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स्थानीय लोगों के विरोध के बाद रात में की नाले की खुदाई
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। शहर के बरसाती व गंदे पानी को पीने वाली माइनर में डालने के लिए बूस्टर पंप और पाइप लाइन दबाने के कार्य को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी नहीं रोका गया। इससे स्थानीय लोगों में काफी रोष हैं। पीने के पानी को दूषित होने से बचाने के लिए लोगों का साथ दे रहे समाजसेवी बुल्लड़ पहलवान ने बताया कि रविवार की शाम को मौके पर मौजूद लोगों व ठेकेदार के बीच बढ़ते विवाद के कारण ठेकेदार ने बुधवार तीन बजे तक इस मामले में कोई समाधान निकालने का समय दे दिया था। लेकिन रविवार रात को ही खुदाई करवा दी गई जिसका लोगों ने विरोध किया तो पुलिस ने लोगों को बताया कि ठेकेदार के पास कमेटी का वर्क ऑर्डर हैं तभी लोगों ने नहर महकमे का पत्र दिखाया। इसमें साफ लिखा हैं कि किसी भी प्रकार का बरसाती व गंदा पानी माइनर में नहीं डाला जा सकता। क्योंकि इस माइनर से शहर व गांव देहात की डिग्गियों व पशु तालाबों में पीने व सिंचाई का पानी जाता हैं। इसमें इस प्रकार का शहर का बरसाती व गंदा पानी एकत्रित करके डाला जाना बिल्कुल गलत हैं। लोगों ने कहा कि शहर के बीचों बीच निकलने वाली माइनर में पीछे से साफ पानी आता हैं तो शहर व गांव में वही साफ पानी जाना चाहिए। हमें इस पानी में दूषित पानी डालने का कोई हक नहीं हैं। लोगों ने मांग की हैं कि इस कार्य का कमेटी द्वारा सरकारी ठेका छोड़ा जाना जांच का विषय हैं। इस गैरकानूनी काम को करने के लिए ठेकेदार से लेकर अधिकारियों व राजनीतिक जो भी लोग शामिल हैं। उन सभी पर नियम अनुसार कारवाई होनी चाहिए। तानाशाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने कहा कि पुलिस ने ठेकेदार द्वारा दिखाए गए वर्क ऑर्डर को तो सरकारी काम बताते हुए अहमियत दी लेकिन उनके द्वारा नहर महकमे के अधिकारियों के पत्र को अनदेखा कर दिया। इस मौके पर रामधन दलाल, सुरजीत, दर्शन, पंडित कुलदीप, धर्मबीर, सुखबीर, रामसिंह, चन्द्र, विनोद, मनोज, शेखर आदि मोजूद थे।
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बहादुरगढ़। शहर के बरसाती व गंदे पानी को पीने वाली माइनर में डालने के लिए बूस्टर पंप और पाइप लाइन दबाने के कार्य को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी नहीं रोका गया। इससे स्थानीय लोगों में काफी रोष हैं। पीने के पानी को दूषित होने से बचाने के लिए लोगों का साथ दे रहे समाजसेवी बुल्लड़ पहलवान ने बताया कि रविवार की शाम को मौके पर मौजूद लोगों व ठेकेदार के बीच बढ़ते विवाद के कारण ठेकेदार ने बुधवार तीन बजे तक इस मामले में कोई समाधान निकालने का समय दे दिया था। लेकिन रविवार रात को ही खुदाई करवा दी गई जिसका लोगों ने विरोध किया तो पुलिस ने लोगों को बताया कि ठेकेदार के पास कमेटी का वर्क ऑर्डर हैं तभी लोगों ने नहर महकमे का पत्र दिखाया। इसमें साफ लिखा हैं कि किसी भी प्रकार का बरसाती व गंदा पानी माइनर में नहीं डाला जा सकता। क्योंकि इस माइनर से शहर व गांव देहात की डिग्गियों व पशु तालाबों में पीने व सिंचाई का पानी जाता हैं। इसमें इस प्रकार का शहर का बरसाती व गंदा पानी एकत्रित करके डाला जाना बिल्कुल गलत हैं। लोगों ने कहा कि शहर के बीचों बीच निकलने वाली माइनर में पीछे से साफ पानी आता हैं तो शहर व गांव में वही साफ पानी जाना चाहिए। हमें इस पानी में दूषित पानी डालने का कोई हक नहीं हैं। लोगों ने मांग की हैं कि इस कार्य का कमेटी द्वारा सरकारी ठेका छोड़ा जाना जांच का विषय हैं। इस गैरकानूनी काम को करने के लिए ठेकेदार से लेकर अधिकारियों व राजनीतिक जो भी लोग शामिल हैं। उन सभी पर नियम अनुसार कारवाई होनी चाहिए। तानाशाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने कहा कि पुलिस ने ठेकेदार द्वारा दिखाए गए वर्क ऑर्डर को तो सरकारी काम बताते हुए अहमियत दी लेकिन उनके द्वारा नहर महकमे के अधिकारियों के पत्र को अनदेखा कर दिया। इस मौके पर रामधन दलाल, सुरजीत, दर्शन, पंडित कुलदीप, धर्मबीर, सुखबीर, रामसिंह, चन्द्र, विनोद, मनोज, शेखर आदि मोजूद थे।