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दिल्ली व महेंद्रगढ़ के बीच महाखड होने के कारण आ रहे भूकंप
Updated Thu, 13 Sep 2018 02:00 AM IST
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दिल्ली व महेंद्रगढ़ के बीच महाखंड होने से आ रहे भूकंप
झज्जर। दिल्ली में यमुना और महेंद्रगढ़ खंड (ट्रंच) के बीच का हिस्सा होने से झज्जर भूकंप का केंद्र माना जा रहा है। पिछले तीन दिन में तीन बार आए भूकंप का दो बार झज्जर केंद्र रहा है। बुधवार की सुबह लोग नींद से उठने ही लगे थे कि 5:44 बजे धड़धड़ाहट के साथ झज्जर कांप उठा। मात्र कुछ सेकेंड का भूकंप होने के कारण कहीं कोई नुकसान होने का समाचार नहीं है। रेक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.1 और जमीन के अंदर गहराई 5 किलोमीटर रही है। बार-बार आ रहे भूकंप के कारण लोगों के मन में भय पैदा होने लगा है। सुबह जब भूकंप आया तो लोग घरों से बाहर भागने लगे और गलियाें और सड़कों पर जमा हो गए। लोगों के बीच बार-बार आ रहे भूकंप की ही चर्चा चल रही है। रविवार की शाम 4 बजकर 37 मिनट पर झज्जर में भूकंप के झटके आए। फिर सोमवार को भी 6:28 बजे भूकंप के झटके आए थे। भूकंप की जानकारी के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र दिल्ली की तरफ से भूकंप वैद्यशाला की स्थापना भी की गई है। इससे सैटेलाइट के माध्यम से दिल्ली मुख्यालय से जोड़ा गया है।
शहर के नेहरू कॉलेज में कार्यरत भूगोल के डॉ. रविकिरण मदाना का कहना है कि झज्जर दिल्ली युमना खंड और महेंद्रगढ़ खड के बीच में है। उनका कहना है कि उत्तर भारत में बहने वाली नदियों का प्राकृतिक और अप्राकृतिक रूप से होने वाले भरत के कारण जब भी धरती के अंदर कोई हलचल होगी तो यहां भूकंप के झटके आएंगे। जब हिमालय ऊपर उठा उस समय यह हिस्सा मैदानी भाग बन गया और इसे महाखंड के रूप में जाना जाता है। इस वजह से ही नदियों का करीब 2700 से 3000 मीटर का भरत हो गया है। उनका कहना है कि जब भी पृथ्वी के अंदर कोई हलचल होगी तो भूकंप के झटके अवश्य आएंगे। लेकिन इनकी तीव्रता अगर रैक्टर स्केल पर चार से अधिक हो जाती है तो खतरा बढ़ जाता है। अगर तीव्रता चार से कम रहती है तो नुकसान होने का खतरा काफी कम रहता है।
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झज्जर। दिल्ली में यमुना और महेंद्रगढ़ खंड (ट्रंच) के बीच का हिस्सा होने से झज्जर भूकंप का केंद्र माना जा रहा है। पिछले तीन दिन में तीन बार आए भूकंप का दो बार झज्जर केंद्र रहा है। बुधवार की सुबह लोग नींद से उठने ही लगे थे कि 5:44 बजे धड़धड़ाहट के साथ झज्जर कांप उठा। मात्र कुछ सेकेंड का भूकंप होने के कारण कहीं कोई नुकसान होने का समाचार नहीं है। रेक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.1 और जमीन के अंदर गहराई 5 किलोमीटर रही है। बार-बार आ रहे भूकंप के कारण लोगों के मन में भय पैदा होने लगा है। सुबह जब भूकंप आया तो लोग घरों से बाहर भागने लगे और गलियाें और सड़कों पर जमा हो गए। लोगों के बीच बार-बार आ रहे भूकंप की ही चर्चा चल रही है। रविवार की शाम 4 बजकर 37 मिनट पर झज्जर में भूकंप के झटके आए। फिर सोमवार को भी 6:28 बजे भूकंप के झटके आए थे। भूकंप की जानकारी के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र दिल्ली की तरफ से भूकंप वैद्यशाला की स्थापना भी की गई है। इससे सैटेलाइट के माध्यम से दिल्ली मुख्यालय से जोड़ा गया है।
शहर के नेहरू कॉलेज में कार्यरत भूगोल के डॉ. रविकिरण मदाना का कहना है कि झज्जर दिल्ली युमना खंड और महेंद्रगढ़ खड के बीच में है। उनका कहना है कि उत्तर भारत में बहने वाली नदियों का प्राकृतिक और अप्राकृतिक रूप से होने वाले भरत के कारण जब भी धरती के अंदर कोई हलचल होगी तो यहां भूकंप के झटके आएंगे। जब हिमालय ऊपर उठा उस समय यह हिस्सा मैदानी भाग बन गया और इसे महाखंड के रूप में जाना जाता है। इस वजह से ही नदियों का करीब 2700 से 3000 मीटर का भरत हो गया है। उनका कहना है कि जब भी पृथ्वी के अंदर कोई हलचल होगी तो भूकंप के झटके अवश्य आएंगे। लेकिन इनकी तीव्रता अगर रैक्टर स्केल पर चार से अधिक हो जाती है तो खतरा बढ़ जाता है। अगर तीव्रता चार से कम रहती है तो नुकसान होने का खतरा काफी कम रहता है।
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