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हीरो-हिरोईनों की तर्ज पर रैंप पर दिखा हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ पशुओं का जलवा
Updated Sun, 29 Oct 2017 01:38 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
रेड कारॅपेट पर झुक कर अभिवादन करते मुर्राह नस्ल के भैंसे, नृत्य करती बाड़मेरी और नागौरी ऊंटों की जोड़ी, दूध उत्पादन में हरियाणा की सिरमौर देसी गाय व मुर्राह भैंस की ठसक भरी चाल, सधी हुई चाल के साथ रैंप से गुजरते कृषि कार्य के माहिर बैलों की जोड़ी तथा अपने पालकों का मान बढ़ाती गिर-साहीवाल-थारपारकर नस्ल की गाय व सांड को अपने जहन में व मोबाइल के कैमरे में कैद करने को आतुर हजारों की भीड़। झज्जर में चल रही तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती राज्य पशुधन प्रदर्शनी-2017 के सबसे बड़े आकर्षण कैटवॉक ऑन रैंप का यह अतुल्य नजारा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था।
देखते ही बना हर पशु का सौष्ठव और सौंदर्य
आकर्षण की बानगी तो देखिए हरियाणा विधानसभा के स्पीकर कंवर पाल गुर्जर तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी सेलिब्रिटी बने पशुओं के साथ फोटो खिंचवाने का मोह नहीं छोड़ पाए। हरियाणा का सर्वश्रेष्ठ पशुधन लेकर झज्जर की प्रदर्शनी में पहुंचे बाबा राम दास वैदिक गोशाला से आई साहीवाल नस्ल की गाय, खांडा खेड़ी हिसार से अपने बैलों की जोड़ी लेकर पहुंचे कर्मबीर, सिरसा के गजे सिंह, चरखी दादरी के संजय, मतलोडा (पानीपत) के हवा सिंह, जींद के दलेल सिंह व अनिल कुमार, कैथल के नरेश कुमार, फतेहाबाद के कृष्ण, पटौदी के भीम सिंह, सोनीपत के रामनिवास, महेंद्रगढ़ के हंसराज, कड़ौली (गुुरुग्राम) से आए सुभाष की 25 लीटर से अधिक दूध देने वाली भैंसे सहज ही अपने सौष्ठव व सौंदर्य से दर्शकों को लुभा रही थी।
धुनों पर देखते ही बनी पशुधन की चाल
संगीत की धुन पर मॉडल्स की तर्ज पर रैंप से गुजरते हरियाणा के श्रेष्ठ पशुधन हीरा भैंसा, शांति गाय, थारपारकर नस्ल की गाय धावल, रैंप पर सज-धज कर झज्जर के सुखबीर के बाड़मेरी ऊंट सोनू व लालगढ़ दादरी के नागोरी ऊंट सोमबीर के मोनू ऊंट की जोड़ी, मुर्राह नस्ल की भैंस लक्ष्मी, अमृतसरी -मारवाड़ी-नुकरी नस्ल के घोड़े-घोड़ी हरियाणा के पशुधन की सर्वश्रेष्ठता को साबित कर रहे थे। पशुपालन को उन्नत व समृद्ध बनाने के जिस उद्देश्य को लेकर यह प्रदर्शनी आयोजित की गई पशुओं की कैटवॉक को देखकर इसे सफल माना जा सकता है।
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दूध देने में म्हारी गाय भी किसी से कम कोनी
हरयाणा नस्ल में 16 लीटर दूध देने वाली झज्जर के खेड़ी निवासी दीनू की गाय के साथ सेल्फी लेते लोगों का हुजूम इस बात की गवाही दे रहा था कि दंगल फिल्म में आमिर खान के संवाद की तर्ज पर दूध देने में म्हारी गाय भी किसी से कम कोनी। हरियाणा में गाय की देसी नस्लों की बेहतरीन गैलेक्सी इस मेले की शान बनी। कैटवॉक के लिए 57 पशु पंजीकृत किए गए थे।
पशु मेले में देसी गाय श्रद्धा को मिला सेल्फी गाय का तगमा
अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती पशुधन प्रदर्शनी एवं मेले में करनाल से पंहुची देसी नस्ल की गाय श्रद्धा जैसी रैंप पर कैटवॉक के लिए पहुंची तो पूरा पंडाल गोमाता के नारों और जोरदार तालियों से गूंज उठा। देसी गाय श्रद्धा पिछले वर्ष बहु-अकबरपुर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शन में अपनी श्रेणी में चैंपियन रही थी। बाबा रामदास वैदिक गोशाला कुटिया नलवी खुर्द कुंजपुरा करनाल में पोषित देसी गाय श्रद्धा प्रतिदिन 22 लीटर दूध देती है।
देसी गाय श्रद्धा कैट वॉक के लिए अपने पालक स्वामी जी के साथ रैंप पर पंहुची तो पूरा पंडाल तालियों और गोमाता के नारों से गूंज उठा। विधान सभा स्पीकर कंवर पाल और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी मंच से ऊठकर रैंप पर पहुंचे और श्रद्धा के साथ फोटो खिंचवाए। जैसी ही देसी गोमाता श्रद्धा रैंप से नीचे आई तो सैकड़ों युवाओं में गाय के साथ सेल्फी लेने की होड़ लग गई। गोवंश के प्रति प्रेम का मनोहारी दृश्य का नजारा कुछ अलग था और श्रेष्ट पशुधन मेले के उद्देश्य को साकार कर रहा था। हरियाणा की पोस्टर गाय का खिताब जीत चुकी श्रद्धा की उम्र सात साल है और गाय की कीमत पांच लाख रुपये लग चुकी है। लेकिन गोमाता को बेचना हमारी संस्कृति और संस्कार नहीं है।
गाय दूध अमृत है और दूध के उत्पाद से निर्मित घी व अन्य खाद्य पदार्थों की अग्रिम बुकिंग रहती है। उनकी गोशाला में फिलहाल 90 गाय हैं। देसी गाय श्रद्धा के पालक स्वामी संर्पूणानंद ने बताया कि गाय की खुराक में लगभग दस किलो विभिन्न तरह के अनाज और पौष्टिक चारा है।
फोटो कैप्शन-12: पोस्टर गाय श्रद्धा की सेवा करते गोपालक स्वामी संपूर्णानंद।
फोटो कैप्शन-13 रैंप पर श्रद्धा के साथ फोटो खिंचवाते विधानसभा स्पीकर कंवर पाल और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़।
सोनू-मोनू की जोड़ी ने मचाया रैंप पर धमाल
अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
ब्याह शादियों में घोड़ी को नाचते देखा होगा, सर्कस में हाथी को फुटबाल खेलते भी देखा होगा। लेकिन ऊंट चारपाई पर नाचे यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन इस हकीकत का गवाह बनने के लिए आपको केवल झज्जर पुलिस लाईन में आयोजित पशु मेेले में पहुंचना होगा। यहां सोनू और मोनू नाम के ऊंटों की जोड़ी आपके मनोरंजन के लिए तैयार है बस मेला आज तक ही है। सोनू-मोनू का डांस देखने के लिए आपको सुबह 11 बजे तक आज ही आना होगा।
चरखी दादरी के गांव लाड से श्रेष्ट पशु पालक सोमबीर पशु मेले में अपने सोनू-मोनू नाम के दो ऊंट लेकर पहुंचा है। सोनू नागोरी और मोनू बाडमेरी नस्ल का ऊंट है। सोनू की उम्र चार साल और मोनू की उम्र पांच साल है। बाजार में मोनू की कीमत सवा दो लाख तो सोनू की कीमत लगभग डेढ़ लाख है। सोमबीर ने बताया कि जानवरों को नृत्य सिखाना उनका पेशा है। उसने सोनू और मोनू को भी नृत्य सिखाया है। वह अपने ऊंट व घोड़ों को ब्याह शादियों और सार्वजनिक समारोहों में बुकिंग पर लेकर जाता है। साल में एक ऊंट व एक घोड़ी की जोड़ी लगभग छह से सात लाख कमाकर देते हैं। सोमबीर ने बताया कि सोनू-मोनू की डाइट गुड़, दूध, गोरी गेट के साथ पौष्टिक चारा है। वे अपने पशुओं को देखभाल परिवार के सदस्यों की तरह करते हैं। उन्होंने कहा कि ऊंट को नृत्य सिखाना बड़ा टेढ़ा कार्य है लंबाई ज्यादा होने और पांव लंबे होने के कारण रिस्क भी रहता है। लेकिन सोनू व मोनू की जोड़ी घोड़ों की तर्ज पर नाचने में माहिर है और खाट पर भी नाचते हैं।
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झज्जर।
रेड कारॅपेट पर झुक कर अभिवादन करते मुर्राह नस्ल के भैंसे, नृत्य करती बाड़मेरी और नागौरी ऊंटों की जोड़ी, दूध उत्पादन में हरियाणा की सिरमौर देसी गाय व मुर्राह भैंस की ठसक भरी चाल, सधी हुई चाल के साथ रैंप से गुजरते कृषि कार्य के माहिर बैलों की जोड़ी तथा अपने पालकों का मान बढ़ाती गिर-साहीवाल-थारपारकर नस्ल की गाय व सांड को अपने जहन में व मोबाइल के कैमरे में कैद करने को आतुर हजारों की भीड़। झज्जर में चल रही तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती राज्य पशुधन प्रदर्शनी-2017 के सबसे बड़े आकर्षण कैटवॉक ऑन रैंप का यह अतुल्य नजारा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था।
देखते ही बना हर पशु का सौष्ठव और सौंदर्य
आकर्षण की बानगी तो देखिए हरियाणा विधानसभा के स्पीकर कंवर पाल गुर्जर तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी सेलिब्रिटी बने पशुओं के साथ फोटो खिंचवाने का मोह नहीं छोड़ पाए। हरियाणा का सर्वश्रेष्ठ पशुधन लेकर झज्जर की प्रदर्शनी में पहुंचे बाबा राम दास वैदिक गोशाला से आई साहीवाल नस्ल की गाय, खांडा खेड़ी हिसार से अपने बैलों की जोड़ी लेकर पहुंचे कर्मबीर, सिरसा के गजे सिंह, चरखी दादरी के संजय, मतलोडा (पानीपत) के हवा सिंह, जींद के दलेल सिंह व अनिल कुमार, कैथल के नरेश कुमार, फतेहाबाद के कृष्ण, पटौदी के भीम सिंह, सोनीपत के रामनिवास, महेंद्रगढ़ के हंसराज, कड़ौली (गुुरुग्राम) से आए सुभाष की 25 लीटर से अधिक दूध देने वाली भैंसे सहज ही अपने सौष्ठव व सौंदर्य से दर्शकों को लुभा रही थी।
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धुनों पर देखते ही बनी पशुधन की चाल
संगीत की धुन पर मॉडल्स की तर्ज पर रैंप से गुजरते हरियाणा के श्रेष्ठ पशुधन हीरा भैंसा, शांति गाय, थारपारकर नस्ल की गाय धावल, रैंप पर सज-धज कर झज्जर के सुखबीर के बाड़मेरी ऊंट सोनू व लालगढ़ दादरी के नागोरी ऊंट सोमबीर के मोनू ऊंट की जोड़ी, मुर्राह नस्ल की भैंस लक्ष्मी, अमृतसरी -मारवाड़ी-नुकरी नस्ल के घोड़े-घोड़ी हरियाणा के पशुधन की सर्वश्रेष्ठता को साबित कर रहे थे। पशुपालन को उन्नत व समृद्ध बनाने के जिस उद्देश्य को लेकर यह प्रदर्शनी आयोजित की गई पशुओं की कैटवॉक को देखकर इसे सफल माना जा सकता है।
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हरयाणा नस्ल में 16 लीटर दूध देने वाली झज्जर के खेड़ी निवासी दीनू की गाय के साथ सेल्फी लेते लोगों का हुजूम इस बात की गवाही दे रहा था कि दंगल फिल्म में आमिर खान के संवाद की तर्ज पर दूध देने में म्हारी गाय भी किसी से कम कोनी। हरियाणा में गाय की देसी नस्लों की बेहतरीन गैलेक्सी इस मेले की शान बनी। कैटवॉक के लिए 57 पशु पंजीकृत किए गए थे।
पशु मेले में देसी गाय श्रद्धा को मिला सेल्फी गाय का तगमा
अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती पशुधन प्रदर्शनी एवं मेले में करनाल से पंहुची देसी नस्ल की गाय श्रद्धा जैसी रैंप पर कैटवॉक के लिए पहुंची तो पूरा पंडाल गोमाता के नारों और जोरदार तालियों से गूंज उठा। देसी गाय श्रद्धा पिछले वर्ष बहु-अकबरपुर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शन में अपनी श्रेणी में चैंपियन रही थी। बाबा रामदास वैदिक गोशाला कुटिया नलवी खुर्द कुंजपुरा करनाल में पोषित देसी गाय श्रद्धा प्रतिदिन 22 लीटर दूध देती है।
देसी गाय श्रद्धा कैट वॉक के लिए अपने पालक स्वामी जी के साथ रैंप पर पंहुची तो पूरा पंडाल तालियों और गोमाता के नारों से गूंज उठा। विधान सभा स्पीकर कंवर पाल और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी मंच से ऊठकर रैंप पर पहुंचे और श्रद्धा के साथ फोटो खिंचवाए। जैसी ही देसी गोमाता श्रद्धा रैंप से नीचे आई तो सैकड़ों युवाओं में गाय के साथ सेल्फी लेने की होड़ लग गई। गोवंश के प्रति प्रेम का मनोहारी दृश्य का नजारा कुछ अलग था और श्रेष्ट पशुधन मेले के उद्देश्य को साकार कर रहा था। हरियाणा की पोस्टर गाय का खिताब जीत चुकी श्रद्धा की उम्र सात साल है और गाय की कीमत पांच लाख रुपये लग चुकी है। लेकिन गोमाता को बेचना हमारी संस्कृति और संस्कार नहीं है।
गाय दूध अमृत है और दूध के उत्पाद से निर्मित घी व अन्य खाद्य पदार्थों की अग्रिम बुकिंग रहती है। उनकी गोशाला में फिलहाल 90 गाय हैं। देसी गाय श्रद्धा के पालक स्वामी संर्पूणानंद ने बताया कि गाय की खुराक में लगभग दस किलो विभिन्न तरह के अनाज और पौष्टिक चारा है।
फोटो कैप्शन-12: पोस्टर गाय श्रद्धा की सेवा करते गोपालक स्वामी संपूर्णानंद।
फोटो कैप्शन-13 रैंप पर श्रद्धा के साथ फोटो खिंचवाते विधानसभा स्पीकर कंवर पाल और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़।
सोनू-मोनू की जोड़ी ने मचाया रैंप पर धमाल
अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
ब्याह शादियों में घोड़ी को नाचते देखा होगा, सर्कस में हाथी को फुटबाल खेलते भी देखा होगा। लेकिन ऊंट चारपाई पर नाचे यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन इस हकीकत का गवाह बनने के लिए आपको केवल झज्जर पुलिस लाईन में आयोजित पशु मेेले में पहुंचना होगा। यहां सोनू और मोनू नाम के ऊंटों की जोड़ी आपके मनोरंजन के लिए तैयार है बस मेला आज तक ही है। सोनू-मोनू का डांस देखने के लिए आपको सुबह 11 बजे तक आज ही आना होगा।
चरखी दादरी के गांव लाड से श्रेष्ट पशु पालक सोमबीर पशु मेले में अपने सोनू-मोनू नाम के दो ऊंट लेकर पहुंचा है। सोनू नागोरी और मोनू बाडमेरी नस्ल का ऊंट है। सोनू की उम्र चार साल और मोनू की उम्र पांच साल है। बाजार में मोनू की कीमत सवा दो लाख तो सोनू की कीमत लगभग डेढ़ लाख है। सोमबीर ने बताया कि जानवरों को नृत्य सिखाना उनका पेशा है। उसने सोनू और मोनू को भी नृत्य सिखाया है। वह अपने ऊंट व घोड़ों को ब्याह शादियों और सार्वजनिक समारोहों में बुकिंग पर लेकर जाता है। साल में एक ऊंट व एक घोड़ी की जोड़ी लगभग छह से सात लाख कमाकर देते हैं। सोमबीर ने बताया कि सोनू-मोनू की डाइट गुड़, दूध, गोरी गेट के साथ पौष्टिक चारा है। वे अपने पशुओं को देखभाल परिवार के सदस्यों की तरह करते हैं। उन्होंने कहा कि ऊंट को नृत्य सिखाना बड़ा टेढ़ा कार्य है लंबाई ज्यादा होने और पांव लंबे होने के कारण रिस्क भी रहता है। लेकिन सोनू व मोनू की जोड़ी घोड़ों की तर्ज पर नाचने में माहिर है और खाट पर भी नाचते हैं।