज्जर।
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इन किसानों को हुआ नुकसान
डीघल, छोछी व मदना गांव की सीमा पर लगी आग से जयपाल की छह एकड़, तारीफ सिंह की साढ़े चार एकड़, सतीश की एक, जयभगवान की पांच, कृष्ण की सात, भूपन की चार, ओम प्रकाश की 11, अनूप की एक, बेगराज की एक, सुरेश की तीन व सत्यवान की आठ एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। बिजली के तारों से निकली चिंगारी के कारण फसल में लगी आग देखकर उसे काबू करने के लिए किसानों ने ट्यूबवेल आदि चलाकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन तापमान अधिक होने व हवाएं चलने के कारण आग बेकाबू होती गई। इसी बीच किसानों ने फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी। लेकिन जब तक दमकल केंद्र की गाड़ी मौके पर पहुंची उस समय तक काफी फसल चलकर राख हो चुकी थी।
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बिना अनुबंध के काम कर रहे कच्चे कर्मचारी
दमकल विभाग में कर्मचारियों की कमी खल रही है। कच्चे कर्मचारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। इन कच्चे कर्मचारियों के अनुबंध की समय सीमा भी आठ अप्रैल को पूरी हो चुकी है। करीब 25 दिन से आपातकालीन सेवाएं होने के कारण व विभाग से मंजूरी मिलने के इंतजार में कच्चे कर्मचारी बिना मंजूरी के ही काम कर रहे हैं। लेकिन दमकल विभाग की लापरवाही के कारण इन कर्मचारियों का अनुबंध नहीं बढ़ाया गया है। जिले में करीब 36 कच्चे कर्मचारी हैं। झज्जर के दमकल केंद्र में 6 और बहादुरगढ़ के दमकल केंद्रों में करीब 30 कच्चे कर्मचारी हैं। झज्जर के दमकल केंद्र में मात्र सात पक्के कर्मचारी हैं। यहां पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां व एक बाइक है। इनके हिसाब से अकेले झज्जर के दमकल केंद्र में 90 कर्मचारी चाहिए। लेकिन यहां पर कच्चे व पक्के कर्मचारियों को मिलाकर इंचार्ज सहित मात्र 13 कर्मचारी कार्यरत हैं।
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तीन गांवों की सीमा पर आग लगने से 51 एकड़ गेहूं की फसल जल गई है। कच्चे कर्मचारियों का अनुबंध आठ अप्रैल को समाप्त हो गया था। इस बार विभाग से मंजूरी मिलने में देरी हुई है। जल्द ही विभाग से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। तब तक आपातकालीन सेवाओं को देखते हुए ये लोग काम कर रहे हैं।
बिजेंद्र डागर, दमकल केंद्र प्रभारी, झज्जर।