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ट्यूबवेल के पानी से छुटकारा, दो घंटे मिलेगी अतिरिक्त सप्लाई
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:44 AM IST
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शहरवासियों को मिलेगा नहरी और फिल्टर का शुद्ध पानी
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहरवासियों को ट्यूबवेल मिक्स पानी के झंझट से जल्द निजात मिल जाएगी। अब शहर मेें जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई नहीं करेगा। शहरवासियों को नहरी और फिल्टर का शुद्ध पानी ही मिलेगा। विभाग ने शहर में अतिरिक्त पेयजल सप्लाई करने की प्लानिंग भी तैयार कर ली है। इससे एक तरफ शहरवासियों को जहां दो घंटे अतिरिक्त पानी मिलेगा तो वहीं, बोरिंग ट्यूबवेल के लवणीय पानी से भी अब उन्हें छुटकारा मिलेगा। दो दिन पूर्व ही जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पेयजल सप्लाई में दिए जाने वाले पानी में एक पीपीएम से दो पीपीएम क्लोरिन मिलाने की योजना भी बनाई थी।
विभाग शहर में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर सतर्क हो गया है। शहर में 40 जोन हैं और सात बूस्टिंग स्टेशनों के जरिए रोजाना करीब 17 घंटे पानी की सप्लाई की जा रही है। इस समय नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने से विभाग ने ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति नहीं करने का निर्णय लिया है। शहर में पौने 12 हजार पेयजल कनेक्शनधारक हैं। जिन्हें शहर के दो मेेन जलघर चंपापुरी के मेन जलघर और रामनगर जलघर से सप्लाई की जाती है इनकी क्षमता 2450 लाख और 1250 लाख लीटर है। जलघरों में इस समय आवश्यकता से अधिक पानी का स्टॉक है। ऐसे में शहर में इस समय पानी की किल्लत नहीं हैं। 13 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के पेयजल के सैंपल लिए थे तो उस समय पानी में क्लोरीन की मात्रा शून्य मिलने पर लोगों का विभाग से विश्वास उठने लगा था। उसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और पानी में क्लोरीन की मात्रा न्यूनतम एक और अधिकतम दो पीपीएम निर्धारित कर दी गई।
छह बोरिंग ट्यूबवेलों का पानी मिलाकर होती थी सप्लाई
अब शहर में ट्यूबवेेल के पानी की सप्लाई नहीं होगी। ट्यूबवेल का पानी लवणीय होने की वजह से यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इस पानी में सभी आवश्यक पोषक तत्व न होने की वजह से यह काफी नुकसानदायक साबित होता है। विभाग ने दोनो जलघरों के पास आधा दर्जन से अधिक ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं।
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क्षेत्र की नहरें हैं पानी से लबालब
इस समय जिले की नहरें पानी से लबालब हैं। पिछले 11 जुलाई से नहरों में पानी लगातार चल रहा है। इस समय नहरों में 850 क्यूसेक पानी चल रहा है जिससे शहर में जलघरों में पानी की कमी नहीं है। नहरों से गांवों के जलघरों में भी पानी पहुंच रहा है। इस समय गांवों में भी नहरी पानी की कमी नहीं है।
नहरी पानी ही पहुंचेगा घरों में
विभाग अब नहरी पानी को ही फिल्टर करने के बाद शहर में सप्लाई करेगा। इस पानी में ट्यूबवेेल का पानी नहीं मिलाया जाएगा। नहरी पानी की कमी होने पर इसमें ट्यूबवेल का पानी मिला दिया जाता था। इससे पानी में टीडीएस की मात्रा भी लगातार बढ़ती रही है। ट्यूबवेल के पानी में खारापन भी है जो घरेलू कामकाज के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अब रोजाना होगी 17 घंटे सप्लाई
शहर में अब रोजाना 17 घंटे तक पानी की सप्लाई होगी। इसके लिए जलघरों की मोटरें रोजाना करीब 20 से 22 घंटे तक चलेंगी ताकि नियमित रूप से सभी बूस्टिंग स्टेशनों में साथ-साथ पानी डाला जा सके ताकि किसी भी एरिया में पानी का संकट पैदा न होने पाए। विभाग सुबह पांच बजे पानी की सप्लाई शुरू कर देता है। सभी 40 जोन में बारी-बारी से पानी की सप्लाई की जाती है।
शहर में यहां बनी है पेयजल समस्या
शहर के वार्ड नंबर दो, तीन, चार, दस, 11, 12, 16, 18 के 30 फीसदी से अधिक भाग में पेयजल समस्या से लोग जूझ रहे हैं। कहीं पानी का प्रेशर कम होने से नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही तो कहीं क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें इसमें आड़े आ रही हैं। शहर के कई वार्ड तो ऐसे हैं जहां 40 साल पहले सीमेंटेंड पेयजल लाइन डाली गई थी, जो अब कंडम हो चुकी है और इसे बदलने की दरकार है। विभाग ने कई वार्डों के प्रपोजल तो तैयार कर रखे हैं लेकिन धरातल पर अब तक काम शुरू नहीं करवाया जा सका है।
==वर्जन--
नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अब शहर में ट्यूबवेल का पानी सप्लाई नहीं किया जाएगा। विभाग पानी को पूरी तरह से फिल्टर व आधुनिक तकनीक से उपचारित कर सप्लाई कर रहा है। शहर में समान रूप से पानी की सप्लाई की जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहरवासियों को ट्यूबवेल मिक्स पानी के झंझट से जल्द निजात मिल जाएगी। अब शहर मेें जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई नहीं करेगा। शहरवासियों को नहरी और फिल्टर का शुद्ध पानी ही मिलेगा। विभाग ने शहर में अतिरिक्त पेयजल सप्लाई करने की प्लानिंग भी तैयार कर ली है। इससे एक तरफ शहरवासियों को जहां दो घंटे अतिरिक्त पानी मिलेगा तो वहीं, बोरिंग ट्यूबवेल के लवणीय पानी से भी अब उन्हें छुटकारा मिलेगा। दो दिन पूर्व ही जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पेयजल सप्लाई में दिए जाने वाले पानी में एक पीपीएम से दो पीपीएम क्लोरिन मिलाने की योजना भी बनाई थी।
विभाग शहर में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर सतर्क हो गया है। शहर में 40 जोन हैं और सात बूस्टिंग स्टेशनों के जरिए रोजाना करीब 17 घंटे पानी की सप्लाई की जा रही है। इस समय नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने से विभाग ने ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति नहीं करने का निर्णय लिया है। शहर में पौने 12 हजार पेयजल कनेक्शनधारक हैं। जिन्हें शहर के दो मेेन जलघर चंपापुरी के मेन जलघर और रामनगर जलघर से सप्लाई की जाती है इनकी क्षमता 2450 लाख और 1250 लाख लीटर है। जलघरों में इस समय आवश्यकता से अधिक पानी का स्टॉक है। ऐसे में शहर में इस समय पानी की किल्लत नहीं हैं। 13 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के पेयजल के सैंपल लिए थे तो उस समय पानी में क्लोरीन की मात्रा शून्य मिलने पर लोगों का विभाग से विश्वास उठने लगा था। उसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और पानी में क्लोरीन की मात्रा न्यूनतम एक और अधिकतम दो पीपीएम निर्धारित कर दी गई।
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छह बोरिंग ट्यूबवेलों का पानी मिलाकर होती थी सप्लाई
अब शहर में ट्यूबवेेल के पानी की सप्लाई नहीं होगी। ट्यूबवेल का पानी लवणीय होने की वजह से यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इस पानी में सभी आवश्यक पोषक तत्व न होने की वजह से यह काफी नुकसानदायक साबित होता है। विभाग ने दोनो जलघरों के पास आधा दर्जन से अधिक ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं।
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क्षेत्र की नहरें हैं पानी से लबालब
इस समय जिले की नहरें पानी से लबालब हैं। पिछले 11 जुलाई से नहरों में पानी लगातार चल रहा है। इस समय नहरों में 850 क्यूसेक पानी चल रहा है जिससे शहर में जलघरों में पानी की कमी नहीं है। नहरों से गांवों के जलघरों में भी पानी पहुंच रहा है। इस समय गांवों में भी नहरी पानी की कमी नहीं है।
नहरी पानी ही पहुंचेगा घरों में
विभाग अब नहरी पानी को ही फिल्टर करने के बाद शहर में सप्लाई करेगा। इस पानी में ट्यूबवेेल का पानी नहीं मिलाया जाएगा। नहरी पानी की कमी होने पर इसमें ट्यूबवेल का पानी मिला दिया जाता था। इससे पानी में टीडीएस की मात्रा भी लगातार बढ़ती रही है। ट्यूबवेल के पानी में खारापन भी है जो घरेलू कामकाज के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अब रोजाना होगी 17 घंटे सप्लाई
शहर में अब रोजाना 17 घंटे तक पानी की सप्लाई होगी। इसके लिए जलघरों की मोटरें रोजाना करीब 20 से 22 घंटे तक चलेंगी ताकि नियमित रूप से सभी बूस्टिंग स्टेशनों में साथ-साथ पानी डाला जा सके ताकि किसी भी एरिया में पानी का संकट पैदा न होने पाए। विभाग सुबह पांच बजे पानी की सप्लाई शुरू कर देता है। सभी 40 जोन में बारी-बारी से पानी की सप्लाई की जाती है।
शहर में यहां बनी है पेयजल समस्या
शहर के वार्ड नंबर दो, तीन, चार, दस, 11, 12, 16, 18 के 30 फीसदी से अधिक भाग में पेयजल समस्या से लोग जूझ रहे हैं। कहीं पानी का प्रेशर कम होने से नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही तो कहीं क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें इसमें आड़े आ रही हैं। शहर के कई वार्ड तो ऐसे हैं जहां 40 साल पहले सीमेंटेंड पेयजल लाइन डाली गई थी, जो अब कंडम हो चुकी है और इसे बदलने की दरकार है। विभाग ने कई वार्डों के प्रपोजल तो तैयार कर रखे हैं लेकिन धरातल पर अब तक काम शुरू नहीं करवाया जा सका है।
==वर्जन--
नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अब शहर में ट्यूबवेल का पानी सप्लाई नहीं किया जाएगा। विभाग पानी को पूरी तरह से फिल्टर व आधुनिक तकनीक से उपचारित कर सप्लाई कर रहा है। शहर में समान रूप से पानी की सप्लाई की जा रही है।