{"_id":"5c63244abdec227376728316","slug":"11550001226-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़सा एम्स में होगा प्रोटोन थैरेपी से इलाज : जीके रथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़सा एम्स में होगा प्रोटोन थैरेपी से इलाज : जीके रथ
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बहादुगरढ़। बाढ़सा स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान देश का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। बड़ा प्रोजेक्ट इसलिए है, क्योंकि यहां पर बेड की संख्या सबसे ज्यादा है और सरकार ने इस संस्थान पर पहले चरण में ही 2025 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। अभी तक सरकार का यह पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जहां इतनी मात्रा में रुपये खर्च किए गए हों। यह बात बाढ़सा एम्स के डायरेक्टर जीके रथ ने कही। डायरेक्टर जीके रथ ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में कैंसर इंस्टीट्यूट पहला ऐसा अस्पताल है जहां पर प्रोटोन थेरेपी (टारगेट थेरेपी) से कैंसर के मरीजों का इलाज किया जाएगा। यहां पर आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए सबसे अत्याधुनिक लैब बनाई गई है। इस लैब में एक दिन में 60 हजार सैंपल की जांच की जाएगी। इससे मरीजों का इलाज में काफी समय बचेगा और जिस मरीज का सैंपल लिया जाएगा उसे उसी दिन रिपोर्ट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रोटोन थेरेपी में लगभग 25 लाख का खर्च आता है और इसकी सुविधा देश में अभी तक सिर्फ निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध थी। लेकिन अब बाढ़सा के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में इसकी सुविधा निशुल्क मिलेगी।
ये है प्रोटोन थेरेपी
प्रोटोन थेरेपी को टारगेट थेरेपी भी कहते हैं। इस थेरेपी का मुख्य कारण कैंसर के सेल को खत्म करना है। अन्य थेरेपी से कैंसर के सेल के साथ-साथ नार्मल सेल भी नष्ट हो जाते थे। नार्मल थेरेपी को कैंसर वाली जगह पर दूर से थेरेपी दी जाती थी। इस वजह से कैंसर के आसपास जितनी भी सेल होती थी, उनको नुकसान पहुंचता था। प्रोटोन थेरेपी के जरिये हम केवल कैंसर सेल को ही टारगेट करेंगे। इसीलिए इसे टारगेट थेरेपी भी कहते हैं। इस थेरेपी से नार्मल सैल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पेपरलेस होगा कैंसर इंस्टीट्यूट
कैंसर इंस्टीट्यूट में केवल ओटी ही नहीं बल्कि पूरा संस्थान ही पेपरलेस होगा। संस्थान में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए कोई भी फाइल नहीं बनानी पड़ेगी, यह संस्थान पूरी तरह से पेपरलेस है। डायरेक्टर जीके रथ ने बताया कि संस्थान पेपरलेस होने से मरीजों के साथ डॉक्टरों में भी काफी उत्साह है। संस्थान पेपरलेस होने से यहां आने वाले मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी। उनके इलाज से जुड़ी सारी जानकारी कंप्यूटर में उपलब्ध है, जिसके लिए उन्हें किसी कागजी कार्रवाई के लिए इधर-उधर भागने की जरूरत नहीं है। वह संस्थान के किसी भी डॉक्टर के पास जाएंगे तो उनकी जानकारी एक यूनिक आईडी के जरिये चिकित्सक के पास उपलब्ध रहेगी। यह यूनिक आईडी मरीज को इलाज शुरू होते ही दे दी जाएगी।
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50 बेड पर काम शुरू
संस्थान में फिलहाल 50 बेड पर काम शुरू हो गया है। दरअसल, पहले फेज में 250 बेड का इंतजाम किया गया है, जिस पर 50 बेड अभी इस्तेमाल में लिए जा रहे हैं। दूसरे फेज में दिसंबर-2019 तक 500 बेड कर दिए जाएंगे। उसके बाद 710 बेड की सुविधा भी मरीजों के लिए उपलब्ध होगी।
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट होगा अब कैंसर का हब
डायरेक्टर जीके रथ ने बताया कि इस संस्थान में केवल कैंसर के मरीजों का इलाज ही नहीं बल्कि यहां पर कैंसर की रिसर्च भी की जाएगी और अगर किसी मरीज को यहां के अलावा विदेश में भी इलाज कराना है तो उस मरीज को उसके इलाज से संबंधित इलेक्ट्रोनिक फाइल दे दी जाएगी, जिससे वह देश-विदेश में भी अपना इलाज करवा सकता है। अगर कोई विदेश में बैठा डॉक्टर कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों से कोई ओपिनियन लेना चाहता है तो इसकी सुविधा भी यहां पर उपलब्ध है।
संस्थान में होंगे 2705 चिकित्सक
कैंसर संस्थान में मरीजों के इलाज के लिए 2705 चिकित्सकों की तैनाती होगी। फिलहाल 15 सीनियर और 25 जूनियर चिकित्सक काम कर रहे हैं। धीरे-धीरे चिकित्सकों की संख्या बढ़ती जाएगी। जीके रथ के मुताबिक, फिलहाल कुल 300 एकड़ में से 64 एकड़ में ही संस्थान बना है। सेवाओं के विस्तार के साथ साथ संस्थान के भवन का भी विस्तार होगा। आगामी 15 वर्ष में शेष 236 एकड़ क्षेत्र में कवर कर लिया जाएगा।
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ये है प्रोटोन थेरेपी
प्रोटोन थेरेपी को टारगेट थेरेपी भी कहते हैं। इस थेरेपी का मुख्य कारण कैंसर के सेल को खत्म करना है। अन्य थेरेपी से कैंसर के सेल के साथ-साथ नार्मल सेल भी नष्ट हो जाते थे। नार्मल थेरेपी को कैंसर वाली जगह पर दूर से थेरेपी दी जाती थी। इस वजह से कैंसर के आसपास जितनी भी सेल होती थी, उनको नुकसान पहुंचता था। प्रोटोन थेरेपी के जरिये हम केवल कैंसर सेल को ही टारगेट करेंगे। इसीलिए इसे टारगेट थेरेपी भी कहते हैं। इस थेरेपी से नार्मल सैल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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पेपरलेस होगा कैंसर इंस्टीट्यूट
कैंसर इंस्टीट्यूट में केवल ओटी ही नहीं बल्कि पूरा संस्थान ही पेपरलेस होगा। संस्थान में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए कोई भी फाइल नहीं बनानी पड़ेगी, यह संस्थान पूरी तरह से पेपरलेस है। डायरेक्टर जीके रथ ने बताया कि संस्थान पेपरलेस होने से मरीजों के साथ डॉक्टरों में भी काफी उत्साह है। संस्थान पेपरलेस होने से यहां आने वाले मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी। उनके इलाज से जुड़ी सारी जानकारी कंप्यूटर में उपलब्ध है, जिसके लिए उन्हें किसी कागजी कार्रवाई के लिए इधर-उधर भागने की जरूरत नहीं है। वह संस्थान के किसी भी डॉक्टर के पास जाएंगे तो उनकी जानकारी एक यूनिक आईडी के जरिये चिकित्सक के पास उपलब्ध रहेगी। यह यूनिक आईडी मरीज को इलाज शुरू होते ही दे दी जाएगी।
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50 बेड पर काम शुरू
संस्थान में फिलहाल 50 बेड पर काम शुरू हो गया है। दरअसल, पहले फेज में 250 बेड का इंतजाम किया गया है, जिस पर 50 बेड अभी इस्तेमाल में लिए जा रहे हैं। दूसरे फेज में दिसंबर-2019 तक 500 बेड कर दिए जाएंगे। उसके बाद 710 बेड की सुविधा भी मरीजों के लिए उपलब्ध होगी।
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट होगा अब कैंसर का हब
डायरेक्टर जीके रथ ने बताया कि इस संस्थान में केवल कैंसर के मरीजों का इलाज ही नहीं बल्कि यहां पर कैंसर की रिसर्च भी की जाएगी और अगर किसी मरीज को यहां के अलावा विदेश में भी इलाज कराना है तो उस मरीज को उसके इलाज से संबंधित इलेक्ट्रोनिक फाइल दे दी जाएगी, जिससे वह देश-विदेश में भी अपना इलाज करवा सकता है। अगर कोई विदेश में बैठा डॉक्टर कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों से कोई ओपिनियन लेना चाहता है तो इसकी सुविधा भी यहां पर उपलब्ध है।
संस्थान में होंगे 2705 चिकित्सक
कैंसर संस्थान में मरीजों के इलाज के लिए 2705 चिकित्सकों की तैनाती होगी। फिलहाल 15 सीनियर और 25 जूनियर चिकित्सक काम कर रहे हैं। धीरे-धीरे चिकित्सकों की संख्या बढ़ती जाएगी। जीके रथ के मुताबिक, फिलहाल कुल 300 एकड़ में से 64 एकड़ में ही संस्थान बना है। सेवाओं के विस्तार के साथ साथ संस्थान के भवन का भी विस्तार होगा। आगामी 15 वर्ष में शेष 236 एकड़ क्षेत्र में कवर कर लिया जाएगा।