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राष्ट्रीय लोक अदालत में रखे गए 975 मामलें, 445 का किया निपटान
Updated Sun, 09 Dec 2018 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें सुनवाई के लिए 975 मामले रखे गए जिनमें से 445 मामलों का निपटारा हो गया। प्राधिकरण चेयरमैन व अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश आरके यादव की अध्यक्षता में इस लोक अदालत का आयोजन किया गया।
लोक अदालत में दीवानी व फौजदारी दोनों तरह के मामलों का निपटारा किया गया। अधिकांश मामले वित्तीय, लेनदेन, चेक बाउंसिंग, यातायात चालान, आरपीएफ चालान, मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम और बीमा राशि से संबंधित थे। एडीजे सीनियर आरके यादव, एडीजे अरविंद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित सहरावत, सिविल जज वरिष्ठ सुमित गर्ग व सिविल जज कनिष्ठ देवेंद्र सिंह ने लोक अदालत में रखे गए मामलों की सुनवाई की और आपसी समझौते के आधार पर दोनों पक्षों की सहमति से 445 मामलों का समाधान किया गया। इन मामलों में एक करोड़ चार लाख 74 हजार रुपये की समझौता राशि निर्धारित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम सुनील यादव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वालंटियर, न्यायिक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने सराहनीय योगदान दिया। अधिवक्ता अविनाश सरदाना, राजेंद्र वर्मा, लाल सिंह, कर्मबीर छिक्कारा, बलबीर शर्मा, गौतम श्योराण, मोहित शर्मा, विनोद चाहर, बलवान सिंह श्योराण सहित बार के सदस्यों व पीएलवी रोहतास शर्मा, आशु आदि का इस आयोजन में विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में सुनाया गया फैसला अंतिम माना जाता है। इसमें न किसी की हार होती है और न ही किसी की जीत। दोनों पक्षों की सहमति से निर्णय होने के कारण दोनों ही विजयी माने जाते हैं और उनका मुकदमों की वजह से अनावश्यक खर्च भी बच जाता है। सुनील यादव ने बताया कि लोक अदालत में एक बार निर्णय हो जाने के बाद उसकी आगे कहीं अपील नहीं की जा सकती।
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चरखी दादरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें सुनवाई के लिए 975 मामले रखे गए जिनमें से 445 मामलों का निपटारा हो गया। प्राधिकरण चेयरमैन व अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश आरके यादव की अध्यक्षता में इस लोक अदालत का आयोजन किया गया।
लोक अदालत में दीवानी व फौजदारी दोनों तरह के मामलों का निपटारा किया गया। अधिकांश मामले वित्तीय, लेनदेन, चेक बाउंसिंग, यातायात चालान, आरपीएफ चालान, मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम और बीमा राशि से संबंधित थे। एडीजे सीनियर आरके यादव, एडीजे अरविंद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित सहरावत, सिविल जज वरिष्ठ सुमित गर्ग व सिविल जज कनिष्ठ देवेंद्र सिंह ने लोक अदालत में रखे गए मामलों की सुनवाई की और आपसी समझौते के आधार पर दोनों पक्षों की सहमति से 445 मामलों का समाधान किया गया। इन मामलों में एक करोड़ चार लाख 74 हजार रुपये की समझौता राशि निर्धारित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम सुनील यादव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वालंटियर, न्यायिक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने सराहनीय योगदान दिया। अधिवक्ता अविनाश सरदाना, राजेंद्र वर्मा, लाल सिंह, कर्मबीर छिक्कारा, बलबीर शर्मा, गौतम श्योराण, मोहित शर्मा, विनोद चाहर, बलवान सिंह श्योराण सहित बार के सदस्यों व पीएलवी रोहतास शर्मा, आशु आदि का इस आयोजन में विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में सुनाया गया फैसला अंतिम माना जाता है। इसमें न किसी की हार होती है और न ही किसी की जीत। दोनों पक्षों की सहमति से निर्णय होने के कारण दोनों ही विजयी माने जाते हैं और उनका मुकदमों की वजह से अनावश्यक खर्च भी बच जाता है। सुनील यादव ने बताया कि लोक अदालत में एक बार निर्णय हो जाने के बाद उसकी आगे कहीं अपील नहीं की जा सकती।
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