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13 ग्राम पंचायतों ने शराब के ठेके न खोलने के लिए दिए वैलिड प्रस्ताव
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। आबकारी एवं कराधान विभाग के पास इस बार कई ग्राम पंचायतों ने शराब ठेका न खोलने के लिए प्रस्ताव दिए थे। लेकिन विभाग के नियमानुसार ठेका न खोलने के लिए प्रस्ताव देने की तिथि 30 सितंबर तक निर्धारित की गई थी। लेकिन कई ग्राम पंचायतों ने तो दिसंबर के अंत तक प्रस्ताव दिए हैं। उनकी बजाए
विभाग ने 30 सितंबर तक आए हुए प्रस्तावों को ही मानते हुए उनकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजा है। इन प्रस्तावों पर रिपोर्ट के आधार पर विभाग के मुख्यालय की तरफ से फैसला लिया जाएगा कि इन 13 गांवों में से कितने गांवों में ठेका खोला जाएगा और कितने गांवों में नहीं। फरवरी के अंत में या मार्च के प्रथम सप्ताह में ठेकों की नीलामी की जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लगने से पहले ही ठेकों की नीलामी का कार्य पूरा किए जाने की उम्मीद है। क्योंकि नए वित्त वर्ष से नए शराब के ठेके खुल जाते हैं। विभाग के नियमानुसार ठेके खोलने से पूर्व यह देखा जाता है कि जिस ग्राम पंचायत ने शराब का ठेका न खोलने के लिए प्रस्ताव दिया है। उस गांव में दो साल के अंदर अवैध शराब बेचने का तो कोई केस नहीं बना है। आबकारी एवं कराधान विभाग के अलावा पुलिस की तरफ से भी कोई अवैध शराब का केस नहीं बनाया गया। अगर दोनों में से एक ने भी अवैध शराब पकड़ी होगी तो उस गांव में ठेका खोला जाएगा। अगर कोई केस नहीं बना होगा तो उस गांव के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद फैसला लिया जाता है।
इन गांवों के प्रस्तावों पर होगा फैसला
आबकारी एवं कराधान विभाग के पास 13 ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव आए हैं। इनमें लुकसर, रईया, रेढूवास, पलड़ा, खापड़वास, ऊंटलौधा, खातीवास, छबीली, पटासनी, बाबरा, बंबूलिया, न्योला व बाघपुर गांव शामिल हैं। इन गांवों के प्रस्तावों पर आबकारी एवं कराधान विभाग की तरफ से फैसला लिया जाएगा कि किस गांव में ठेका न खोला जाए।
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13 गांवों के प्रस्ताव आए हैं। जिनको कमिश्नर के पास भेेजा गया है, जल्द ही उन पर फैसला हो जाएगा। जल्द ही सरकार की तरफ से शराब के ठेकों को लेकर पॉलिसी जारी की जाएगी और उसके बाद ठेकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- नरेंद्र कौशिक, जिला आबकारी एवं कराधान अधिकारी, झज्जर।
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झज्जर। आबकारी एवं कराधान विभाग के पास इस बार कई ग्राम पंचायतों ने शराब ठेका न खोलने के लिए प्रस्ताव दिए थे। लेकिन विभाग के नियमानुसार ठेका न खोलने के लिए प्रस्ताव देने की तिथि 30 सितंबर तक निर्धारित की गई थी। लेकिन कई ग्राम पंचायतों ने तो दिसंबर के अंत तक प्रस्ताव दिए हैं। उनकी बजाए
विभाग ने 30 सितंबर तक आए हुए प्रस्तावों को ही मानते हुए उनकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजा है। इन प्रस्तावों पर रिपोर्ट के आधार पर विभाग के मुख्यालय की तरफ से फैसला लिया जाएगा कि इन 13 गांवों में से कितने गांवों में ठेका खोला जाएगा और कितने गांवों में नहीं। फरवरी के अंत में या मार्च के प्रथम सप्ताह में ठेकों की नीलामी की जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लगने से पहले ही ठेकों की नीलामी का कार्य पूरा किए जाने की उम्मीद है। क्योंकि नए वित्त वर्ष से नए शराब के ठेके खुल जाते हैं। विभाग के नियमानुसार ठेके खोलने से पूर्व यह देखा जाता है कि जिस ग्राम पंचायत ने शराब का ठेका न खोलने के लिए प्रस्ताव दिया है। उस गांव में दो साल के अंदर अवैध शराब बेचने का तो कोई केस नहीं बना है। आबकारी एवं कराधान विभाग के अलावा पुलिस की तरफ से भी कोई अवैध शराब का केस नहीं बनाया गया। अगर दोनों में से एक ने भी अवैध शराब पकड़ी होगी तो उस गांव में ठेका खोला जाएगा। अगर कोई केस नहीं बना होगा तो उस गांव के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद फैसला लिया जाता है।
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इन गांवों के प्रस्तावों पर होगा फैसला
आबकारी एवं कराधान विभाग के पास 13 ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव आए हैं। इनमें लुकसर, रईया, रेढूवास, पलड़ा, खापड़वास, ऊंटलौधा, खातीवास, छबीली, पटासनी, बाबरा, बंबूलिया, न्योला व बाघपुर गांव शामिल हैं। इन गांवों के प्रस्तावों पर आबकारी एवं कराधान विभाग की तरफ से फैसला लिया जाएगा कि किस गांव में ठेका न खोला जाए।
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13 गांवों के प्रस्ताव आए हैं। जिनको कमिश्नर के पास भेेजा गया है, जल्द ही उन पर फैसला हो जाएगा। जल्द ही सरकार की तरफ से शराब के ठेकों को लेकर पॉलिसी जारी की जाएगी और उसके बाद ठेकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- नरेंद्र कौशिक, जिला आबकारी एवं कराधान अधिकारी, झज्जर।