{"_id":"5c802568bdec2275a469f18b","slug":"131551902056-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"12 करोड़ खर्च कर भी स्व्च्छता में पिछड़ गया म्हारा बहादुरगढ़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
12 करोड़ खर्च कर भी स्व्च्छता में पिछड़ गया म्हारा बहादुरगढ़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। स्व्च्छता सर्वेक्षण के नतीजे आ गए हैं। सफाई व्यवस्था पर 12 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी म्हारा बहादुरगढ़ स्वच्छता में पिछड़ गया है। आगे बढ़ना तो दूर पिछली रैंकिंग पर भी बहादुरगढ़ कायम नहीं रह सका। पिछले वर्ष देश में बहादुरगढ़ की रैकिंग 209 व प्रदेश में 9वीं थी। इस बार देश में 228 तो प्रदेश में 12 आई है। पांच हजार में से कुल 2154.15 अंक ही बहादुरगढ़ को मिल पाए हैं। पिछली बार जब रैंकिंग अच्छी नहीं आई तो नगर परिषद ने सफाई का टेंडर लगभग दोगुणा करके 12 करोड़ रुपये कर दिया था। रात्रि के समय सफाई भी कराई गई और शहर में मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था की गई। ये तमाम प्रयास स्वच्छता सर्वे में बहादुरगढ़ की छवि को सुधार नहीं सके। दरअसल, जनवरी माह में सर्वे शुरू हुआ लेकिन जनवरी और फरवरी माह में अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी हड़ताल पर रहे। लिहाजा सफाई कार्य प्रभावित रहा। पिछड़ने ये भी एक बड़ी वजह रही। इसके अलावा भले ही सफाई का टेंडर बढ़ाया हो लेकिन धरातल पर इसका असर दिखा नहीं। सर्वेक्षण टीम जब आई तो शहर में कूड़े के ढेर लगे थे। नाइट स्वीपिंग शुरू जरूर हुई थी लेकिन नियमित नहीं रही। शहर के काफी हिस्से में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान नहीं होता, कूड़ा निस्तारण की भी व्यवस्था नहीं है। फीडबैक देने में भी शहरवासियों ने कोई जागरूकता नहीं दिखाई।
ये कारण भी रहे
- रोजाना सुबह-सवेरे जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आना।
- सड़कों के डिवाइडर के दोनों तरफ नियमित रूप से मिट्टी का उठान न होना।
- शहर के बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों का न होना।
- शहर में हरियाली का अभाव।
अब ये करेगी परिषद
स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के बाद नगर परिषद की ओर से अब शहर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का टेंडर रोहतक में हो गया है। ऐसे में बहादुरगढ़ के सारे कचरे का प्रबंधन रोहतक में होगा। इसके अलावा नाइट स्वीपिंग और घर-घर से कूड़ा उठाने और सफाई पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
शहर में सफाई व्यवस्था पर और अधिक ध्यान दिया जाएगा। पिछले साल 4 हजार के आसपास शहरों में सर्वे था तो इस बार शहरों की संख्या ज्यादा थी। हम नगर परिषदों के मामले में प्रदेश में अब भी दूसरे नंबर पर हैं। इसके अलावा कूड़े का उचित प्रबंधन बहादुरगढ़ ही नहीं किसी भी नगर परिषद में नहीं है। ऐसे में सबसे ज्यादा अंक इसी क्षेत्र में कटे हैं। इस साल सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जाएगा।
विज्ञापन
शीला राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद बहादुरगढ़।
विज्ञापन
बहादुरगढ़। स्व्च्छता सर्वेक्षण के नतीजे आ गए हैं। सफाई व्यवस्था पर 12 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी म्हारा बहादुरगढ़ स्वच्छता में पिछड़ गया है। आगे बढ़ना तो दूर पिछली रैंकिंग पर भी बहादुरगढ़ कायम नहीं रह सका। पिछले वर्ष देश में बहादुरगढ़ की रैकिंग 209 व प्रदेश में 9वीं थी। इस बार देश में 228 तो प्रदेश में 12 आई है। पांच हजार में से कुल 2154.15 अंक ही बहादुरगढ़ को मिल पाए हैं। पिछली बार जब रैंकिंग अच्छी नहीं आई तो नगर परिषद ने सफाई का टेंडर लगभग दोगुणा करके 12 करोड़ रुपये कर दिया था। रात्रि के समय सफाई भी कराई गई और शहर में मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था की गई। ये तमाम प्रयास स्वच्छता सर्वे में बहादुरगढ़ की छवि को सुधार नहीं सके। दरअसल, जनवरी माह में सर्वे शुरू हुआ लेकिन जनवरी और फरवरी माह में अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी हड़ताल पर रहे। लिहाजा सफाई कार्य प्रभावित रहा। पिछड़ने ये भी एक बड़ी वजह रही। इसके अलावा भले ही सफाई का टेंडर बढ़ाया हो लेकिन धरातल पर इसका असर दिखा नहीं। सर्वेक्षण टीम जब आई तो शहर में कूड़े के ढेर लगे थे। नाइट स्वीपिंग शुरू जरूर हुई थी लेकिन नियमित नहीं रही। शहर के काफी हिस्से में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान नहीं होता, कूड़ा निस्तारण की भी व्यवस्था नहीं है। फीडबैक देने में भी शहरवासियों ने कोई जागरूकता नहीं दिखाई।
ये कारण भी रहे
- रोजाना सुबह-सवेरे जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आना।
- सड़कों के डिवाइडर के दोनों तरफ नियमित रूप से मिट्टी का उठान न होना।
- शहर के बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों का न होना।
- शहर में हरियाली का अभाव।
अब ये करेगी परिषद
स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के बाद नगर परिषद की ओर से अब शहर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का टेंडर रोहतक में हो गया है। ऐसे में बहादुरगढ़ के सारे कचरे का प्रबंधन रोहतक में होगा। इसके अलावा नाइट स्वीपिंग और घर-घर से कूड़ा उठाने और सफाई पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
विज्ञापन
शहर में सफाई व्यवस्था पर और अधिक ध्यान दिया जाएगा। पिछले साल 4 हजार के आसपास शहरों में सर्वे था तो इस बार शहरों की संख्या ज्यादा थी। हम नगर परिषदों के मामले में प्रदेश में अब भी दूसरे नंबर पर हैं। इसके अलावा कूड़े का उचित प्रबंधन बहादुरगढ़ ही नहीं किसी भी नगर परिषद में नहीं है। ऐसे में सबसे ज्यादा अंक इसी क्षेत्र में कटे हैं। इस साल सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जाएगा।
विज्ञापन
शीला राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद बहादुरगढ़।